हजारीबाग के बड़कागांव में मांड़-भात खाकर गुजर कर रहे बिरहोर, परदेश न जाने की खायी कसम

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Jharkhand : हजारीबाग जिला के बड़कागांव प्रखंड के दो गांवों में बिरहोर जनजाति के लोग लॉकडाउन में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. ये लोग मांड़-भात खाकर जीवन बसर कर रहे हैं. कुछ लोगों ने तो कसम खा ली है कि अब कमाने के लिए परदेश नहीं जायेंगे. अपने गांव में रहेंगे और खेती-बाड़ी करके गुजारा करेंगे.

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बड़कागांव : हजारीबाग जिला के बड़कागांव प्रखंड के दो गांवों में बिरहोर जनजाति के लोग लॉकडाउन में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. ये लोग मांड़-भात खाकर जीवन बसर कर रहे हैं. कुछ लोगों ने तो कसम खा ली है कि अब कमाने के लिए परदेश नहीं जायेंगे. अपने गांव में रहेंगे और खेती-बाड़ी करके गुजारा करेंगे.

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प्रखंड के कांडतरी पंचायत स्थित सदा बहिया एवं चेपाकला पंचायत के तार टांड़ में बिरहोर जाति के लोगों के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. राशन दुकान से इन्हें जो चावल मिल रहा है, उसी से ये मांड़-भात खाकर अपना गुजारा कर रहे हैं. इस गांव के बिरहोर घूम-घूमकर अपने लिए भोजन-पानी जुटाते हैं. सदा बहिया में बिरहोरों के 45 घर हैं, जहां इनकी आबादी लगभग 290 है.

बिरहोर कौशल्या ने बताया कि बिरहोर टोला में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 30-35 है. स्कूल बंद है. उनके पास स्मार्ट फोन नहीं है. ऐसे में बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं. गांव में दो चापाकल हैं, जिसमें एक खराब है. दो कुआं है, लेकिन स्थिति जर्जर है. पानी पीने का एकमात्र साधन एक पानी टंकी है. इस टंकी में सौर ऊर्जा से संचालित मोटर लगे हैं. बैटरी खत्म होने पर पानी नहीं चढ़ता.

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कौशल्या बिरहोर ने बताया कि विधायक अंबा प्रसाद की ओर से एक माह पहले चावल, आलू, टमाटर एवं मास्क का वितरण किया गया. ब्लॉक के माध्यम से रोजगार सेवक शंभु रविदास ने एक-एक मास्क दिया. बिरहोरों ने बताया कि दो-तीन दिन पहले उन्हें मिर्जापुर के राशन डीलर शहबान अली की ओर से पांच-पांच किलो चावल दिया गया है.

अब नहीं जायेंगे परदेश

सदा बहिया निवासी चरका बिरहोर एवं रामजु बिरहोर ओड़िशा से चार दिन पहले घर लौटा है. उसे स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्वारेंटाइन सेंटर भेज दिया गया है. इन लोगों का कहना है कि वे लोग झारखंड से बाहर नहीं जाना चाहते. अब कभी कमाने के लिए परदेश नहीं जायेंगे. गांव में ही रह कर खेती-बारी करेंगे.

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