देश के सबसे पुराने मामले का हाइकोर्ट में हुआ निपटारा, चार बंगाल कोर्ट में अब भी लंबित

Updated at : 17 Jan 2023 9:59 AM (IST)
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देश के सबसे पुराने मामले का हाइकोर्ट में हुआ निपटारा, चार बंगाल कोर्ट में अब भी लंबित

अभी भी देश के पांच सबसे पुराने मामले में चार बंगाल कोर्ट में लंबित हैं. इनमें से दो कलकत्ता हाइकोर्ट के पास ही हैं. दोनों मामले हाइकोर्ट में 1952 में ही दायर किये गये थे.

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देश की सबसे पुराने हाइकोर्ट, कलकत्ता हाइकोर्ट में भारत के सबसे पुराने मामला का निपटारा कर दिया गया है. यह मामला पिछले 72 साल से लंबित था. यह मामला पूर्ववर्ती बरहमपुर बैंक की परिसमापन कार्यवाही से संबंधित है. हाइकोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव का जन्म 1951 में हुआ था और यह केस उनके जन्म के एक दशक पहले का है. इस मामले को निटपाने के बाद अभी भी हाइकोर्ट में दो और सबसे पुराने मामले हैं, अब उन पर कार्यवाही शुरू होगी.

अभी भी देश के पांच सबसे पुराने मामले में चार बंगाल कोर्ट में लंबित हैं. इनमें से दो कलकत्ता हाइकोर्ट के पास ही हैं. दोनों मामले हाइकोर्ट में 1952 में ही दायर किये गये थे. बाकी दो मामले बंगाल के मालदा की दीवानी अदालतों में चल रहे हैं. मालदा की अदालतों ने इन मुकदमों को निपटाने की कोशिश करने के लिए मार्च और नवंबर में सुनवाई की है.

क्या है मामला : बरहमपुर बैंक मामले का उल्लेख राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड में नौ जनवरी तक किसी भी भारतीय अदालत में सुना जाने वाला सबसे पुराना मामला है. न्यायमूर्ति रवि कृष्ण कपूर के पिछले साल 19 सितंबर के निपटारे के आदेश पर हस्ताक्षर किए, आदेश को सील किया गया और उसे टाइपोग्राफ़िकल सुधार के लिए भेजा गया. केस 19 नवंबर 1948 को कलकत्ता हाइकोर्ट दाखिल किया गया था. तब कलकत्ता हाइकोर्ट ने दिवालिया और मुकदमेबाजी से ग्रस्त बरहमपुर बैंक को बंद करने का आदेश था. परिसमापन की कार्यवाही को चुनौती देने वाली एक याचिका एक जनवरी, 1951 को दायर की गयी थी और उसी दिन मामला संख्या 71/1951 के रूप में दर्ज की गयी थी. बरहमपुर बैंक कर्जदारों से पैसा वसूल करने के लिए कई मुकदमों में उलझा हुआ था. इनमें से कई कर्जदारों ने बंगाल मनी लेंडर्स एक्ट, 1940 के तहत बैंक के दावों को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया. बैंक के परिसमापन को चुनौती देने वाली याचिका पिछले सितंबर में दो बार हाइकोर्ट में सुनवाई के लिए आई थी, लेकिन कोई स्पष्ट रूप से नहीं आया. इसके बाद न्यायाधीश आरके कपूर ने कोर्ट के लिक्विडेटर से रिपोर्ट मांगी. 19 सितंबर को, सहायक परिसमापक ने पीठ को बताया कि मामले का अगस्त 2006 में निपटारा कर दिया गया था. यह पता चला कि इसे रिकॉर्ड में अद्यतन नहीं किया गया था और मामला लंबित सूची में बना रहा.

हाइकोर्ट के दो सबसे पुराने मामले अब भी लंबित

दो दूसरे सबसे पुराने मामलों में से जो अभी भी हाइकोर्ट में लंबित हैं, न्यायमूर्ति आरके कपूर ने आखिरी बार 23 अगस्त, 2022 को सुनवाई की थी. उन्होंने एक अधिवक्ता और एक विशेष अधिकारी को निर्देश दिया कि वे सभी पक्षों से मिलें और लंबे समय से चले आ रहे मुकदमे को समाप्त करने के तौर-तरीके सुझाएं. अन्य 1952 के मामले पर बहुत कम डेटा उपलब्ध है. वादियों के नाम जुगल चंद्र घोष और दुर्गादास गांगुली हैं.

1951 से लंबित था भारत का सबसे पुराना मामला

  • कलकत्ता हाइकोर्ट ने केस निपटाकर किया खत्म

  • अभी भी देश के पांच सबसे पुराने केस अदालतों में हैं लंबित

  • दो मामले कलकत्ता हाइकोर्ट में तो एक बंगाल की दीवानी अदालत में

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