Hindu New Year 2021: चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को ही क्यों मनाया जाता है हिंदू नव वर्ष, 90 साल बाद बन रहा है ये संयोग

Updated at : 12 Apr 2021 11:01 PM (IST)
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Hindu New Year 2021:  चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को ही क्यों मनाया जाता है हिंदू नव वर्ष, 90 साल बाद बन रहा है ये संयोग

Hindu New Year 2021 Date Importance & Significance of Hindu New Year in India - Hindu New Year 2021: भारत में हिंदू नववर्ष चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है. मान्यता है कि सृष्टि के रचियता ब्रह्रमा जी ने इसी दिन से संसार की रचना को शुरू किया था. इसे नव संवत के नाम से संबोधित किया जाता है. इस साल 13 अप्रैल को यह तिथि पड़ रही है और इसी दिन हिन्दू नववर्ष 2078 प्रारंभ हो रहा है.

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भारत में हिंदू नववर्ष चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है. मान्यता है कि सृष्टि के रचियता ब्रह्रमा जी ने इसी दिन से संसार की रचना को शुरू किया था. इसे नव संवत के नाम से संबोधित किया जाता है. इस साल 13 अप्रैल को यह तिथि पड़ रही है और इसी दिन हिन्दू नववर्ष 2078 प्रारंभ हो रहा है. हिन्दू नववर्ष को विक्रम संवत के नाम से जाना जाता है. विक्रम संवत की चैत्र शुक्ल की पहली तिथि से न केवल नवरात्रि में दुर्गा व्रत-पूजन का आरंभ होता है, बल्कि राजा रामचंद्र का राज्याभिषेक, युधिष्ठिर का राज्याभिषेक, सिख परंपरा के द्वितीय गुरु अंगददेव का जन्म हुआ था.

क्यों खास है चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि

प्राचीन काल में दुनिया भर में मार्च को ही वर्ष का पहला महीना माना जाता था. आज भी बहीखाते का नवीनीकरण और मंगल कार्य की शुरुआत मार्च में ही होती है. ज्योतिष विद्या में ग्रह, ऋतु, मास, तिथि एवं पक्ष आदि की गणना भी चैत्र प्रतिपदा से ही की जाती है.

90 साल बाद बन रहा अद्भुत संयोग

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार नव-संवत्सर में एक बेहद विचित्र योग बन रहा है जोकि हानिकारक परिणाम ला सकता है. हिंदू ग्रंथों के अनुसार, इस समय नव-संवत्सर 2077 चल रहा है, इसका नाम प्रमादी है. पुराणों में कुल 60 संवत्सरों का जिक्र है. इसके मुताबिक़ नवसंवत्सर यानी नवसंवत्सर 2078 का नाम आनंद होना चाहिए था. लेकिन ग्रहों के कुछ ऐसे योग बन रहे हैं जिसकी वजह से इस हिन्दू नववर्ष का नाम ‘राक्षस’ होगा.

इस दिन क्या करें

चैत्र माह की शुरुआत शुक्ल प्रतिपदा से होती है यह कल्पादि तिथि है. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से ही सत युग का प्रारंभ माना जाता है. इस दिन पहले तो सभी को नववर्ष की बधाईं दें. फिर इस माह के प्रारंभ से चार मास तक जलदान करना चाहिए.

इस तरह से करें नव वर्ष की पूजा

हिन्दू धर्म के माह के दो हिस्से होते हैं पहला शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष. चैत्र माह की शुरुआत शुक्ल प्रतिपदा तिथि से होती है. शुक्ल अर्थात जब चंद्र की कलाएं बढ़ती है और फिर अंत में पूर्णिमा आती है.

Posted By: Shaurya Punj

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