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AI जेनरेटेड वीडियो के लिए YouTube के नए दिशा-निर्देश, यूजर्स को मिलेंगे ये स्पेशल पावर

Updated at : 16 Jul 2024 6:20 PM (IST)
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YouTube Sleep Timer

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YouTube यूजर्स को प्राइवेसी रिक्वेस्ट प्रॉसेस के माध्यम से विशिष्ट AI जेनरेटेड कंटेंट को हटाने का अनुरोध करने का ऑप्शन देगा. अगर इसके बाद में भी वीडियो अपलोडर द्वारा कंटेंट नहीं हटाया गया तो...

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YouTube ने गलत सूचना के बारे में चिंताओं को संबोधित करते हुए दर्शकों को AI जेनरेटेड कंटेंट की पहचान करने में मदद करने के लिए अपडेट जारी किया है. नए दिशा-निर्देशों के अनुसार क्रिएटर्स को यह बताना होगा कि उनके वीडियो कब AI का उपयोग करके बनाए गए हैं या उनमें बदलाव किए गए हैं. यूट्यूब प्लेटफॉर्म यूजर्स को प्राइवेसी रिक्वेस्ट प्रॉसेस के माध्यम से विशिष्ट AI जेनरेटेड कंटेंट को हटाने का अनुरोध करने का विकल्प भी देगा.

यूट्यूब के तरफ से ये बदलाव आने वाले महीनों में लागू किए जाएंगे, जिसमें क्रिएटर्स को AI जेनरेटेड कंटेंट को स्पष्ट रूप से लेबल करने की आवश्यकता होगी. इस पहल का समर्थन करने के लिए, YouTube वीडियो प्लेयर और डिटेल्स पैनल में प्रमुख लेबल जोड़ेगा, जो यह संकेत देगा कि कंटेंट कृत्रिम रूप से बनाई गई है या बदली गई है. इसका उद्देश्य दर्शकों को AI जेनरेटेड मीडिया द्वारा गुमराह होने से रोकना है, यह सुनिश्चित करना है कि वे जो कंटेंट देख रहे हैं उसकी प्रकृति को समझें.

YouTube ने कहा है कि अगर कोई सिंथेटिक मीडिया सामुदायिक दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसे लेबलिंग की परवाह किए बिना प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाएगा. यह सख्त दृष्टिकोण YouTube की कंटेंट की अखंडता बनाए रखने और दर्शकों को संभावित नुकसान से बचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

इसके अतिरिक्त, YouTube यूजर्स को प्राइवेसी रिक्वेस्ट प्रॉसेस के माध्यम से विशिष्ट AI जेनरेटेड या परिवर्तित कंटेंट को हटाने का अनुरोध करने का ऑप्शन देगा. इन अनुरोधों का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाएगा कि क्या कंटेंट पैरोडी या व्यंग्य है, क्या अनुरोधकर्ता की विशिष्ट पहचान की जा सकती है, और क्या इसमें सार्वजनिक अधिकारी या जाने-माने व्यक्ति शामिल हैं, जो उच्च जांच के अधीन होंगे. जो क्रिएटर नई डिस्कलोजर रिक्वाएरमेंट्स का पालन करने में विफल रहते हैं, उन्हें दंड का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें कंटेंट हटाना, YouTube पार्टनर प्रोग्राम से निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई शामिल है.

कंपनी ने कहा, “अगर प्राइवेसी संबंधी शिकायत दर्ज की जाती है, तो YouTube अपलोडर को अपने वीडियो में निजी जानकारी हटाने या संपादित करने का अवसर दे सकता है. हम अपलोडर को संभावित उल्लंघन के बारे में सूचित करेंगे और YouTube के विवेक पर, उन्हें शिकायत पर कार्रवाई करने के लिए 48 घंटे का समय दे सकते हैं. इस दौरान, क्रिएटर YouTube स्टूडियो में उपलब्ध ट्रिम या ब्लर टूल का उपयोग कर सकता है. अगर अपलोडर इसके बजाय वीडियो हटाने का विकल्प चुनता है, तो शिकायत बंद कर दी जाएगी. अगर संभावित गोपनीयता उल्लंघन बना रहता है, तो YouTube टीम शिकायत की समीक्षा करेगी.”

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Vikash Kumar Upadhyay

लेखक के बारे में

By Vikash Kumar Upadhyay

Journalist at Prabhat Khabar Digital, Gold Medalist alumnus MGCU, Former intern Tak App, Biz Tak and DB Digital. Ex reporter INS24 News. Former media personnel District Information and Public Relation Department, Motihari. Former project partner and planner Guardians of Champaran. Very keen to work with the best faculties and in challenging circumstances. I have really a big dream to achieve and eager to learn something new & creative. More than 3 years of experience in Desk and Reporting.

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