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Jharkhand: यहां पीस नहीं, ‘फायर’ है, कोई झुकने को नहीं है तैयार, प्रभावित हो रहा 3 हजार परिवार का रोजगार

Updated at : 17 Oct 2022 1:30 PM (IST)
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Jharkhand: यहां पीस नहीं, ‘फायर’ है, कोई झुकने को नहीं है तैयार, प्रभावित हो रहा 3 हजार परिवार का रोजगार

कोयले की लोडिंग में वर्चस्व व रंगदारी को लेकर पिछले तीन सप्ताह से विधायक ढुल्लू महतो व पूर्व मंत्री जलेश्वर महतो के समर्थकों के बीच खूनी संघर्ष जारी है. जिसके कारण आम जन प्रभावित हो रहा है. पूरे कोयलांचल की आबो-हवा तनावपूर्ण हो गयी है. इस कारण तीन हजार असंगठित मजदूरों के समक्ष विकट स्थिति आ गयी है.

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Dhanbad News: कोयले की लोडिंग में वर्चस्व व रंगदारी को लेकर मोदीडीह कोलडंप तथा बांसजोड़ा कांटा में पिछले तीन सप्ताह से विधायक ढुलू महतो व पूर्व मंत्री कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष जलेश्वर महतो के समर्थकों के बीच जारी खूनी संघर्ष के कारण आम जन भी प्रभावित हो रहा है. पूरे बाघमारा कोयलांचल की आबो-हवा तनावपूर्ण हो गयी है. इस कारण दोनों स्थानों के लगभग तीन हजार असंगठित मजदूरों के समक्ष विकट स्थिति आ गयी है. डेली पैसा कमा कर घर चलाने वाले मजदूर दोनों गुटों में बंटे हुए हैं. खुल कर कुछ बोल नहीं पा रहे हैं, उनमें यह हिम्मत भी सही-गलत का वे निर्णय ले सके. दोनों की अदावत के कारण अब तक जहां समर्थक ही लड़ते-भिड़ते रहे हैं, वहीं बीसीसीएल को भी करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

लक्ष्य का दस प्रतिशत कोयला भी यहां से अब तक डिस्पैच नहीं हो पाया है. वाशरी को इस डंप से प्रतिदिन परिवहन होने वाला कोयला का गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहा है. इस कारण स्टॉक काफी मात्रा में जमा हो गया है. वर्चस्व और रंगदारी की इस लड़ाई में दोनों के समर्थक झुकने को तैयार नहीं हैं. जोगता, लोयाबाद तथा केंदुआडीह थाना में अब तक आधा दर्जन कांड दोनों समर्थकों पर दर्ज हो चुके हैं.

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कोयले की लिफ्टिंग पर कब्जा जमाना ही मकसद

जानकारी हो कि मोदीडीह डंप से कोयला उठाव के लिए बीसीसीएल ने विभिन्न 131 डीओ धारकों को अनुमति दी है. पूर्व से ही डीओधारक लिफ्टर के माध्याम से कोयला उठाव करते रहे हैं. इस पर पहले विधायक ढुलू महतो का कब्जा था. किंतु बदले परिवेश में अधिकतर डीओ धारकों ने मोदीडीह डंप से अपना कोयला उठाव की जिम्मेवारी जलेश्वर समर्थक राज कुमार महतो तथा असलम मंसूरी को दे दी. यह बात विधायक को नागवार गुजरी, तब विधायक समर्थकों ने पिकिंग- ब्रिकिग में असंगठित मजदूरों की मजदूरी 400 रुपया देने की मांग करते हुए 23 सितंबर से मोदीडीह डंप पर आंदोलन शुरू कर दिया. वर्तामान में यहां 260 रुपया प्रतिदिन दिया जा रहा है. सूत्रों की मानें तो यह लड़ाई मजदूरी बढ़ाने की नहीं, बल्कि कब्जा जमाने के लिए है.

मोदीडीह डंप पर दूसरी बार व बांसजोड़ा कांटा पर पहली बार लगी निषेधाज्ञा

मोदीडीह कोलडंप में दूसरी बार तथा बांसजोडा कांटा घर तनाव को देखते हुए दूसरी बार अनुमंडल पदाधिकारी ने निषेधाज्ञा लगायी है. सख्ती से आदेश अनुपालन का निर्देश स्थानीय पुलिस को दी गयी है. मोदीडीह कोलियरी के कोलडंप एवं कांटा घर के क्षेत्र के 500 मीटर की परिधि तक निषेधाज्ञा जारी है. मोदीडीह डंप पर एक पखवारा पूर्व भी निषेधाज्ञा लगायी गयी थी. उसके बाद एसडीओ ने 26 सितंबर से यहां फिर से निषेधाज्ञा लागू की है.

मजदूरों को हक दिलाना ही उद्देश्य : ढुल्लू महतो

बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो का कहना है कि असंगठित मजदूरों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाला जा रहा है. 400 रुपये मजदूरी भुगतान के स्थान पर उन्हें 260 रुपये दिया जा रहा है. कई स्थानों पर पिकिंग ब्रिकिंग की मजदूरी 400 रुपये प्रति टन की दर से डीओ धारक भुगतान कर रहे हैं. मगर यहां कुछ लोग निजी फायदे के लिए मजदूरी मात्र 260 रुपया प्रति टन दे रहे हैं. यह मजदूरों की कमाई पर डाका है. मजदूरों को उनका हक मिले, यही हमारा प्रयास है. गरीब का बेटा हूं, गरीब के लिए लोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई लड़ते रहेंगे.

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