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Jharkhand : बारिश से कोयला उत्पादन ठप, जमीन धंसी, निकलने लगा धुआं, पिपरवार में दामोदर का डायवर्सन बहा

Updated at : 15 Mar 2020 3:14 PM (IST)
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Jharkhand : बारिश से कोयला उत्पादन ठप, जमीन धंसी, निकलने लगा धुआं, पिपरवार में दामोदर का डायवर्सन बहा

coal production disrupted due to heavy rain in jharkhand. झारखंड (Jharkhand) में शुक्रवार (13 मार्च, 2020) से शुरू हुआ आंधी-बारिश का दौर शनिवार और रविवार (15 मार्च, 2020) को भी जारी रहा. भारी बारिश (Heavy Rain) और ओले (Hail Storm) गिरने की वजह से खलारी (Khalari) और चतरा (Chatra) से सटे कोयला खदानों (Coal Mines) में उत्पादन (Production) ठप हो गया. कोयले की ढुलाई (Coal Transportation) भी बंद रही. इस दौरान खलारी (Khalari) के डकरा (Dakra) स्थित मानकी (Manaki) में कई जगहों पर धू-धंसान की घटनाएं सामने आयीं. भू-धंसान की वजह से जमीन से धुआं निकलने लगा और लोग सहम गये. वहीं, दामोदर नदी (Damodar River) का डायवर्सन (Diversion) भी बह गया है, जिससे कोयले की ढुलाई प्रभावित हुई है.

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डकरा/पिपरवार : झारखंड में शुक्रवार (13 मार्च, 2020) से शुरू हुआ आंधी-बारिश का दौर शनिवार और रविवार को भी जारी रहा. भारी बारिश और ओले गिरने की वजह से खलारी और चतरा से सटे कोयला खदानों में उत्पादन ठप हो गया. कोयले की ढुलाई भी बंद रही.

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इस दौरान खलारी के डकरा स्थित मानकी में कई जगहों पर धू-धंसान की घटनाएं सामने आयीं. भू-धंसान की वजह से जमीन से धुआं निकलने लगा और लोग सहम गये. वहीं, दामोदर नदी का डायवर्सन भी बह गया है, जिससे कोयले की ढुलाई प्रभावित हुई है.

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मार्च के महीने में जरूरत से ज्यादा बारिश की वजह से डकरा के एनके एरिया के सभी कोयला खदानों में उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया. शनिवार को 12 से 15 एमएम तक बारिश हुई. अमूमन अगस्त के महीने में इस इलाके में इतनी बारिश होती है. इसलिए स्थिति से निबटने की तैयारी खदानकर्मी दो महीने पहले से कर लेते हैं.

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मार्च में इतनी बारिश होगी, इसका कोई अनुमान नहीं था. इसलिए उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया. केडीएच खदान में काम तो चल रहा है, लेकिन कार्यस्थल पर पानी जमा है और मोटर फिलहाल खतरे से बाहर हैं. डकरा खदान से मशीनों को हटा लिया गया. पुरनाडीह और रोहिणी में किसी तरह जरूरी काम हो रहे हैं, लेकिन उत्पादन व ट्रांसपोर्टिंग पूरी तरह बंद है.

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होल रोड में फिसलन बढ़ जाने से सभी बड़ी मशीनों के मूवमेंट रोक दिये गये हैं. आम जनजीवन भी बारिश से प्रभावित हुआ. सड़कों पर जहां-तहां पानी जमा हो गया. सीसीएल के अधिकारियों ने करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान जताया है. कहा कि पानी रुक भी गया, तो सामान्य उत्पादन में कम से कम एक सप्ताह लग जायेंगे.

जमीन धंसने के बाद निकलने लगा गैस

बारिश होने से मानकी कॉलोनी और आसपास के क्षेत्र में भू-धंसान की घटनाएं बढ़ गयी हैं. शनिवार को कई जगहों पर जमीन धंसने की घटनाएं हुईं. जहां भी जमीन धंसी है, वहां से गैस निकल रहा है. आसपास के लोग भू-धंसान की घटना से डरे हुए हैं.

दामोदर नदी पर बना डायवर्सन बहा
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पिपरवार में भारी बारिश के कारण जलस्तर बढ़ने से अशोक परियोजना के निकट दामोदर नदी पर बना डायवर्सन बह गया. इससे अशोक-आरसीएम साइडिंग की कोयला ढुलाई ठप हो गयी. वहीं, क्षेत्र की अशोक व पिपरवार परियोजना खदानों में उत्पादन कार्य नहीं हो सका.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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