पारसनाथ पर्वत पर की महापारणा, 557 दिनों के बाद मौन व्रत तोड़कर आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी बोले नमः श्री ॐ

आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज 557 दिनों के बाद आज शनिवार को पारसनाथ पर्वत से नीचे मधुबन पहुंचे, जहां उनके स्वागत की भव्य तैयारियां की गई हैं. जगह-जगह विभिन्न संगठनों ने उनका स्वागत किया. मधुबन का पूरा इलाका इस वक्त भक्तिमय है.
मधुबन(गिरिडीह) राकेश/मृणाल/भोला. आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज ने 557 दिनों के बाद अपना मौन व्रत शनिवार को तोड़ा. मौन व्रत तोड़ने के साथ ही उनके मुख से निकला ‘ नमः श्री ॐ’. इसके बाद आचार्य श्री ने कुछ देर तक ॐ का मंत्रोच्चार किया और कहा कि जब आत्मा मरती ही नहीं, तो डर किस बात की. आचार्य 557 दिनों से पारसनाथ पर्वत की सर्वोच्च चोटी स्थित एक गुफा में तपस्या में लीन थे. इस दौरान उन्होंने 61 दिनों की लघु पारणा करते हुए 496 दिनों तक निर्जला उपवास भी रखा और पर्वत पर ही एकांतवास में रहे.
557 दिनों के बाद पर्वत से नीचे पहुंचे मधुबन
आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज 557 दिनों के बाद आज शनिवार को पारसनाथ पर्वत से नीचे मधुबन पहुंचे, जहां उनके स्वागत की भव्य तैयारियां की गई हैं. जगह-जगह विभिन्न संगठनों ने उनका स्वागत किया. हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गयी. उनके स्वागत और इस धार्मिक कार्यक्रम का गवाह बनने सिर्फ देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि कुवैत, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल समेत कई देशों से श्रद्धालु पहुंचे हैं. इनमें नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री समेत नेपाल के दो-दो सांसद, भारत के केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला शामिल हैं. मधुबन का पूरा इलाका इस वक्त भक्तिमय है.
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दुनिया में तीन ही लोग हैं अच्छे
अक्षय तृतीया के दिन उन्होंने पारणा किया. मौन व्रत के दौरान सिर्फ 19 बार शौच और 42 बार लघुशंका किया. मई से एक अक्टूबर तक शौच नहीं किया. 557 दिनों में वे 61 दिन खड़े रहे. आपको बता दें कि आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज 1 मार्च को पारसनाथ पर्वत पर गए थे. महाराज ने कहा कि इस संसार में तीन ही लोग अच्छे हैं. पहला जो मर गए. दूसरे वे जो पेट में हैं और तीसरे वे जिसे हम जानते ही नहीं.
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