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Dev Uthani Ekadashi 2022 LIVE: देवउठनी एकादशी आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व

Updated at : 04 Nov 2022 2:57 PM (IST)
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Dev Uthani Ekadashi 2022 LIVE: देवउठनी एकादशी आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व

Dev Uthani Ekadashi 2022 LIVE Updates: आज यानी 4 नवंबर 2022 को देवउठनी एकादशी का व्रत है. ऐसी मान्यता है कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को चार माह की चिर निद्रा के बाद भगवान विष्णु जागते हैं और सृष्टि का संचालन करते हैं. इस दिन से ही सभी तरह के मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है. एकादशी व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. जानें देवउठनी एकादशी 2022 कब है? पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पारण का समय और इस दिन का महत्व जानें.

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1:44 PM. 4 Nov 221:44 PM. 4 Nov

देवउठनी एकादशी शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 03, 2022 को शाम  07 बजकर 30 मिनट से शुरू
एकादशी तिथि समाप्त – नवम्बर 04, 2022 को शाम 06 बजकर 08 मिनट पर खत्म
पारण (व्रत तोड़ने का) समय – नवम्बर 05, 2022 को सुबह 06 बजकर 36 मिनट से 08 बजकर 47 मिनट तक
पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय – 05:06 शाम तक है.

12:13 PM. 4 Nov 2212:13 PM. 4 Nov

भगवान को जगाते समय करें इन मंत्रों का जाप

उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविंद त्यज निद्रां जगत्पते।त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्।।
उत्तिष्ठोत्तिष्ठ वाराह दंष्ट्रोद्धृतवसुंधरे।
हिरण्याक्षप्राणघातिन् त्रैलोक्ये मंगलं कुरु।।

12:13 PM. 4 Nov 2212:13 PM. 4 Nov

देवउठनी एकादशी पूजा विधि

  • व्रती सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत हो जाए.

  • घर के मंदिर में दीप जलाएं और भगवान विष्णु का गंगाजल से अभिषेक करें.

  • भगवान विष्णु को फुल और तुलसी दल अर्पित करें.

  • भगवान की आरती करें, और भोग लगाएं.

  • भोग केवल सात्विक चीजों का ही लगाएं.

  • इस दिन भगवान विष्णु के साथ साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए.

  • इस दिन भगवान विष्णु का ज्यादा से ज्यादा ध्यान करें.

12:13 PM. 4 Nov 2212:13 PM. 4 Nov

देवउठनी एकादशी शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारंभ- शाम 7 बजकर 30 मिनट से (3 नवंबर, 2022)

एकादशी तिथि समाप्त- शाम 6 बजकर 8 मिनट तक ( 4 नवंबर, 2022)

देवउठनी एकादशी की तारीख- 5 नवंबर, 2022

12:13 PM. 4 Nov 2212:13 PM. 4 Nov

आज से शुरू हो जायेंगे सारे शुभ काम

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी या हरिशयनी एकादशी कहा जाता है. माना जाता है इस दिन से भगवान विष्णु चार मास के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं, उनके शयन करने के कारण ही इन चार महीनों में मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं, किंतु देवोत्थान एकादशी के दिन श्री विष्णु हरि के जागने के बाद से बैंड-बाजे बजने लगते हैं, विवाह आदि कर्म होने लगते हैं.

7:43 AM. 4 Nov 227:43 AM. 4 Nov

तुलसी- सालिग्राम विवाह का महत्व

देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राजसूय यज्ञ करने से भक्तों को जिस पुण्य की प्राप्ति होती है, उससे भी अधिक फल इस दिन व्रत करने पर मिलता है. ज्योतिषाचार्य डा. शोनू मेहरोत्रा ने बताया कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा- आराधना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. विगत 10 जुलाई को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का आरंभ हुआ था.

