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गढ़वा : दानरो नदी बना डंपिंग यार्ड, मसला सुलझाने के प्रयास में उलझता चला गया नगर परिषद

Updated at : 01 Nov 2023 2:24 PM (IST)
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गढ़वा : दानरो नदी बना डंपिंग यार्ड, मसला सुलझाने के प्रयास में उलझता चला गया नगर परिषद

गढ़वा शहर से प्रतिदिन करीब 20 ट्रैक्टर कचरा निकलता है. लेकिन डंपिंग यार्ड नहीं होने के कारण इसे सीधे दानरो नदी में फेंका जा रहा है. यह सिलसिला करीब 10 वर्षों से चल रहा है. इस वजह से दानरो नदी काफी संकीर्ण हो गयी है.

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पीयूष तिवारी, गढ़वा : गढ़वा शहर का कचरा कहां फेंका जाये, यह मामला लंबे समय से अनसुलझा है. नगर परिषद प्रशासन पिछले 10 सालों से इस मसले को सुलझाने के बजाय स्वयं इसमें उलझ गया है. गढ़वा शहर से प्रतिदिन करीब 20 ट्रैक्टर कचरा निकलता है. लेकिन डंपिंग यार्ड नहीं होने के कारण इसे सीधे दानरो नदी में फेंका जा रहा है. यह सिलसिला करीब 10 वर्षों से चल रहा है. इस वजह से दानरो नदी काफी संकीर्ण हो गयी है. जहां नदी में अभी कचरा डंप किया जा रहा है, वहां गंदगी की वजह से दानरो नदी के करीब से गुजरना मुश्किल हो गया है. वर्तमान में नगर परिषद ने गढ़वा से सटे सुखबाना गांव के केरवा टोला में डंपिंग यार्ड के लिए 10 एकड़ जमीन की घेराबंदी की है. इधर स्थानीय लोगों ने इस मामले को लेेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर रखी है. जनहित याचिका के प्रार्थी रामलाल भुईंया केरवा टोला के ही रहनेवाले हैं. उनकी याचिका की वजह से डंपिंग यार्ड का यह मामला गत चार वर्षों से लंबित है. झारखंड उच्च न्यायालय ने सिया (स्टेट लेवल एनवायरमेंट इंपैक्ट कमेटी) को 21 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

वन विभाग के ट्रेंच से सटा है प्रस्तावित स्थल

जिस स्थान पर डंपिंग यार्ड का निर्माण किया जा रहा है, वह वन विभाग (लहसुनिया पहाड़ी क्षेत्र) के ट्रेंच से बिल्कुट सटा है. इस पहाड़ी पर सैकड़ो की संख्या में नीलगाय, बंदर व वनसुअर जैसे जंगली जीव रहते हैं. ऐसे में पर्यावरण क्लियरेंस दे पाना आसान नहीं है. बताया जाता है कि वन सीमा से किसी परियोजना की दूरी कम से कम 250 मीटर होनी चाहिए. इसके अलावे आसपास कोई जलाशय नहीं होना चाहिए. लेकिन जहां डंपिंग यार्ड बनाया जा रहा है, वह आहर के बीच है तथा इसके बगल में तालाब भी मौजूद है. इसके अलावे अंदर में ग्रामीणों के खोदे गये कूप, खेत, घर व करीब 100 साल पुराना शिव मंदिर भी मौजूद है. ऐसे में यह स्थल डंपिंग यार्ड के लिए उपयुक्त नहीं है. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 10 एकड़ जमीन पर भले ही नगर परिषद ने चहारदीवारी कर दी है, लेकिन उसके अंदर अब भी कई ग्रामीणों के घर हैं, जिसमें वे रह भी रहे हैं. ग्रामीणों को अभी तक वहां से हटाया नहीं जा सका है.

कई स्थल बदलने के बाद भी जमीन नहीं मिली

नगर परिषद की ओर से सुखबाना गांव में कचरा डंपिंग यार्ड बनाने का मामला लंबे समय से लटका है. लेकिन इसके पूर्व नगर परिषद ने गढ़वा प्रखंड के परिहारा गांव में भी कचरा डंप करने का प्रयास किया था. लेकिन वहां भी ग्रामीणों का भारी विरोध झेलना पड़ा था. साथ ही इस मामले के राजनीतिक रूप लेने के बाद नगर परिषद को वहां से हटना पड़ा. इसके बाद फरठिया गांव में भी डंपिंग यार्ड बनाने का प्रयास किया गया. लेकिन प्रथम चरण में ही वहां भी विरोध होने के बाद सुखबाना गांव के गुरदी मार्ग पर (वर्तमान स्थल से अलग) इसके लिए 10 एकड़ जमीन चिह्नित की गयी. लेकिन यहां भी विरोध के बाद नगर परिषद को केरवा टोला में डंपिंग यार्ड बनाने का प्रयास शुरू किया गया. यहां भी ग्रामीण शुरू से ही इसका विरोध कर रहे थे, लेकिन नगर परिषद की ओर से जबरन बल प्रयोग कर यहां चहारदीवारी बना दी गयी. इस बीच ग्रामीणों ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर दी.

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