Prayagraj: 500 साल से ज्यादा पुराने मंदिर में कैसे दी गई निर्माण की अनुमति, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 15 Apr 2022 12:00 PM
Prayagraj News: याची के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की मंदिर ऐतिहासिक होने के कारण ही संरक्षण की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है. अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि नियमों के विरुद्ध कई व्यवसायियों ने मंदिर परिसर में ही व्यावसायिक निर्माण करा लिया.
Prayagraj News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वृंदावन 500 साल पुराने मदन मोहन मंदिर परिसर में अतिक्रमण और अवैध निर्माण की शिकायत पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग व मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण से जवाब तलब किया है. हाईकोर्ट ने पूछा कि पुरातात्विक महत्व के मंदिर परिसर में प्रतिबंध के बावजूद अतिक्रमण कर कैसे निर्माण कार्य कराया गया. इस मामले में मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल एवं न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ प्रहलाद कृष्ण शुक्ल की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है.
याची के अधिवक्ता महेश शर्मा ने कोर्ट को बताया कि मंदिर का निर्माण वर्ष 1580 में किया गया था. इसका निर्माण नमक व्यवसायी रामदास कपूर ने कराया था. मंदिर निर्माण से पूर्व 1554 में सनातन गोस्वामी ने वहां भगवान कृष्ण की मूर्ति स्थापित की थी. मंदिर का पुरातात्विक महत्व का होने का कारण देखरेख और रख- रखाव की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग के पास है.
याची के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की मंदिर ऐतिहासिक होने के कारण ही संरक्षण की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है. पुरातत्व के नियमों के मुताबिक मंदिर परिसर और उसके करीब 200 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता. नहीं मंदिर के आसपास किसी को भी निर्माण कार्य करने की इजाजत है. अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि नियमों के विरुद्ध कई व्यवसायियों ने मंदिर परिसर में ही व्यावसायिक निर्माण करा लिया.
उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस संबंध में 1180 अवैध निर्माण कर्ताओं को नोटिस तामील कराया गया था. इस संबंध में महज 150 लोगों पर ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई थी. याचिका के माध्यम से सवाल उठाते हुए कोर्ट को बताया गया कि पुरातत्व विभाग के नियमों के विपरीत मंदिर परिसर में कैसे निर्माण कार्य कराया गया. निर्माण कराने की अनुमति व्यवसायियों को किसने दी. इस संबंध में याचिका की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस की डबल बेंच कोर्ट ने पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से जवाब तलब किया है.
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