7:43 AM. 4 Nov 227:43 AM. 4 Nov

देवउठनी एकादशी कथा

पौराणिक कथा (mythology) के अनुसार एक राज्य में एकादशी के दिन प्रजा से लेकर पशु तक अन्न ग्रहण नहीं करते थे. न ही कोई अन्न बेचता था. एक बार की बात है भगवान विष्णु (Lord Vishnu) ने राजा की परीक्षा लेने के लिए सुंदरी का धर लिया और सड़क किनारे बैठ गए. राजा वहां से गुजरे तो सुंदरी से उसके यहां बैठने का कारण पूछा. स्त्री ने बताया कि उसका इस दुनिया में कोई नहीं वह बेसहारा है. राजा उसके रूप पर मोहित हो गए और बोले कि तुम मेरी रानी बनकर महल चलो.

7:17 AM. 4 Nov 227:17 AM. 4 Nov

देवउठनी एकादशी शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारंभ- शाम 7 बजकर 30 मिनट से (3 नवंबर, 2022)

एकादशी तिथि समाप्त- शाम 6 बजकर 8 मिनट तक ( 4 नवंबर, 2022)

देवउठनी एकादशी की तारीख- 5 नवंबर, 2022

7:17 AM. 4 Nov 227:17 AM. 4 Nov

देवउठनी एकादशी पारण समय

देवउठनी एकादशी व्रत का पारण तिथि : 05 नवंबर, शनिवार

पारण समय: प्रातः 06:36 मिनट से प्रातः 08:47 मिनट के मध्य

द्वादशी तिथि समाप्त: सायं 05:06 मिनट पर

7:17 AM. 4 Nov 227:17 AM. 4 Nov

शुरू हो जाएंगे शुभ कार्य

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी या हरिशयनी एकादशी कहा जाता है. माना जाता है इस दिन से भगवान विष्णु चार मास के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं, उनके शयन करने के कारण ही इन चार महीनों में मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं, किंतु देवोत्थान एकादशी के दिन श्री विष्णु हरि के जागने के बाद से बैंड-बाजे बजने लगते हैं, विवाह आदि कर्म होने लगते हैं.

5:37 AM. 4 Nov 225:37 AM. 4 Nov

देवउठनी एकादशी पारण समय

देवउठनी एकादशी व्रत का पारण तिथि : 05 नवंबर, शनिवार

6:09 PM. 3 Nov 226:09 PM. 3 Nov

4 महीने की निद्रा के बाद जगते हैं भगवान विष्णु

मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान जगत के पालनहार भगवान विष्णु आराम करते हैं. देवशयनी एकादशी से भगवान शयन पर चले जाते हैं.

4:10 PM. 3 Nov 224:10 PM. 3 Nov

भगवान की पूजा करके घंटा, शंख, मृदंग आदि वाद्य यंत्रों के साथ निम्न मंत्रों का जाप करें-

उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविंद त्यज निद्रां जगत्पते।त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्।।
उत्तिष्ठोत्तिष्ठ वाराह दंष्ट्रोद्धृतवसुंधरे।
हिरण्याक्षप्राणघातिन् त्रैलोक्ये मंगलं कुरु।।

3:11 PM. 3 Nov 223:11 PM. 3 Nov

देवउठनी एकादशी तिथि, मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 03, 2022 को शाम  07 बजकर 30 मिनट से शुरू
एकादशी तिथि समाप्त – नवम्बर 04, 2022 को शाम 06 बजकर 08 मिनट पर खत्म
पारण (व्रत तोड़ने का) समय – नवम्बर 05, 2022 को सुबह 06 बजकर 36 मिनट से 08 बजकर 47 मिनट तक
पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय – 05:06 शाम तक है.

3:11 PM. 3 Nov 223:11 PM. 3 Nov

देवउठनी एकादशी का महत्व

मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने वालों के पितृ मोक्ष को प्राप्त कर स्वर्ग में चले जाते हैं. एकादशी का व्रत करने वालों के पितृपक्ष के दस पुरुष, मातृपक्ष के दस पुरुष और दूसरे पितृजन बैकुण्ठवासी होते हैं. एकादशी का व्रत यश, कीर्ति , वैभव, धन, संपत्ति और संतान को उन्नति देने वाला है.

1:31 PM. 3 Nov 221:31 PM. 3 Nov

देवउठनी एकादशी पारण का समय

देवउठनी एकादशी व्रत तोड़ने का शुभ समय 05 नवंबर को सुबह 06 बजकर 36 मिनट से सुबह 08 बजकर 47 मिनट तक है. पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय – 05:06 बजे शाम तक है.

