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Jharkhand Lockdown की मार, गढ़वा में भूखे पेट सो रहे मुसहर जाति के 6 परिवार

Updated at : 28 Mar 2020 11:33 AM (IST)
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Jharkhand Lockdown की मार, गढ़वा में भूखे पेट सो रहे मुसहर जाति के 6 परिवार

jharkhand lockdown forced musahar families to sleeps without meal in garhwa district of jharkhand खरौंधी : झारखंड समेत पूरे देश में लॉकडाउन की सबसे ज्यादा मार यदि किसी को पड़ी है, तो वो हैं गरीब और पिछड़ी जाति के लोग. गढ़वा जिला में मुसहर जाति के 6 परिवार के दो दर्जन लोग भूखे पेट सोने के लिए विवश हैं. मामला खरौंधी प्रखंड के बैतरी मोड़ की है. मुसहर जाति के ये सबी लोग लगभग 15 वर्षों से बैतरी मोड़ के पास जंगल में रह रहे हैं. भीख मांग कर गुजर-बसर करते रहे हैं.

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अभिमन्यु

खरौंधी : झारखंड समेत पूरे देश में लॉकडाउन की सबसे ज्यादा मार यदि किसी को पड़ी है, तो वो हैं गरीब और पिछड़ी जाति के लोग. गढ़वा जिला में मुसहर जाति के 6 परिवार के दो दर्जन लोग भूखे पेट सोने के लिए विवश हैं. मामला खरौंधी प्रखंड के बैतरी मोड़ की है. मुसहर जाति के ये सबी लोग लगभग 15 वर्षों से बैतरी मोड़ के पास जंगल में रह रहे हैं. भीख मांग कर गुजर-बसर करते रहे हैं.

देश भर में कोरोना वायरस की वजह से घोषित 21 दिन के लॉकडाउन के कारण मुसहर जाति के इन लोगों को कोई भीख भी देने के लिए तैयार नहीं है. जहां भी ये जाते हैं, वहां तिरस्कार ही झेलना पड़ता है. गांव के लोगों को डर है कि कहीं इनकी वजह से वे कोरोना वायरस की चपेट में न आ जायें.

मुसहर समाज के लोगों का कहना है कि उनके पास चावल, आटा, सब्जी आदि का कोई स्टॉक नहीं है. हर दिन मांगकर लाते हैं और उसी को बनाकर खाते हैं. लेकिन, अब स्थिति अलग है. जहां भी भीख मांगने जाते हैं, वहां से लोग डांटकर भगा देते हैं. इस बुरे वक्त में भी कुछ दयालु लोग हैं, जो कभी-कभार चावल आदि दे देते हैं. जिस दिन कुछ मिल गया, उस दिन भोजन मिल जाता है, वरना भूखे पेट सो जाते हैं.

इन लोगों ने बताया कि तीन दिन में महज तीन बार नून-भात खा पाये हैं. बाकी दिन खाली पेट ही सोना पड़ रहा है. मजबूरी है. कुछ कर भी नहीं सकते. सुकुंती कुंवर, तेजू मुसहर, उदय मुसहर, जयकुमार मुसहर,गुड्डू मुसहर, धर्मेंद्र मुसहर व अन्य ने बताया कि 15 वर्ष से बैतरी मोड़ पर स्थित जंगल में रह रहे हैं. आज तक कोई सरकारी सुविधा नहीं मिली.

उन लोगों ने बताया कि पिछले वर्ष खरौंधी के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) एजाज आलम ने प्रखंड कार्यालय में बुलाया था. आधार कार्ड बनाने के लिए फोटो भी लिया गया, लेकिन आधार कार्ड आज तक नहीं मिला. इनका कहना है कि 6 परिवार के करीब दो दर्जन लोग, जिनमें छोटे-छोटे बच्चे भी हैं, पेड़ के नीचे सोने के लिए मजबूर हैं. इस वर्ष लगातार बारिश में हम और हमारे बच्चे भींगते रहे.

गुड्डू मुसहर ने बताया कि मधु (शहद) छुड़ाने के दौरान पेड़ से गिर गये. माथा फट गया. पैसा नहीं है, इसलिए इलाज नहीं करवा पा रहे हैं. इस संबंध में अंचल अधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी सिद्धार्थ शंकर यादव से पूछने पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार को तत्काल 60-60 किलो चावल भिजवा दिया जायेगा. इन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सके, इसके लिए इनका आधार कार्ड भी बनवाया जायेगा.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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