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दिसंबर 2023 में कोलकाता को ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर की सौगात, पानी के नीचे बनी सुरंग से गुजरेगी ट्रेन

Updated at : 30 Dec 2022 1:30 PM (IST)
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दिसंबर 2023 में कोलकाता को ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर की सौगात, पानी के नीचे बनी सुरंग से गुजरेगी ट्रेन

East West Corridor|Kolkata Metro|पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और हावड़ा के बीच से गुजरने वाली हुगली नदी में पानी के भीतर बन रही भारत की पहली सुरंग यात्रियों के लिए एक अद्भुत अनुभव होगी, क्योंकि ट्रेनें इस सुरंग की 520 मीटर लंबी दूरी को 45 सेकेंड में पार कर लेंगी.

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East West Corridor|Kolkata Metro|पश्चिम बंगाल को पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन मिल चुकी है. एक साल बाद यानी दिसंबर 2023 में कोलकाता और हावड़ा के लोग गंगा नदी में बनी सुरंग में यात्रा कर सकेंगे. हावड़ा को कोलकाता से जोड़ने वाली यह सुरंग ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर का हिस्सा है. 120 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण कार्य चल रहा है.

लंदन-पेरिस कॉरिडोर का भारतीय संस्करण है ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और हावड़ा के बीच से गुजरने वाली हुगली नदी में पानी के भीतर बन रही भारत की पहली सुरंग यात्रियों के लिए एक अद्भुत अनुभव होगी, क्योंकि ट्रेनें इस सुरंग की 520 मीटर लंबी दूरी को 45 सेकेंड में पार कर लेंगी. ‘यूरोस्टार’ के लंदन-पेरिस कॉरिडोर का यह भारतीय संस्करण है. यह सुरंग गंगा नदी की तलहटी से 13 मीटर और जमीन से 33 मीटर नीचे है.

ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर का हिस्सा है 520 मीटर लंबी सुरंग

बता दें कि 520 मीटर लंबी यह सुरंग कोलकाता के ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर का हिस्सा है, जो आईटी केंद्र सॉल्ट लेक सेक्टर 5 से नदी के पार पश्चिम में पूर्वी हावड़ा मैदान को जोड़ती है. सुरंग का निर्माण पूरा हो गया है और एस्प्लेनेड तथा सियालदह के बीच 2.5 किलोमीटर के हिस्से के पूरा होने के बाद दिसंबर 2023 में इस कॉरिडोर के चालू होने की संभावना है.

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सियालदह-हावड़ा की यात्रा मात्र 40 मिनट में

कोलकाता मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के महाप्रबंधक (सिविल) शैलेश कुमार ने कहा, ‘पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर के लिए सुरंग आवश्यक और महत्वपूर्ण थी. आवासीय क्षेत्रों और अन्य तकनीकी मुद्दों के कारण नदी से मार्ग निकालना ही एकमात्र संभव तरीका था.’ उन्होंने कहा, ‘हावड़ा और सियालदह के बीच यह मेट्रो मार्ग सड़क मार्ग से 1.5 घंटे के मुकाबले 40 मिनट रह जाता है. यह दोनों सिरों पर भीड़ को भी कम करेगा.’

सुरंग में पानी का प्रवाह व रिसाव रोकने के उपाय

उन्होंने कहा कि सुरंग को पार करने में 45 सेकेंड का समय लगेगा. सुरंग में पानी के प्रवाह और रिसाव को रोकने के लिए कई सुरक्षात्मक उपाय किये गये हैं. जल को प्रवेश करने से रोकने के वास्ते इन खंडों में फ्लाई ऐश और माइक्रो सिलिका से बने कंक्रीट मिश्रण का उपयोग किया गया है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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