12:33 PM. 3 Nov 2212:33 PM. 3 Nov

देवउठनी एकादशी पूजा विधि

  • व्रती सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत हो जाए.

  • घर के मंदिर में दीप जलाएं और भगवान विष्णु का गंगाजल से अभिषेक करें.

  • भगवान विष्णु को फुल और तुलसी दल अर्पित करें.

  • भगवान की आरती करें, और भोग लगाएं.

  • भोग केवल सात्विक चीजों का ही लगाएं.

  • इस दिन भगवान विष्णु के साथ साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए.

  • इस दिन भगवान विष्णु का ज्यादा से ज्यादा ध्यान करें.

12:33 PM. 3 Nov 2212:33 PM. 3 Nov

इस दिन है देवउठनी एकादशी

देवउठनी एकादशी इस साल 4 नवंबर 2022 को है.

12:33 PM. 3 Nov 2212:33 PM. 3 Nov

देवउठनी एकादशी शुभ मुहूर्त

कार्तिक शुक्ल देवउठनी एकादशी तिथि शुरू – 3 नवंबर 2022, शाम 7.30 कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि समाप्त – 4 नवंबर 2022, शाम 06.08 देवउठनी एकादशी व्रत पारण समय – सुबह 06.39 – सुबह 08.52 (5 नवंबर 2022)

9:16 AM. 3 Nov 229:16 AM. 3 Nov

शुभ या मांगलिक कार्य की होगी शुरूआत

चातुर्मास में किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की मनाहि होती है वहीं, देवउठनी एकादशी के दिन चातुर्मास की समाप्ति होती है, जिसके बाद से सभी मांगलिक कार्य शुरु हो जाते हैं. वहीं, इस दिन तुलसी विवाह का भी आयोजन होता है. शालिग्राम भगवान से तुलसी की शादी की जाती है.

9:16 AM. 3 Nov 229:16 AM. 3 Nov

देवउठनी एकादशी व्रत पूजन विधि

  • व्रती सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत हो जाए.

  • घर के मंदिर में दीप जलाएं और भगवान विष्णु का गंगाजल से अभिषेक करें.

  • भगवान विष्णु को फुल और तुलसी दल अर्पित करें.

  • भगवान की आरती करें, और भोग लगाएं.

  • भोग केवल सात्विक चीजों का ही लगाएं.

  • इस दिन भगवान विष्णु के साथ साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए.

  • इस दिन भगवान विष्णु का ज्यादा से ज्यादा ध्यान करें.

9:16 AM. 3 Nov 229:16 AM. 3 Nov

क्या हैं मान्यताएं

मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान जगत के पालनहार भगवान विष्णु आराम करते हैं. देवशयनी एकादशी से भगवान शयन पर चले जाते हैं.

9:16 AM. 3 Nov 229:16 AM. 3 Nov

देवउठनी एकादशी 2022 कब है?

देवउठनी एकादशी इस साल 4 नवंबर 2022 को है.

1:31 PM. 3 Nov 221:31 PM. 3 Nov

देवउठनी एकादशी 2022 शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि 03 नवंबर को शाम 07 बजकर 30 मिनट से शुरू होगी, जो कि 04 नवंबर को शाम 06 बजकर 08 मिनट पर समाप्त होगी.

1:31 PM. 3 Nov 221:31 PM. 3 Nov

देवउठनी एकादशी व्रत पारण का समय

देवउठनी एकादशी व्रत तोड़ने का शुभ समय 05 नवंबर को सुबह 06 बजकर 36 मिनट से सुबह 08 बजकर 47 मिनट तक है. पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय – 05:06 pm तक है.

8:00 AM. 3 Nov 228:00 AM. 3 Nov

देवउठनी एकादशी तारीख, शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 03, 2022 को शाम  07 बजकर 30 मिनट से शुरू
एकादशी तिथि समाप्त – नवम्बर 04, 2022 को शाम 06 बजकर 08 मिनट पर खत्म
पारण (व्रत तोड़ने का) समय – नवम्बर 05, 2022 को सुबह 06 बजकर 36 मिनट से 08 बजकर 47 मिनट तक
पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय – 05:06 शाम तक है.

