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Dussehra 2022: दशहरे के दिन इस पक्षी के दर्शन से पूरी होती है हर इच्छा, ये है पौराणिक मान्यता

Updated at : 05 Oct 2022 8:31 AM (IST)
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Dussehra 2022: दशहरे के दिन इस पक्षी के दर्शन से पूरी होती है हर इच्छा, ये है पौराणिक मान्यता

Dussehra 2022: हर वर्ष अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयदशमी पर्व मनाया जाता है. इस साल दशहरा या विजयादशमी का पर्व आज 5 अक्‍टूबर, बुधवार को मनाया जाएगा.शास्त्रों में दशहरा के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन करना बहुत शुभ माना गया है.

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Dussehra 2022: दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन होने से पैसों और संपत्ति में बढ़ोतरी होती है. मान्यता है कि यदि दशहरे के दिन किसी भी समय नीलकंठ दिख जाए तो इससे घर में खुशहाली आती है और वहीं, जो काम करने जा रहे हैं, उसमें सफलता मिलती है. दशहरे का त्योहार आज 5 अक्टूबर को मनाया जा रहा है. इस दिन भगवान राम ने दस सिर वाले रावण का वध किया था.

नीलकंठ का दिखना क्यों शुभ है?

जब श्रीराम रावण का वध करने जा रहे थे. उसी दौरान उन्हें नीलकंठ के दर्शन हुए थे. इसके बाद श्रीराम को रावण पर विजय मिली थी. यही वजह है कि नीलकंठ का दिखना शुभ माना गया है.

इस दिन सभी अपने शस्त्रों का पूजन करते है. सबसे पहले शस्त्रों के ऊपर जल छिड़क कर पवित्र किया जाता है फिर महाकाली स्तोत्र का पाठ कर शस्त्रों पर कुंकुम, हल्दी का तिलक लगाकर हार पुष्पों से श्रृंगार कर धूप-दीप कर मीठा भोग लगाया जाता है। शाम को रावण के पुतले का दहन कर विजया दशमी का पर्व मनाया जाता है.

नीलकंठ पक्षी दिखने पर करें इस मंत्र का उच्चारण

अगर दशहरा के दिन नीलकंठ पक्षी दिख जाएं तो मंत्र

कृत्वा नीराजनं राजा बालवृद्धयं यता बलम्।

शोभनम खंजनं पश्येज्जलगोगोष्ठसंनिघौ।।

नीलग्रीव शुभग्रीव सर्वकामफलप्रद।

पृथ्वियामवतीर्णोसि खच्चरीट नमोस्तुते।।

का जाप करें.

धरती पर भगवान शिव का प्रतिनिधि है नीलकंठ पक्षी

जनश्रुति और धर्मशास्त्रों के मुताबिक भगवान शंकर ही नीलकण्ठ है. इस पक्षी को पृथ्वी पर भगवान शिव का प्रतिनिधि और स्वरूप दोनों माना गया है. नीलकंठ पक्षी भगवान शिव का ही रुप है. भगवान शिव नीलकंठ पक्षी का रूप धारण कर धरती पर विचरण करते हैं.

पेड़ों या तारों पर दिख जाता है नीलकंठ पक्षी

नीलकंठ को अक्सर प्रमुख पेड़ों या तारों पर देखा जाता है. यह पक्षी मुख्य रूप से प्रजनन के मौसम में नर की हवाई कलाबाजी के लिए जाना जाता है. यह अक्सर सड़क के किनारे पेड़ों और तारों में बैठे हुए देखे जाते है और आमतौर पर खुले घास के मैदान और झाड़ियों के जंगलों में देखे जाते है. इन पक्षियों की सबसे बड़ी आबादी भारत में पाई जाती है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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