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Navratri 2022 6th Day, Katyayani: नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें पूजा विधि और कथा

Updated at : 01 Oct 2022 6:52 AM (IST)
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Navratri 2022 6th Day, Katyayani: नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें पूजा विधि और कथा

Navratri 2022 6th Day, Katyayani: नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है. मां कात्यायनी ने महिषासुर नाम के असुर का वध किया था. जिस कारण मां कात्यायनी को दानवों, असुरों और पापियों का नाश करने वाली देवी कहा जाता है. मां कात्यायनी की पूजा 1 अक्टूबर, शनिवार को हो रही है.

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Navratri 2022 6th Day, Katyayani: नवरात्रि का छठा दिन देवी कात्यायनी का होता है, 1अक्तूबर को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है. इस तिथि पर देवी के कात्यायनी की पूजा की जाती है. मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है. ये स्वर्ण के समान चमकीली हैं. इनकी चार भुजाएं हैं. दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में. मां के बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार है व नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है. मां कात्यायनी का वाहन सिंह है. आगे पढ़ें मां कात्यायनी पूजा विधि, मंत्र, महत्व और कथा.

मां कात्यायनी की पूजा कैसे करें?

गोधूली बेला के समय पीले या लाल वस्त्र धारण करके मां कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए.

इनको पीले फूल और पीला नैवेद्य अर्पित करें.

इनको शहद अर्पित करना विशेष शुभ होता है.

मां को सुगन्धित पुष्प अर्पित करने से शीघ्र विवाह के योग बनेंगे साथ ही प्रेम सम्बन्धी बाधाएं भी दूर होती हैं.

मां कात्यायनी का मंत्र:

चंद्रहासोज्जवलकरा शार्दूलवर वाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनि।

मां कात्यायनी की पूजा का महत्व जानें

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा करने का विधान है. मां कात्यायनी ने महिषासुर नाम के असुर का वध किया था. जिस कारण मां कात्यायनी को दानवों, असुरों और पापियों का नाश करने वाली देवी कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि मां कात्यायनी की पूजा करने से व्यक्ति को अपनी इंद्रियों को वश में करने की शक्ति प्राप्त होती है.

मां कात्यायनी की पौराणिक कथा

मां दुर्गा के इस स्वरूप की प्राचीन कथा इस प्रकार है कि एक प्रसिद्ध महर्षि जिनका नाम कात्यायन था, ने भगवती जगदम्बा को पुत्री के रूप में पाने के लिए उनकी कठिन तपस्या की. कई हजार वर्ष कठिन तपस्या के पश्चात् महर्षि कात्यायन के यहां देवी जगदम्बा ने पुत्री रूप में जन्म लिया और कात्यायनी कहलायीं. ये बहुत ही गुणवंती थीं. इनका प्रमुख गुण खोज करना था. इसीलिए वैज्ञानिक युग में देवी कात्यायनी का सर्वाधिक महत्व है. मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं. इस दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित रहता है. योग साधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है. इस दिन जातक का मन आज्ञा चक्र में स्थित होने के कारण मां कात्यायनी के सहज रूप से दर्शन प्राप्त होते हैं. साधक इस लोक में रहते हुए अलौकिक तेज से युक्त रहता है.

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