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Bastille Day 2023 Parade: आज मनाया जा रहा है  बैस्टिल डे, जानें भारत के लिए क्यों है इतना खास

Updated at : 14 Jul 2023 6:40 AM (IST)
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Bastille Day 2023 Parade: आज मनाया जा रहा है  बैस्टिल डे, जानें भारत के लिए क्यों है इतना खास

Bastille Day 2023, Bastille Day 2023 Parade:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फ्रांसीसी राष्ट्रीय दिवस या बैस्टिल दिवस पर सम्मानित अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है. दूसरी खास बात यह भी है कि 107 साल बाद पंजाब रेजीमेंट के 269 जवान भी इस परेड का हिस्सा बनेंगे.

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Bastille Day 2023, Bastille Day 2023 Parade: 14 जुलाई को वार्षिक रूप से मनाए जाने वाले फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस को आमतौर पर अंग्रेजी बोलने वाले देशों में बैस्टिल डे के रूप में जाना जाता है. फ्रांस का राष्ट्रीय दिवस, जिसे बैस्टिल डे के रूप में भी जाना जाता है.

फ्रांस का बैस्टिल दिवस 2023 चर्चा में क्यों है?

हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के बैस्टिल डे 2023 समारोह में गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में निमंत्रण के लिए फ्रांसीसी राष्ट्रपति को धन्यवाद दिया. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी आज 14 जुलाई को फ्रांस के बैस्टिल दिवस समारोह में सम्मानित अतिथि होंगे.

14 जुलाई को बैस्टिल किले पर हुआ था हमला

मध्य युग यानी 14 वी सदी से 18वीं सदी के मध्य में फ्रांस में बैस्टिल किले का निर्माण कराया गया था. इस किले के जरिए सामंतशाही फ्रांस में शासन कर रही थी. खास बात यह है कि इस किले के जरिए पेरिस की रखवाली भी की जाती थी. समय बीतने के साथ किले के कुछ हिस्से को जेल में बदला गया. 14 जुलाई 1789 को जब फ्रांस में क्रांति हुई तो क्रांतिकारियों मे बैस्टिल पर हमला किया और कुछ कैदियों को छुड़ा लिया. उस दिन से यह माना जाने लगा कि फ्रांस में अब राजशाही के खात्मे का आगाज हो चुका है. बैस्टिल पर हमले ने समाज के बड़े हिस्से को एकत्रित करने में मदद किया और एक तरह से लोग बैस्टिल को एकता का प्रतीक समझने लगे.

भारत के लिए इस साल खास है बैस्टिल दिवस  

दुनिया का सबसे खूबसूरत एवेन्यू कहा जाने वाला पेरिस का प्रसिद्ध चैंप्स-एलिसीस, फ्रांसीसी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करने के साथ-साथ एक विशेष अतिथि, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करने के लिए भी तैयार हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फ्रांसीसी राष्ट्रीय दिवस या बैस्टिल दिवस पर सम्मानित अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है.  दूसरी खास बात यह भी है कि 107 साल बाद पंजाब रेजीमेंट के 269 जवान भी इस परेड का हिस्सा बनेंगे. लेकिन यहां समझना जरूरी है कि बैस्टिल डे परेड फ्रांस के लिए क्यों अहम है.

बैस्टिल डे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • 14 जुलाई, 1789 को फ्रांसीसी इतिहास में एक महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है क्योंकि यह फ्रांसीसी क्रांति के प्रारंभ का प्रतीक है. इस दिन, पेरिस के निवासियों ने बैस्टिल के किले पर धावा बोल दिया, जो राजशाही एवं सत्तावादी शासन का प्रतीक था.

  • बैस्टिल से गोला-बारूद एवं हथियारों की सफल जब्ती ने “प्राचीन शासन” एवं शाही सैनिकों के विरुद्ध लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ दिया.

  • बैस्टिल के पतन को पेरिस के लोगों की विजय के रूप में देखा गया और बाद में, संरचना को ध्वस्त कर दिया गया.

  • एक वर्ष पश्चात, 14 जुलाई, 1790 को, लोगों ने निरपेक्षता के अंत एवं एक नए युग के प्रारंभ को चिह्नित करने के लिए संघों का पर्व मनाया.

  • पेरिस में चैंप डे मार्स में हजारों लोग एकत्रित हुए, जहां चार्ल्स मौरिस डी तललीरैंड-पेरिगार्ड ने फादरलैंड की वेदी पर एक मास का आयोजन किया.
     

  • कई वर्षों तक परित्यक्त रहने के पश्चात, 14 जुलाई को आधिकारिक तौर पर 6 जुलाई, 1880 को गणतंत्र का राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया, जब संसद ने ऐतिहासिक घटना को मनाने के लिए एक अधिनियम पारित किया.

बैस्टिल दिवस का महत्व

14 जुलाई का महत्व इसके लोगों की विजय के प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व में निहित है. 1914 से 1918 तक चले प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात 1919 में इस ऐतिहासिक दिन को अत्यधिक उत्साह एवं जोश के साथ मनाया गया.

बैस्टिल दिवस पर होता है नेशनल होली डे

बैस्टिल दिवस पर देशभर में छुट्टी होती है. इस दिन राष्ट्रीय अवकाश को आधिकारिक तौर पर सन् 1880 में ही शुरू कर दिया गया था. शुरुआत से ही इस दिन आतिशबाजी और सैन्य परेड होने लगी. सार्वजनिक उत्सव के अलावा देश के नाम संबोधन भी इस दिन का खास कार्यक्रम होता है. पहले तो 14 तारीख के विशेष आयोजन के अलावा जुलाई के पूरे महीने में नृत्य, गायन और मनोरंजन आदि के आयोजन होते थे लेकिन कालांतर में यह एक दिन के आयोजन तक ही सीमित रह गया. कोरोना काल में बैस्टिल दिवस प्रभावित हुआ लेकिन एक बार फिर पहले की तरह फ्रांस जश्न मनाने के लिए तैयार है.

बैस्टिल जेल का क्या महत्व है

उत्तर. बैस्टिल जेल को फ्रांसीसी राजशाही के दमनकारी शासन के प्रतीक के रूप में देखा जाता था.इसका 14 जुलाई, 1789 को पेरिस के लोगों द्वारा उत्पन्न किए गए तूफान को फ्रांसीसी क्रांति में एक महत्वपूर्ण क्षण एवं फ्रांस में निरंकुश राजशाही के अंत के प्रारंभ के रूप में देखा जाता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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