राज्य में पहला जलकुंभी उधोग स्थापित होगा पूर्व बर्दवान जिले में, इलाके के लोगों को मिलेगा रोजगार

विश्व भारती के छात्र तथा स्थानीय युवक राजू बाग जलकुंभी से कई सामग्रियों को तैयार कर आश्चर्यचकित सभी को कर दिया था. इस जलकुंभी के द्वारा तैयार सामग्रियों को देखकर मंत्री काफी प्रभावित हुए थे,और उन्होंने राज्य सरकार से इस दिशा में उद्योग स्थापना की बात कही थी.
बर्दवान,मुकेश तिवारी : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सहयोग से राज्य में पहला जलकुंभी उधोग की स्थापना पूर्व बर्दवान जिले में होने जा रही है. राज्य के मंत्री स्वपन देवनाथ ने इस आशय की जानकारी देते हुए बताया की यह जलकुंभी उधोग जिले के पूर्वस्थली में स्थापित होगा. क्योंकि यहां सबसे ज्यादा जलकुंभी की पैदावार होती है. इस क्षेत्र में इस उधोग के लगने से यहां के लोगों में रोजगार का सृजन होगा. बताया जाता है की इस उधोग की स्थापना हेतु भूमि आवंटित हो गई है. वही राज्य सरकार ने इस उधोग हेतु प्रथम चरण के कार्य के लिए 48 लाख रुपए आवंटित कर दिया है. इस कार्य हेतु जिले के विकास अधिकारी और उनकी टीम क्षेत्र का मुआयना कर यह निश्चित कर दिया है की जल्द ही इस उधोग के लिए कार्य शुरू हो जाएगा.
मंत्री ने बताया की दिसंबर माह से ही इस उधोग की स्थापना का काम शुरू हो जायेगा. मुख्य रूप से यहां जलकुंभी से तैयार सामग्री को राज्य समेत देश और विदेशों में निर्यात किया जाएगा. बताया जाता है कि पूर्वस्थली एक नंबर ब्लॉक के तुलसी डांगा में उक्त उद्योग की स्थापना की जाएगी .मंत्री सपन देवनाथ ने कहा कि क्षेत्र में जलकुंभी के जगह-जगह पैदावार को देखते हुए काफी दिन से मन में यह इच्छा थी कि इस जलकुंभी से कोई उद्योग स्थापित किया जाए और इसे काम में लगाया जाय ताकि यहां के लोगों को रोजगार मिल सके. इस उद्योग की स्थापना की कल्पना के बाद राज्य सरकार ने इसे हरी झंडी दे दी है और इस उद्योग की स्थापना जल्द ही होगी.
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हाल ही में उधोग हेतु भूमि का परिदर्शन स्वय मंत्री स्वपन देवनाथ, जिला खादी अधिकारी मानस गोश्वामी, पंचायत रंजित देवनाथ समेत अन्य अधिकारी ने किया है. बताया जाता है कि विश्व भारती के छात्र तथा स्थानीय युवक राजू बाग जलकुंभी से कई सामग्रियों को तैयार कर आश्चर्यचकित सभी को कर दिया था. इस जलकुंभी के द्वारा तैयार सामग्रियों को देखकर मंत्री काफी प्रभावित हुए थे और उन्होंने राज्य सरकार से इस दिशा में उद्योग स्थापना की बात कही थी. और इसके बाद ही इस दिशा में कार्य शुरू हो गया. बताया जाता है कि स्थानीय महिलाओं तथा लोगों को जलकुंभी से तैयार सामग्रियाें का प्रशिक्षण देकर उन्हें इस कार्य में लगाया जाएगा.
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समुंदर सोख यानी जलकुंभी को एक जलीय खरपतवार माना जाता है और लोग इसे यूंही उखाड़ कर फेंक देते हैं. बंगाल का आतंक भी इसे कहा जाता था. लेकिन जलकुंभी में कई औषधीय गुण होते हैं और यह कई बीमारियों में कारगर है. यह समूचे भारत में बड़े पैमाने पर पाया जाता है, लेकिन लोग इसे बेकार समझते हैं और उखाड़ कर यूंही फेंक देते हैं.
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इसमें विटामिन ए, विटामिन बी, प्रोटीन, मैग्निसियम जैसे कई पोषक तत्व होते हैं और यह ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और डायबिटीज से लेकर कैंसर तक में कारगर है. हालांकि, इसके ज्यादा सेवन के भी नुकसान हैं और इसे हमेशा आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह पर ही इस्तेमाल करना चाहिए.लोग इसे सब्जी और सलाद की तरह भी खाते हैं. साथ ही इसका फूल काफी सुंदर होता है. इसके फूल को सजावट के तौर पर भी उपयोग में लिया जाता है.
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जलकुंभी से डस्टबीन, बाक्स, टोकरी, पेन होल्डर, बैग, टेबल मैट जैसे कई इको फ्रेंडली सामान बनते हैं और यह स्थानीय स्तर पर लोगों के लिए आमदनी का अच्छा जरिया बन सकता है. इसे ही देखते हुए राज्य सरकार इस दिशा में कदम बढ़ा रही है.
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