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Jharkhand News: कोल इंडिया 10 वर्ष में बंद कर देगी 150 खदानें? क्या वजह इसकी वजह, जानें डिटेल्स

Updated at : 22 Sep 2022 9:27 AM (IST)
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Jharkhand News: कोल इंडिया 10 वर्ष में बंद कर देगी 150 खदानें? क्या वजह इसकी वजह, जानें डिटेल्स

वर्ल्ड बैंक ने कोयला मंत्रालय के पास एक रिपोर्ट पेश की है. जिसमें उन्होंने झारखंड स्थित खदानों का विस्तार से ब्योरा दिया है. रिपोर्ट की मानें तो भूमिगत खदानों में मात्र दो ही लाभ पर चल रहे हैं. उन्होंने कई खदानों को बंद करने का सुझाव दिया है

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धनबाद: जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती से निबटने के लिए कार्बन उत्सर्जन को कमतर करने की कोशिश हो रही है. जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला आदि पर निर्भरता कम करने की कवायद इसमें शामिल है. जस्ट ट्रांजिशन के आलोक में उठाये जा रहे कदमों से कोल इंडिया का नक्शा अगले एक दशक में बदलनेवाला है. कंपनी की कई खदानें इतिहास के पन्नों में दर्ज नजर आयेंगी.

हालांकि कुल उत्पादन का तीन चौथाई कोयला देनेवाली 56 बड़ी खुली खदानों (ओपनकास्ट प्रोजेक्ट) से वर्ष 2025 तक प्रतिवर्ष एक बिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. वर्ल्ड बैंक ने बीते 12 अगस्त को एक रिपोर्ट कोयला मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत की. इसमें इन बातों का जिक्र है. रिपोर्ट में झारखंड के रामगढ़ एवं बोकारो जिला में अवस्थित सीसीएल की खदानों का ब्योरा विस्तार से दिया गया है. अगर रिपोर्ट में की गयी अनुशंसा लागू की गयी, तो कोल सेक्टर के क्षेत्र में दोनों जिलों का नक्शा बदल जायेगा.

भूमिगत खदानों में मात्र दो ही लाभ में : 

वर्तमान में कोल इंडिया देश के आठ राज्यों के 58 जिलों में 141 भूमिगत, 158 ओसीपी, 19 मिक्स्ड खदानों से उत्पादन कर रही है. भूमिगत खदानों में से मात्र दो ही लाभ में हैं, जबकि कई छोटे-बड़े ओसीपी (ओपनकास्ट प्रोजेक्ट) घाटे में हैं. एक अप्रैल 2022 तक के आंकड़े बताते हैं कि कोल इंडिया का कुल मैनपावर 2,48,550 है, जिसका 41 प्रतिशत भूमिगत खदानों में कार्यरत हैं.

यह मैनपावर कुल उत्पादन का मात्र चार प्रतिशत ही उत्पादन करता है. वहीं 34 प्रतिशत मैनपावर ओसीपी में कार्यरत है, जो 96 फीसदी उत्पादन करता है. कुल उत्पादन का 75 प्रतिशत कोयला 56 बड़े ओसीपी से उत्पादित हुआ.

खदानें बंद करने की औसत दर सालाना 13 :

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में कई खदानों को बंद करने का सुझाव दिया गया है. इसके अनुसार, अगले एक दशक में लगभग 150 खदानें बंद करने की योजना है. इस पर 2009 से ही काम चल रहा है. 2021 में 13 एवं 2022 में 14 खदानें बंद की गयीं. वहीं 221 खदानें परित्यक्त हैं. कोयला खदानों को बंद करने की सालाना दर औसतन 13 माइंस है.

रामगढ़ जिला :

खदान बंदी योजना (एमसीपी) 2009 के तहत रामगढ़ जिले के कुजू, सेंट्रल सौंदा, सुरुबेरा, सिरका, पिंडारा, लईया खदान (सभी भूमिगत) बंद हो चुकी हैं, जबकि अगले 10 साल में करमा, डीपीआर इस्ट और तापीन ओसीपी को बंद करने की योजना है, जबकि रजरप्पा, इपीआर तोपा, भुरकुंडा (संगम), पुंडी, आरा-चैनपुर, सिरका, केदला सभी ओसीपी और भुरकुंडा भूमिगत खदान की लाइफ 10 साल से अधिक है.

बोकारो जिला :

खासमहल (ओसीपी), ढोरी खास एवं गोविंदपुर भूमिगत खदान एमसीपी 2009 के तहत बंद है, जबकि अगले 10 वर्ष में गोविंदपुर फेज टू, इपीआर कारो, न्यू सलेक्टेड ढोरी, इपीआर कोनार, तारमी, कथारा आरसीइ, बोकारो ओसी, एसडीओसीएम (सभी ओसीपी) एवं जारंगडीह भूमिगत खदान बंद की जायेंगी. वहीं जारंगडीह, अमलो एवं करगली ओसीपी की लाइफ 10 वर्ष से अधिक है.

रिपोर्ट- सत्येंद्र सिंह

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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