8:00 AM. 3 Nov 228:00 AM. 3 Nov

देवउठनी एकादशी का महत्व

मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने वालों के पितृ मोक्ष को प्राप्त कर स्वर्ग में चले जाते हैं. एकादशी का व्रत करने वालों के पितृपक्ष के दस पुरुष, मातृपक्ष के दस पुरुष और दूसरे पितृजन बैकुण्ठवासी होते हैं. एकादशी का व्रत यश, कीर्ति , वैभव, धन, संपत्ति और संतान को उन्नति देने वाला है.

8:00 AM. 3 Nov 228:00 AM. 3 Nov

भगवान की पूजा करके घंटा, शंख, मृदंग आदि वाद्य यंत्रों के साथ निम्न मंत्रों का जाप करें-

उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविंद त्यज निद्रां जगत्पते।त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्।।
उत्तिष्ठोत्तिष्ठ वाराह दंष्ट्रोद्धृतवसुंधरे।
हिरण्याक्षप्राणघातिन् त्रैलोक्ये मंगलं कुरु।।

8:00 AM. 3 Nov 228:00 AM. 3 Nov

भगवान की आरती करें और फूल अर्पण करके निम्न मंत्रों से प्रार्थना करें-

इयं तु द्वादशी देव प्रबोधाय विनिर्मिता।
त्वयैव सर्वलोकानां हितार्थं शेषशायिना।।
इदं व्रतं मया देव कृतं प्रीत्यै तव प्रभो।
न्यूनं संपूर्णतां यातु त्वत्वप्रसादाज्जनार्दन।।

8:00 AM. 3 Nov 228:00 AM. 3 Nov

तुलसी पूजा

सबसे अहम बात है कि इसी दिन भगवान शालीग्राम के साथ तुलसी मां का आध्यात्मिक विवाह भी होता है. लोग घरों में और मंदिरों में ये विवाह करते हैं.इस दिन तुलसी की पूजा का महत्व है. शालीग्राम और तुलसी की पूजा से पितृदोष का शमन होता है.

8:00 AM. 3 Nov 228:00 AM. 3 Nov

देवउठानी एकादशी व्रत के लाभ (Devuthani Ekadashi Vrat Benefits)

कहते हैं कि जो व्यक्ति देवउठानी एकादशी का व्रत सच्चे दिल और श्रद्धापूर्वक रखता है उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होती हैं. इस दिन सिर्फ निर्जन या केवल जलीय पदार्थों पर ही उपवास रखा जाता है. अगर आप इस दिन निर्जल व्रत नहीं रखते, तो इस दिन चावल, प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा, बासी भोजन आदि का सेवन भूलकर भी न करें.

8:00 AM. 3 Nov 228:00 AM. 3 Nov

Tulsi-Shaligram Vivaah 2021: तुलसी जी का भगवान शालिग्राम के साथ विवाह

इसी दिन तुलसी जी का भगवान शालिग्राम के साथ विवाह (Tulsi-Shaligram Vivaah) हुआ था. कहते हैं कि भगवान विष्णु को तुलसी बेहद प्रिय हैं और वो मां लक्ष्मी का ही रूप है.

8:00 AM. 3 Nov 228:00 AM. 3 Nov

शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य होंगे शुरू

देवउठनी से भगवान विष्णु पूरी सृष्टि का कार्यभार संभालेंगे और इसी दिन से शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाएंगे, जिस दिन भगवान विष्‍णु जागते हैं उस दिन सभी भक्त उनकी पूजा अर्चना करते हैं.

8:00 AM. 3 Nov 228:00 AM. 3 Nov

देवउठनी एकादशी 2022 मुहूर्त (Dev uthani ekadashi 2022 Muhurat)

कार्तिक शुक्ल देवउठनी एकादशी तिथि शुरू – 3 नवंबर 2022, शाम 7.30 कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि समाप्त – 4 नवंबर 2022, शाम 06.08 देवउठनी एकादशी व्रत पारण समय – सुबह 06.39 – सुबह 08.52 (5 नवंबर 2022)

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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