गोपालगंज में 'कमांडो चाय अड्डा', जानें क्यों NSG कमांडो ठेला लगा बेच रहा कड़क चाय

Updated at : 05 Jun 2022 6:12 PM (IST)
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गोपालगंज में 'कमांडो चाय अड्डा', जानें क्यों NSG कमांडो ठेला  लगा बेच रहा कड़क चाय

बिहार के गोपालगंज में अब एक एनएसजी कमांडो चाय का ठेला लगा कर चाय बेच रहा है. इन्होंने अपने ठेले पर बड़ी अनोखी पांच लाइन लिखी है जो की वायरल हो रही है.

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पटना की ग्रेजुएट चायवाली के बाद अब गोपालगंज में एक एनएसजी कमांडो सड़क पर ठेला लगाकर चाय बेच रहा है. 75 हजार रुपये की हर महीने सैलरी पाने वाला एनएसजी कमांडो चाय का ठेला क्यों लगा रहा है. लोग यह जानने के लिए उत्सुक दिख रहे हैं. अब यह कमांडो चाय वाला सोशल मीडिया पर भी वायरल हो चुका है.

कमांडो चाय अड्डा

गोपालगंज शहर के कलेक्ट्रेट रोड में यह चाय का ठेला है. ठेले पर एक बैनर लगा है. जिस पर लिखा है ‘कमांडो चाय अड्डा’. यहां से गुजरने वालों की जब निगाहें एनएसजी कमांडो के ठेले पर पड़ती है तो अपने आप रूक जाती है.

पिछले 10 दिनों से बेच रहे चाय 

गोपालगंज के सड़क पर चाय बेच रहे इस कमांडो का नाम मोहित पांडेय है. मोहित मोतिहारी के रामगढ़वा थाने के सिंहासिनी गांव के रहनेवाले हैं. वह कलेक्ट्रेट गेट के पास पिछले 10 दिनों से मसालेदार कड़क चाय की दुकान चला रहे हैं. मोहित का कहना है कि पढ़े-लिखे लोग बेरोजगार हैं. वह भले ही भूखे मरते हैं, लेकिन ठेला लगाने में शर्म और संकोच करते हैं. यही सोच को बदलने के लिए कमांडो होकर भी उन्होंने ठेले पर चाय की दुकान खोली है.

2014 में बीएसएफ में ज्वाइन किया था

मोहित ने वर्ष 2014 में बीएसएफ में ज्वाइन किया था. बाद में डेप्युटेशन पर एनएसजी कमांडो के रूप में ड्यूटी की जिसके बाद अभी वह 40 दिनों की छुट्टियां लेकर घर आये हुए हैं. मोहित का मानना है कि कोई भी काम छोटा बड़ा नहीं होता. अगर किसी भी काम को मन और लगन से किया जाये तो छोटी शुरुआत से बड़ी मुकाम पायी जा सकती है. भविष्य की तैयारी करने से पहले वर्तमान में करनी पड़ती है.

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बचपन में हो गई थी पिता की मौत 

मोहित ने बताया कि उनके पिता जितेंद्र पांडेय भी बीएसएफ में ही थे. 1996 में ड्यूटी के दौरान उनकी मौत हो गई थी. जिसके बाद मां के कंधों पर परिवार की सारी ज़िम्मेदारी आ गई थी. उस वक्त मैं सिर्फ दो साल और दो महीने का था, हम लोग एक बहन और दो भाई हैं. पिता की मौत के वक़्त हम सभी छोटे थे. बड़ी बहन और एक छोटा भाई दिव्यांग है. इसलिए मां ने ही सभी की ज़िम्मेदारी उठाई. मोहित ने बताया कि अनुकंपा पर साल 2014 में बीएसएफ में नौकरी हुई हुई थी. उसके बाद साल 2019 में मोहित की शादी हुई.

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