अलीगढ़: अस्पताल में मना रानी लक्ष्मीबाई का शहादत दिवस, आजादी की गुमनाम वीरांगनाओं के वंशज को किया गया सम्मानित

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 18 Jun 2023 7:58 PM

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अलीगढ़ में रानी लक्ष्मीबाई की शहादत दिवस पर जिला मलखान सिंह अस्पताल के सभागार में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया. इस मौके पर आजादी की लड़ाई में दो दर्जन वीरांगनाओं की कुर्बानी के योगदान को याद किया गया.

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Aligarh : यूपी के अलीगढ़ में महारानी लक्ष्मीबाई की शहादत दिवस पर जिला मलखान सिंह अस्पताल के सभागार में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया. इस मौके पर आजादी की लड़ाई में दो दर्जन वीरांगनाओं की कुर्बानी के योगदान को याद किया गया. उनके परिवार को सम्मानित किया गया. इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती विजय सिंह ने ‘स्वाधीनता महासमर में अलीगढ़ की वीरांगनाओं’ पुस्तक का विमोचन किया. जिसमें अलीगढ़ की वीरांगनाओं का आजादी में योगदान का चित्रण किया गया है.

गुमनाम महिला क्रांतिकारियों का सम्मान जरूरी

जिला पंचायत अध्यक्ष विजय सिंह ने कहा की रानी लक्ष्मीबाई की शहादत दिवस पर अलीगढ़ की महिला स्वतंत्रता सेनानी के परिवार को सम्मानित किया है. उन्होंने बताया कि इतिहास में गुमनाम महिला क्रांतिकारियों का सम्मान बहुत जरूरी है, क्योंकि उन्हीं की वजह से हम आज स्वतंत्र भारत में रह रहे हैं. क्रांतिकारी परिवार से संबंध रखने वाले सुरेश चंद शर्मा ने बताया कि अलीगढ़ में कस्तूरी देवी, कृष्णा दुलारी, दुर्गा देवी, हेमलता और उर्मिला देवी, गंगा देवी, तोहफा देवी, स्वरूपा, हर प्यारी देवी ने देश की आजादी में अमूल्य योगदान दिया है.

तीसरी पीढ़ी भी अपने क्रांतिकारी पूर्वजों को भूल रही

आजादी के अमृत महोत्सव के समन्वयक सुरेश शर्मा ने बताया कि अलीगढ़ की मातृशक्ति, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में योगदान दिया है. जिनकी संख्या 24 है. लेकिन 13 के बारे में जानकारी एकत्र कर पाए हैं. जिनके परिवार को बुलाकर सम्मानित किया है. सुरेश शर्मा बताते हैं कि अलीगढ़ में सबसे पहले स्वरूपा नाम की वैश्या को अंग्रेजों ने फांसी दी गई थी. उस वैश्या की कब्र आज भी है.

गुमनाम वीरांगनाओं के बारे में शासन प्रशासन ने कभी ध्यान नहीं दिया. जिला प्रशासन को कई बार बताया कि आजादी के चिन्हों को संरक्षित किया जाए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. गुमनाम वीरांगनाओं को इतिहास में भी जगह नहीं दी गई. बड़ी बात यह है कि उनके परिवार वालों को भी नहीं मालूम. तीसरी पीढ़ी भी अपने क्रांतिकारी पूर्वजों को नहीं जानती है.

गुमनाम फ्रीडम फाइटर पर लिखी जा रही किताब

सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि ऐसे गुमनाम क्रांतिकारियों को ढूंढ कर किताब की शक्ल दे रहे हैं. कोलकाता, लंदन, दिल्ली और देश के कई जगह से जानकारी एकत्र कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि 15 अगस्त तक 162 गुमनाम फ्रीडम फाइटर की किताब पब्लिक के बीच में ला रहे हैं.

रिपोर्ट- आलोक, अलीगढ़

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