अक्षय तृतीया : स्नान-दान का है विशेष महत्व

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 25 Apr 2020 6:25 AM

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वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया मनाया जाता है. इसे अबूझ मुहूर्त कहा गया है. इस बार यह 26 अप्रैल को है. कहा जाता है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य जरूर सफल होता है

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किशनगंज : वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया मनाया जाता है. इसे अबूझ मुहूर्त कहा गया है. इस बार यह 26 अप्रैल को है. कहा जाता है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य जरूर सफल होता है. पंडितों के मुताबिक,अक्षय तृतीया पर किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती. इस तिथि में किया गया कोई भी कार्य कभी भी निष्फल नहीं होता है. यह तिथि सभी तरह के शुभ कार्यो को करने के लिए शुभ मानी जाती है. इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व होता है.

मान्यता है कि इस दिन किए गए दान का पुण्य अक्षय रहता है यानी कभी नष्ट नहीं होता. दिघलबैंक दुर्गा मंदिर के पुजारी सरोज झा के अनुसार कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार अक्षय तृतीया की पूजा घर पर ही करना श्रेष्ठ रहेगा. मान्यता है सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत इस तिथि पर हुई थी. इस दिन ही भगवान परशुराम का जन्म व मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था. सभी तरह की शुभ तिथियों में इस तिथि का महत्व काफी अधिक है.स्वर्ण खरीदने का है विधानअक्षय तृतीया के दिन सोना अथवा चांदी के आभूषण खरीदने का विधान है.

कई लोग घर में बरकत के लिए इस दिन सोने या चांदी की लक्ष्मी की चरण पादुका लाकर घर में रखते और उसकी नियमित पूजा करते हैं. साथ ही इस दिन पितरों की प्रसन्नता और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए जल कलश, पंखा, खड़ाऊं, छाता, सत्तू, ककड़ी, खरबूजा, फल, शक्कर, घी आदि दान करने चाहिए. चूंकि कन्या दान सभी दानों में महत्वपूर्ण बताया गया है, इसलिए इस दिन लोग शादी-विवाह का विशेष आयोजन करते हैं. हालांकि इस बार कोरोना और लॉक डाउन के चलते बाजार बंद है इसलिए खरीददारी संभव नहीं है.जबकि त्योहार का आयोजन लोग घर पर ही कर सकेंगे.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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