Flight Movie Review: इस ‘फ्लाइट’ से दूर रहने में है समझदारी

Flight Movie Review : मौजूदा दौर में बॉलीवुड के कई एक्टर्स प्रोड्यूसर्स भी हैं. यह दोहरी जिम्मेदारी का नाम है. जिसमें यह समझ बहुत ज़रूरी है कि सिनेमा दर्शकों के लिए बनाया जाता है खुद के लिए नहीं. यही अहम बात फ़िल्म फ्लाइट के नवोदित अभिनेता और निर्माता मोहित चड्ढा भूल कर गए हैं.
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फ़िल्म -फ्लाइट
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निर्देशक- सूरज जोशी
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कलाकार-मोहित चड्ढा,पवन मल्होत्रा,जाकिर हुसैन,विवेक वासवानी,शिबानी बेदी और अन्य
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रेटिंग -डेढ़
मौजूदा दौर में बॉलीवुड के कई एक्टर्स प्रोड्यूसर्स भी हैं. यह दोहरी जिम्मेदारी का नाम है. जिसमें यह समझ बहुत ज़रूरी है कि सिनेमा दर्शकों के लिए बनाया जाता है खुद के लिए नहीं. यही अहम बात फ़िल्म फ्लाइट के नवोदित अभिनेता और निर्माता मोहित चड्ढा भूल कर गए हैं.
फ़िल्म की शुरुआत एक प्लेन दुर्घटना से होती है. जिससे लगता है कि फ़िल्म की एविएशन इंडस्ट्री में हो रहे घोटालों की बात को सामने लाएगी लेकिन फ़िल्म में बस इस विषय को छुआ भर ही है पूरी फिल्म मोहित चड्ढा यानी रणवीर मल्होत्रा के किरदार के इर्द गिर्द ही चलती है. जो बहुत ही रईस है. जिसके पास महंगी गाड़ियां,प्राइवेट जेट है. जो अकेले अपनी एविएशन कंपनी में हो रही धांधलियों का पर्दाफाश करने में जुटा है लेकिन उसकी ही जान पर बन आती है. बिना पायलट के हवा में उड़ती प्राइवेट जेट में वह फंस जाता है.
कैसे वह खुद को बचाता है. यही फ़िल्म की कहानी है. फ़िल्म का कांसेप्ट सुनने में ठीक लग सकता है लेकिन परदे पर जो कुछ भी नज़र आता है और उसके साथ फ़िल्म के संवाद। वह इस सर्वाइवल ड्रामा को सरदर्द बना जाता हैं. फ़िल्म के लेखक और निर्देशक ने सिनेमैटिक लिबर्टी के आधार पर ही पूरी फिल्म बनायी है. फ़िल्म का लॉजिक से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं है. हीरो है साथ में फ़िल्म का प्रोड्यूसर भी तो वह कभी भी पायलट बन सकता है और प्लेन उड़ा सकता है. सिर्फ यही नहीं ऑटोपायलट मोड पर फ्लाइट इंडिया से सोमालिया फिर सोमालिया से अबू धाबी के चक्कर काटती है.
दिक्कत की बात ये है कि फ़िल्म के एंड में कुछ सवाल खड़े करती है और उसके जवाब फ़िल्म के दूसरे पार्ट में मिलेंगे. फ़िल्म खत्म होते होते इस बात की भी घोषणा करती है.
अभिनय की बात करें तो एक्टर और निर्माता मोहित चड्ढा को यह बात समझने थी कि कंटेंट मौजूदा समय में किंग हैं. अपनी पहली ही फ़िल्म में उन्हें रजनीकांत,अमिताभ बच्चन की तरह लार्जर देन लाइफ वाला किरदार लिखवाने क्या ज़रूरत थी. मोहित चड्ढा ने अपने किरदार को प्रभावी के साथ साथ फनी बनाने की बहुत कोशिश की है लेकिन वह शाहरुख खान की सस्ती कॉपी से ज़्यादा फ़िल्म में नज़र नहीं आते हैं.
फ़िल्म में सहायक कलाकारों के तौर पर मंझे हुए अभिनेता पवन मल्होत्रा और जाकिर हुसैन हैं लेकिन फ़िल्म की स्क्रीनप्ले और संवाद इतने बोझिल हैं कि उनका अभिनय भी स्क्रीन पर राहत नहीं दे पाता है. बाकी के किरदारों के लिए फ़िल्म में करने को कुछ खास नहीं था. कुलमिलाकर मनोरंजन के नाम पर यह फ्लाइट खटारा है.
Posted By: Shaurya Punj
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