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संन्यास के फैसले से स्तब्ध कर दिया धाैनी ने

Updated at : 16 Aug 2020 6:31 AM (IST)
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संन्यास के फैसले से स्तब्ध कर दिया धाैनी ने

dhoni retirement news : 15 अगस्त की रात्रि. सारा देश आजादी की खुशी में मग्न. तभी एक खबर आती है-धाैनी ने संन्यास ले लिया. सहसा भराेसा नहीं हुआ, क्याेंकि एक दिन पहले ही रांची से वे चेन्नई पहुंचे थे. सभी काे उम्मीद थी कि आइपीएल में धाैनी अपना जलवा दिखायेंगे. फिर आगे वर्ल्ड कप की तैयारी. धाैनी काे समझना किसी के लिए असंभव है. कब क्या निर्णय ले लें. इस फैसले से सभी चाैंक गये, स्तब्ध रह गये. ऐसे ताे पूरे देश में धाैनी के फैंस उदास हाे गये हाेंगे लेकिन झारखंड में यह उदासी कुछ ज्यादा ही है.

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15 अगस्त की रात्रि. सारा देश आजादी की खुशी में मग्न. तभी एक खबर आती है-धाैनी ने संन्यास ले लिया. सहसा भराेसा नहीं हुआ, क्याेंकि एक दिन पहले ही रांची से वे चेन्नई पहुंचे थे. सभी काे उम्मीद थी कि आइपीएल में धाैनी अपना जलवा दिखायेंगे. फिर आगे वर्ल्ड कप की तैयारी. धाैनी काे समझना किसी के लिए असंभव है. कब क्या निर्णय ले लें. इस फैसले से सभी चाैंक गये, स्तब्ध रह गये. ऐसे ताे पूरे देश में धाैनी के फैंस उदास हाे गये हाेंगे लेकिन झारखंड में यह उदासी कुछ ज्यादा ही है. रांची, झारखंड का बेटा धाैनी अगर देश के लिए नहीं खेलेगा, ताे मैच में आधी रुचि कम हाे जायेगी. एक महान खिलाड़ी. छाेटे राज्य झारखंड से निकल कर पूरी दुनिया का सबसे प्रसिद्ध खिलाड़ी बन जाना मामूली बात नहीं है. कमी ताे खलेगी आैर ऐसी खलेगी जिसकी भरपाई झारखंड में ताे नहीं ही हाेगी. स्टेडियम में जब धाैनी उतरते थे, रन बनाये या नहीं, पूरा स्टेडियम धाैनी-धाैनी की आवाज से गूंजता था. यह सही है कि धाैनी काे एक न एक दिन संन्यास लेना ही था. हर खिलाड़ी काे लेना पड़ता है लेकिन अभी ले लेंगे, किसी काे पच नहीं रह रहा है.

मुझे याद है कि जब धाैनी का टीम इंडिया में चयन नहीं हुआ था. जब भी काेई चयनकर्ता रांची या जमशेदपुर में आता, एक ही सवाल पूछा जाता-धाैनी काे टीम इंडिया में कब लेंगे. यह लाेगाें की भावना थी.

जब टीम इंडिया में धाैनी आ गये आैर 23 दिसंबर, 2004 काे बांग्लादेश के खिलाफ अपना पहला मैच खेला ताे एक गेंद का सामना कर रन आउट हाे गये. यानी पहली ही पारी में रन आउट. संयाेग देखिए. धाैनी ने जब अपना अंतिम वन डे न्यूजीलैंड के खिलाफ वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में खेला, ताे उसमें भी रन आउट हाे गये. धाैनी की खासियत रही है जब तक विकेट पर हैं, भारत जीत की उम्मीद कर सकता है. सेफा में भी अगर धाैनी रन आउट नहीं हाेते ताे मैच भारत जीतता ही.

निराशा ताे धाैनी में थी ही नहीं. जिस तरीके से आरंभ के मैचाें में धाैनी असफल रहे, काेई और खिलाड़ी हाेता ताे टूट जाता. पहले चार मैचाें में 0, 12, 7 और तीन यानी कुल 22 रन. लेकिन अगली पारी पाकिस्तान के खिलाफ खेली. क्या पारी थी? अपनी पांचवीं ही पारी में 148 रन बना कर पाकिस्तान काे पस्त कर दिया. उसी दिन यह मालूम हाे गया था कि यह सितारा चमत्कारिक है. दाे-दाे बार भारत काे वर्ल्ड चैंपियन बनाना मामूली बात नहीं है. एक लीडर यानी कप्तान के ताे उनमें अदभुत गुण हैं. कब किस खिलाड़ी काे कहां इस्तेमाल करना है, वखूबी जानते हैं. तब ताे टी-20 वर्ल्ड कप में लगभग हारे हुए मैच में अंतिम ओवर जाेगिंदर सिंह से फेंकवाया और भारत की वर्ल्ड चैंपियन बनाया. संकट आया, टीम परेशानी में है, ताे धाैनी खुद आगे आकर माेरचा संभालने में विश्वास करते हैं. श्रीलंका के खिलाफ वर्ल्ड कप के फाइनल में (2011) में जब सेहवाग, सचिन और काेहली जल्दी आउट हाे गये, टीम संकट में आ गयी ताे युवराज सिंह काे भेजने की जगह खुद मैदान में माेरचा संभाला और गेंदबाजाें की पिटाई की. 91 रन की अविजित पारी. वह छक्का, जिसे लगाते ही भारत वर्ल्ड चैंपियन बन गया, काेई क्या भूल सकता है?

सिर्फ वन डे ही नहीं, टेस्ट और टी-20 के भी बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं. दुनिया के बेस्ट फिनशर कहा जाता है. ऐसे ही नहीं. मन में सारे गुना-भाग करते रहते हैं और अंतिम दाे-तीन आेवराें में सारा हिसाब-किताब बराबर कर देते हैं. अपने साथियाें का मनाेबल बढ़ाने में आगे रहे हैं. नये-नये खिलाड़ियाें पर विश्वास करना, उन्हें माैका देना धाैनी का खासियत रही है. नये खिलाड़ियाें काे सिखाने में पीछे नहीं रहते. आज धाैनी के संन्यास से लाेग दुखित इसलिए हैं क्याेंकि अभी भी धाैनी में क्रिकेट बाकी है. चीता सी फूर्ति अभी भी है. विकेट के पीछे से गेंदबाजाें काे बताते रहना उनका खास गुण है. डीआरएस लेना है कि नहीं, यह कप्तान नहीं, धाैनी तय करते रहे हैं, क्याेंकि 99 फीसदी वे सही हाेते हैं. इसलिए रन बनाये या नहीं, वे टीम के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं. आइपीएल में उनका जलवा अलग दिखता है. खेल के मैदान के अलावा धाैनी बाहर भी चर्चित रहते हैं. जब सारा देश आंकलन कर रहा था कि वर्ल्ड कप में हार के बाद धाैनी क्या करेंगे, धाैनी भारतीय सेना की सेवा में चले गये आैर वहां भी पूरी ईमानदारी से अपना दायित्व निभाया. इन्हीं अदभुत गुणाें के कारण धाैनी काे दुनिया के अन्य खिलाड़ी भी पसंद करते हैं, करते रहेंगे. सच है-धाैनी की कमी खलेगी, बहुत खलेगी.

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अनुज कुमार

लेखक के बारे में

By अनुज कुमार

अनुज कुमार is a contributor at Prabhat Khabar.

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