ePaper

स्वास्थ्य साथी : मेडिकल सर्टिफिकेट के बिना नहीं होगी निजी अस्पतालों में ऑर्थोपेडिक सर्जरी

Updated at : 24 Jan 2024 2:18 PM (IST)
विज्ञापन
स्वास्थ्य साथी : मेडिकल सर्टिफिकेट के बिना नहीं होगी निजी अस्पतालों में ऑर्थोपेडिक सर्जरी

सरकारी निर्देश में कहा गया है कि संबंधित निजी अस्पताल व नर्सिंग होम की ओर से सरकारी पोर्टल पर पहले से पंजीकृत ऑर्थोपेडिक सर्जन के अलावा कोई भी दूसरा चिकित्सक ऑपरेशन नहीं कर सकेगा, क्योंकि यदि सूची से बाहर का सर्जन सर्जरी करता, तो मरीज को स्वास्थ्य साथी योजना का लाभ नहीं मिलेगा.

विज्ञापन

पश्चिम बंगाल में अच्छे बुनियादी ढांचे वाले सरकारी अस्पतालों (Government hospitals) की कोई कमी नहीं है. इन अस्पतालों में कई निजी अस्पतालों से बेहतर सेवाएं दी जाती हैं. इसके बावजूद ज्यादातर मरीज ऑर्थोपेडिक सर्जरी या किसी सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद ऑर्थोपेडिक सर्जरी के लिए निजी अस्पतालों में जाते हैं और स्वास्थ्य साथी कार्ड पर सर्जरी करवाते हैं. वहीं, स्वास्थ्य विभाग को सूचना मिल रही है कि, स्वास्थ्य साथी योजना का लाभ उठाकर हड्डी की आम बीमारी के शिकार मरीज भी निजी अस्पतालों में सर्जरी करा रहे हैं. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य साथी से संबंधित नियमों में बदलाव करने की है.

निजी अस्पतालों में आपातकालीन इलाज के नियमों में किया गया बदलाव

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी गाइडलाइंस के अनुसार स्वास्थ्य साथी योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में ऑर्थोपेडिक सर्जरी की संख्या बढ़ाने की पहल के साथ निजी अस्पतालों में आपातकालीन इलाज के नियमों में बदलाव किया गया है. नये निर्देश के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति सड़क हादसे में घायल होता है, तो दुर्घटना के 48 घंटे के भीतर मरीज को सरकारी अस्पताल पहुंचाना होगा. दुर्घटना से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत किये जाने के बाद निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य साथी कार्ड पर ऑपरेशन की सुविधा मिलेगी.

Also Read: West Bengal Breaking News : ईडी ने संदेशखाली हमले में संयुक्त एसआईटी गठित करने के आदेश को दी चुनौती
मेडिकल सर्टिफिकेट के बाद कराया जा सकेगा निजी अस्पताल में इलाज

यानी दुर्घटना में घायल व्यक्ति को पहले सरकारी अस्पताल में दिखाना होगा. इसके बाद मेडिकल सर्टिफिकेट प्राप्त करने के बाद निजी अस्पताल इलाज कराया जा सकेगा. गौरतलब है कि जिलास्तर पर लगभग सभी सरकारी अस्पतालों में आर्थोपेडिक्स या सर्जरी के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा है. सरकारी निर्देश में कहा गया है कि संबंधित निजी अस्पताल व नर्सिंग होम की ओर से सरकारी पोर्टल पर पहले से पंजीकृत ऑर्थोपेडिक सर्जन के अलावा कोई भी दूसरा चिकित्सक ऑपरेशन नहीं कर सकेगा, क्योंकि यदि सूची से बाहर का सर्जन सर्जरी करता, तो मरीज को स्वास्थ्य साथी योजना का लाभ नहीं मिलेगा.

Also Read: कांग्रेस पर फिर भड़कीं ममता बनर्जी,टूटा I.N.D.I.A गठबंधन ! बंगाल में भाजपा काे अकेले ही मात देने का किया ऐलान

विज्ञापन
Shinki Singh

लेखक के बारे में

By Shinki Singh

10 साल से ज्यादा के पत्रकारिता अनुभव के साथ मैंने अपने करियर की शुरुआत Sanmarg से की जहां 7 साल तक फील्ड रिपोर्टिंग, डेस्क की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों और राजनीति पर लगातार लिखा. इस दौरान मुझे एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का भी अच्छा अनुभव मिला. बाद में प्रभात खबर से जुड़ने के बाद मेरा फोकस हार्ड न्यूज पर ज्यादा रहा. वहीं लाइफस्टाइल जर्नलिज्म में भी काम करने का मौका मिला और यह मेरे लिये काफी दिलचस्प है. मैं हर खबर के साथ कुछ नया सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने में यकीन रखती हूं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola