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झारखंड बजट : किसानों से किये वादों को पूरा करने पर जोर

Updated at : 04 Mar 2020 7:03 AM (IST)
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झारखंड बजट : किसानों से किये वादों को पूरा करने पर जोर

हेमंत सोरेन की सरकार ने बजट में कृषि एवं उससे जुड़े सेक्टर में कई व्यापक बदलाव किये हैं. पूर्व सरकार के अंतिम वित्तीय वर्ष में शुरू की गयी मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना को बंद कर दिया है.

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हेमंत सोरेन की सरकार ने बजट में कृषि एवं उससे जुड़े सेक्टर में कई व्यापक बदलाव किये हैं. पूर्व सरकार के अंतिम वित्तीय वर्ष में शुरू की गयी मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना को बंद कर दिया है. कृषि विभाग द्वारा करायी जा रही तालाब जीर्णोद्धार स्कीम का संचालन अब केवल खानापूर्ति के नाम पर होगा. पिछली सरकार में आशीर्वाद योजना के लिए 2000 करोड़ तथा तालाब जीर्णोद्धार के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान था.

सरकार ने महिला स्वयं सहायता समूहों को दिये जाने वाले कृषि उपकरण बैंक में राशि की कटौती कर दी है. वैसे पिछले दो साल से इस योजना का लाभ महिलाओं के ग्रुप को नहीं मिल रहा है. हेमंत सोरेन की सरकार का जोर चुनाव के दौरान किसानों से किये गये वादों को पूरा करने में है. इस कारण हेमंत सोरेन ने क्रमवार किसानों का ऋण माफ करने के लिए स्कीम में बदल दिया है. जबकि पशुपालन विभाग में कोई विशेष बदलाव नहीं किया है. पशुपालन को मजबूत करने के लिए कोई विशेष योजना भी नहीं दी है.

वहीं, कृषि और पशु चिकित्सा को मजबूत करने के लिए संचालित संस्थाओं के संचालन पर कोई ठोस घोषणा नहीं की गयी है. पिछली सरकार ने कई तकनीकी महाविद्यालय तो खोल दिये थे, लेकिन इसका संचालन अब तक नहीं हो रहा है. जल संसाधन विभाग में सरकार ने कई नयी जलाशय योजना प्रस्तावित नहीं की है. पुरानी जलाशय योजनाओं को ही पूरा करने पर सरकार का जोर है.

राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार से संबंधित कई काम तो हुए, लेकिन कई काम अधूरे रह गये. पिछले वर्ष में कुल 129 करोड़ रुपये का बजट था. इस राशि से सारे अंचलों के भू अभिलेखों का डिजिटलाइजेशन करना था. वहीं, ऑनलाइन लगान भुगतान की सुविधा देनी थी. इन कार्यों में काफी हद तक सफलता मिली है. मॉडर्न रिकॉर्ड रूम का काम अधूरा रह गया है. नक्शों के डिजिटलाइजेशन का कार्य पूर्ण कर लेने का दावा किया गया है. राजस्व कचहरी सह हल्का कर्मचारी आवास का काम हुआ है, लेकिन वह पूर्ण नहीं हो पाया है. इसके लिए 50.45 करोड़ रुपये आवंटित किये गये थे.

सारे अंचल कार्यालयों के सुदृढ़ीकरण की दिशा में काम हुआ है, लेकिन अभी भी काम बाकी है. खाद्य आपूर्ति विभाग ने खाद्यान्न के परिवहन में उपयोग में लगे वाहनों में जीपीएस लगाने की घोषणा की थी. यह अब तक प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पायी. राज्य खाद्य निगम में मानव संसाधन की भारी कमी है. इसको दूर करने के लिए पिछली सरकार ने प्रयास किया. नियमावली बना ली गयी, लेकिन बहाली नहीं हो पायी.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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