विश्व के निर्धारित काल से भी पुरानी है हमारी भारतीय संस्कृति, संगोष्ठी में बोलीं रूपा भाटी

Updated at : 20 Jun 2023 6:06 AM (IST)
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विश्व के निर्धारित काल से भी पुरानी है हमारी भारतीय संस्कृति, संगोष्ठी में बोलीं रूपा भाटी

रूपा भाटी ने सरस्वती नदी की ऐतिहासिकता तथा उसकी धारा के खिसकते-खिसकते अन्तर्ध्यान होने के परिप्रेक्ष्य में भारतीय संस्कृति की पुरातात्विकता को रेखांकित किया.

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कोलकाता: भारतीय संस्कृति संसद एवं भारतीय विद्या मंदिर के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारतीय शास्त्रों के आधार पर भारत की प्राचीनता का विवेचन’ विषय पर आर्किटेक्ट शोध प्रज्ञ रूपा भाटी के गहन अध्ययन को केंद्र में रख कर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन रविवार को संसद सभागार में किया गया. इसमें उन्होंने विभिन्न शास्त्रों के साक्ष्य देकर भारतीय इतिहास को 1,72,000 वर्षों से भी पूर्व का सिद्ध किया.

भारतीय संस्कृति के इतिहास की दी जानकारी

भाषा वैज्ञानिक, लोकस्मृति, भूतत्व तथा मिथक शास्त्रों के हवाले से रूपा भाटी ने अत्यंत सुरुचिपूर्ण तरीके से निदर्शित किया कि वेदों तथा उसके बाद के ग्रंथों में वर्णित खगोलीय दशाओं के अध्ययन को भौगोलिक साक्ष्यों के साथ मिला कर देखने से पता चलता है कि भारतीय संस्कृति का इतिहास विश्व के अकादमिशियनों द्वारा निर्धारित काल से भी प्राचीन है. इस संबंध में उन्होंने सरस्वती नदी की ऐतिहासिकता तथा उसकी धारा के खिसकते-खिसकते अन्तर्ध्यान होने के परिप्रेक्ष्य में भारतीय संस्कृति की पुरातात्विकता को रेखांकित किया. दो घंटे के अपने वक्तव्य में विदेशों में हुए युगांतकारी शोधों का उदाहरण देकर लोकस्मृति में आज भी विद्यमान घटनाओं के साथ संगति बिठाते हुए रूपा भाटी ने अपने शोध पर प्रकाश डाला.

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ये थे मौजूद

श्रोता इस अभूतपूर्व आयोजन से प्रफुल्लित दिखे. कार्यक्रम की अध्यक्षता भक्ति वेदांत इंस्टीट्यूट, कोलकाता, के अध्यक्ष भक्ति स्वरूप व्रजापति महाराज ने की. पूरे कार्यक्रम की परिकल्पना संस्थाध्यक्ष डॉ बिट्ठलदास मूंधडा की थी. कार्यक्रम के शुरुआती चरण में डॉ मूंधड़ा ने ही स्वागत भाषण किया. साहित्य मंत्री डॉ तारा दूगड़ ने रूपा भाटी के अतिरिक्त कार्यक्रम में भाग ले रहे अन्य अतिथियों व दर्शक-श्रोताओं के प्रति आभार जताया. राज गोपाल सुरेका, विजय झुनझुनवाला, राजेश दूगड़, गोपाल दास चांडक, महावीर बजाज, डॉ बाबूलाल शर्मा, राजीव माहेश्वरी, बंशीधर शर्मा, महावीर प्रसाद रावत, रतन शाह, राममोहन लाखोटिया, शंकरलाल सोमानी, अजयेंद्र नाथ त्रिवेदी, डॉ शारदा फतेहपुरिया एवं सुमन सरावगी प्रभृति अनेक गणमान्य लोग इस मौके पर उपस्थित थे.

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