International Widows Day 2023: अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस आज, जानें इस दिन का इतिहास और महत्व

International Widows Day 2023: विधवाओं के कल्याण के उद्देश्य से हर साल 23 जून को अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस मनाया जाता है. यह दिवस विधवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने, उनके अधिकारों और कल्याण के प्रति समर्पित है.
International Widows Day 2023: आज भी हमारा समाज विधावाओं को उस नजर से नहीं देखता है, जिसकी वो असल में हकदार हैं.ऐसे में इस समाज की जिम्मेदारी बनती है कि विधवाओं को भी बाकी लोगों की तरह दर्जा मिले. ऐसे में इन्हीं महिलाओं को सम्मान दिलाने के लिए हर साल 23 जून को अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस मनाया जाता है.
विधवाओं के कल्याण के उद्देश्य से हर साल 23 जून को अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस मनाया जाता है. यह दिवस विधवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने, उनके अधिकारों और कल्याण के प्रति समर्पित है. इसके माध्यम से विधवाओं के सामने आने वाली सामाजिक, आर्थिक और कानूनी कठिनाइयों को उजागर करना और इन मुद्दों को हल करने के लिए कार्रवाई को बढ़ावा देना है.
संपूर्ण दुनिया में विधवाओं को समाज में सम्मानित स्तर दिलाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 दिसंबर 2010 को घोषणा की थी कि 23 जून 2011 को अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस मनाया जायेगा. गौरतलब है कि ब्रिटेन स्थित लुंबा फाउंडेशन भी साल 2005 से ही विधवाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचारों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपना मिशन चला रही थी. इसी संस्था के प्रयास से संयुक्त राष्ट्र में विधवाओं के खिलाफ जारी अत्याचारों के आंकड़ों को देखते हुए विधवा दिवस की घोषणा की गई थी. इसके बाद से संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, यूनाइटेड किंगडम, सीरिया, केन्या, श्रीलंका, बांग्लादेश सहित कई देशों में विधवा दिवस का आयोजन किया जा रहा है.
हर साल, संयुक्त राष्ट्र दुनिया भर में विधवाओं के सामने आने वाली कठिनाइयों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस के लिए एक नई थीम की घोषणा करता है. इस वर्ष, इस दिन का विषय “लैंगिक समानता के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी” है.
अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस की नींव ब्रिटेन स्थित लूंबा फाउंडेशन ने ही रखी थी. ज्ञात हो कि लुंबा फाउंडेशन की संस्थापिका भारतीय मूल की राजिंदर पॉल लुंबा की माँ ने 1954 के दिन (23 जून) अपने पति को खोया था. 37 साल की उम्र में पति को खोने के बाद उनकी माँ को जिस तरह सामाजिक प्रताड़नाओं एवं अन्य समस्याओं से जूझना पड़ा, उसने राजिंदर पॉल लूंबा के लिए प्रेरणा का काम किया. राजिंदर पॉल लूंबा अपने फाउंडेशन के जरिये अविकसित और गरीब देशों में रहने वाली विधवाओं को उनके बच्चों की शिक्षा, पोषण आदि में सहायता करता है. यह भारत और कई अन्य एशियाई और अफ्रीकी देशों सहित तमाम देशों में सक्रिय है.
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By Shaurya Punj
मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.
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