नहीं मिल रही शराब, तो कफ सिरप की बढ़ी मांग

Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 27 May 2020 1:32 AM

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प्रखंड मुख्यालय सहित क्षेत्र के सभी चौक चौराहों पर इन दिनों जारी लॉकडाउन के कारण राज्य के बाहर से आने वाले वाहनों का परिचालन बाधित रहने एवं पुलिस द्वारा सघन तरीके से जिले के सीमा पर शुरू किये गये वाहन चेकिंग अभियान के कारण अवैध शराब के कारोबारियों का धंधा मंदा पड़ गया है.

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पतरघट : प्रखंड मुख्यालय सहित क्षेत्र के सभी चौक चौराहों पर इन दिनों जारी लॉकडाउन के कारण राज्य के बाहर से आने वाले वाहनों का परिचालन बाधित रहने एवं पुलिस द्वारा सघन तरीके से जिले के सीमा पर शुरू किये गये वाहन चेकिंग अभियान के कारण अवैध शराब के कारोबारियों का धंधा मंदा पड़ गया है. शराब नहीं मिलने से नशेड़ियों द्वारा विदेशी शराब के अभाव में स्थानीय पुलिस की शिथिलता के कारण नशा के लिए प्रतिबंधित दवा कोरेक्स तथा देशी महुआ शराब का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है.

प्रखंड मुख्यालय स्थित मुख्य बाजार चौक सहित ग्रामीण इलाके के सभी चौक चौराहों एवं चाय पान की दुकानों पर शाम ढ़लते ही नशेड़ी युवाओं द्वारा कोरेक्स कफ सिरप एवं देशी महुआ शराब का सेवन करते नजर आते हैं. बाजार चौक स्थित टावर चौक के समीप पानी से भरे गढ्ढे में इन दिनों सैकड़ों की संख्या में खाली बोतलें जहां तहां फेंकी हुई देखी जा रही है. ज्ञात हो कि दस दिन पूर्व भी लक्ष्मीपुर बस्ती से एक युवक को प्रतिबंधित कोरेक्स सिरप तथा देशी महुआ शराब के साथ पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार कर जेल भेजा था. सूत्रों के अनुसार बाजार चौक स्थित कुछ चिह्नित मेडिकल स्टोर पर दवा की आड़ में ऊंची कीमतों पर कोरेक्स सिरप बेचा जा रहा है.

जिसके कारण इन दिनों प्रतिबंधित कोरेक्स सिरप का सेफ जोन बन गया है. युवा वर्ग के द्वारा प्रतिबंधित कफ सिरप को शराब की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके कारण इसकी इन दिनों मांग बढ़ती जा रही है. दरअसल ज्यादातर कफ सिरपों में कोडिन, सीपीएम सहित अन्य चीजों का व्यापक मिश्रण होता है. जो अधिक मात्रा में लेने पर नशे का काम करता है. इसके अलावे नशे के लिए सिरपों के अलावे इंजेक्शन का भी इस्तेमाल किया जाता है. नशे की गिरफ्त में अधिकतर 14 वर्ष से लेकर 25 वर्ष तक के युवा पाये जाते हैं.

अवैध धंधें में दवा दुकानदारों के अलावे स्थानीय ग्रामीण स्तर पर इन दिनों बनाये जा रहे देशी महुआ शराब का भी धंधा जोरों से चल रहा है. चूंकि इसको बनाने में लागत कम मुनाफा अधिक हो रहा है तथा नशेड़ियों द्वारा विदेशी शराब के अभाव में देशी महुआ शराब में इनो मिलाकर भरपूर नशा किया जा रहा है. कोरेक्स तथा देशी महुआ शराब की आसानी से उपलब्धता के संबंध में जानकारी लिए जाने पर विधि व्यवस्था प्रभारी एसआई उदय कुमार सिंह ने बताया कि नशा के कारोबार पर नजर रखी जा रही है. उन्होंने बताया कि सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि बिना डॉक्टर के पुर्जा के प्रतिबंधित दवा की खरीद तथा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.

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