महंगे पेट्रोल-डीजल से राहत देगा इथेनॉल, झारखंड में प्रस्ताव तैयार, जानिए कब से होगा उत्पादन
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 31 Oct 2021 6:26 AM
इथेनॉल को ग्रीन फ्यूल बोला जाता है. यह पेट्रोल और डीजल का विकल्प साबित होगा. पेट्रोलियम आयात पर अत्यधिक निर्भरता रोकने के लिए केंद्र सरकार इथेनॉल इंधन को अपनाने पर जोर दे रही है.
सुनील चौधरी, रांची: झारखंड में 700 किलो लीटर प्रति दिन (केएलपीडी) इथेनॉल का उत्पादन होगा. केंद्र सरकार ने झारखंड की पांच कंपनियों से इथेनॉल खरीदने के लिए अनुबंध किया है. जानकारी के अनुसार इनलैंड पावर, केजी स्प्रीट्स, ग्लोबस स्प्रीट्स लिमिटेड, ईस्टर्न इंडिया सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड और अंकुर बायोकेम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से इथेनॉल खरीदने के लिए 10 साल का अनुबंध किया गया है. बताते चलें कि इथेनॉल को ग्रीन फ्यूल बोला जाता है. यह पेट्रोल और डीजल का विकल्प साबित होगा. पेट्रोलियम आयात पर अत्यधिक निर्भरता रोकने के लिए केंद्र सरकार इथेनॉल इंधन को अपनाने पर जोर दे रही है.
झारखंड में इथेनॉल कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए नीति बनायी गयी है. इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है. राज्य में जल्द ही प्लांट लगने की संभावना है. भारत सरकार ने 17.9.2021 को पेट्रोलियम कंपनी से 10 साल के अनुबंध के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मंगाया गया था. इसमें पूरे देश में 110 कंपनियों से इथेनॉल खरीदने के लिए अनुबंध किया गया है. इनमें झारखंड की पांच कंपनियां शामिल हैं.
इथेनॉल प्लांट लगानेवालों को झारखंड में 10 करोड़ रुपये तक की इंटरेस्ट सब्सिडी देने का प्रावधान किया जा रहा है. इसमें सूक्ष्म उद्योगों को 30 लाख, लघु उद्योगों को एक करोड़, मध्यम उद्योगों को दो करोड़ और वृहत उद्योगों को 10 करोड़ रुपये तक इंटेरस्ट सब्सिडी देने का प्रावधान है. राज्य सरकार द्वारा एससी, एसटी, इबीसी, महिला, विकलांग, शहीद की विधवा समेत अन्य लोगों के लिए भी विशेष सब्सिडी का प्रावधान किया गया है.
इथेनॉल घरेलू रूप से उत्पादित होता है, खासकर फसलों से. यह विदेशी तेल और ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन पर निर्भरता को कम करने में मदद करता है. जानकार बताते हैं कि इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर इस्तेमाल करने पर पूरे देश में 30 हजार करोड़ रुपये की बचत हो सकती है. भारत सरकार का अनुमान है कि 2025 तक 1016 करोड़ लीटर की मांग होगी. इथेनॉल के इस्तेमाल से दोपहिया वाहनों से 50 प्रतिशत और चार पहिया वाहनों से 30 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन में कमी आयेगी.
झारखंड में टुकड़े चावल व मकई तथा धान से इथेनॉल तैयार होगा. कंपनियों द्वारा इसकी तैयारी की जा रही है. झारखंड में धान का उत्पादन पर्याप्त मात्रा में है, जिस कारण कच्चे माल की उपलब्धता भी रहेगी. इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर इस्तेमाल करने पर यह वैकल्पिक फ्यूल का काम करता है. इससे प्रदूषण भी कम होता है.
600 करोड़ रुपये की लागत से इनलैंड पावर लिमिटेड द्वारा रामगढ़ जिले के गोला में इथेनॉल उत्पादन प्लांट लगाया जायेगा. इनलैंड 270 किलोलीटर प्रतिदिन उत्पादन क्षमता का प्लांट लगायेगा. पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा 8.91 करोड़ लीटर इथेनॉल की खरीदारी कंपनी से की जायेगी. इसी तरह केजी स्प्रीट्स 160 केएलपीडी क्षमता का प्लांट लगायेगा. कंपनी द्वारा 240 करोड़ रुपये का निवेश किया जायेगा. ग्लोबस स्प्रीट्स लिमिटेड 70 केएलपीडी क्षमता का प्लांट लगा रहा है. कंपनी द्वारा 105 करोड़ रुपये का निवेश किया जायेगा. ईस्टर्न इंडिया सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड 40 केएलपीडी क्षमता का प्लांट लगायेगा. कंपनी द्वारा 60 करोड़ रुपये का निवेश किया जायेगा. अंकुर बायोकेम 160 केएलपीडी क्षमता का प्लांट लगायेगा. कंपनी द्वारा 240 करोड़ रुपये का निवेश किया जायेगा.
Posted by: Pritish Sahay
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