What is Building Lifting Shifting Technique: जानिए कैसे शिफ्ट होती है बिल्डिंग और क्या है तकनीक

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 10 Mar 2024 8:12 PM

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What is Building Lifting Shifting Technique : अब आप अपने घर को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट कर सकते हैं. जानिए क्या है यह तकनीक-

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What is Building Lifting Shifting Technique : अगर आपका घर सड़क किनारे पर है और सड़क चौड़ी की जा रही है, तो सबसे पहले आपके मन में यही बात आयेगी कि आपको अपना घर तोड़ना होगा. कितना अच्छा होता कि घर को तोड़ने की जगह थोड़ा पीछे खिसका लेते! अब यह कल्पना भी हकीकत बन गई है. अब आप अपने घर काे एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट कर सकते हैं.

शिप पर शिफ्ट हुई बड़ी बिल्डिंग

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें देखा जा सकता है कि एक शिप पर एक बड़ी – सी बिल्डिंग को रखकर एक जगह से दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जा रहा है. यह शिप इतनी बड़ी बिल्डिंग को लेकर धीरे – धीरे और बड़े आराम से नदी पर तैरती दिखाई दे रही है. हिस्टॉरिक विड्स के एक्स हैंडल से शेयर किया गया यह वायरल वीडियो चीन का बताया जा रहा है.

भारत में भी हो रही बिल्डिंग की लिफ्टिंग और शिफ्टिंग

किसी इमारत को लिफ्ट और शिफ्ट करने की तकनीक पर अपने देश में भी काम किया जा रहा है. देश के कई हिस्सों में जहां सड़कों का चौड़ीकरण चल रहा है,  वहीं कई जगहों पर एलिवेटेड एक्सप्रेस-वे भी बनाये जा रहे हैं. इन सभी कार्यों में सड़क के किनारे मौजूद मकानों को अक्सर तोड़ना पड़ता है. पाई-पाई की कमाई जोड़कर बनाये गए घर को टूटता देखना हर किसी के लिए दुखदायी है. ऐसे में लिफ्टिंग और शिफ्टिंग तकनीक काफी कारगर साबित हो रही है. लोग इस तकनीक का इस्तेमाल करने लगे हैं.

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जमीन से सात फीट ऊंचा किया प्राचीन शिव मंदिर

घरों की लिफ्टिंग और शिफ्टिंग को लेकर खबरें समय-समय पर सोशल मीडिया में आती रहती हैं. कुछ महीने पहले, उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित दिल्ली-रुड़की हाइवे स्थित सिवाया गांव में लगभग 400 साल पुराना शिव मंदिर जमीन से सात फीट ऊंचा कर दिया गया. बताया जाता है कि मंदिर पहले अच्छी-खासी ऊंचाई पर था, लेकिन समय के साथ सड़क ऊंची होती गई, और मंदिर नीचा होता गया. ऐसे में बारिश होने पर मंदिर परिसर में पानी जमा होने लगा. मंदिर समिति ने लिफ्टिंग शिफ्टिंग वालों से संपर्क कर मंदिर को ऊंचा करा दिया.

सड़क से पीछे शिफ्ट किया गया घर

हाल ही में मेरठ के सिसोली गांव में सड़क किनारे स्थित एक घर को मकान मालिक ने दूसरी जगह शिफ्ट करा दिया. सड़क के चौड़ीकरण का काम होने से मकान सड़क के बहुत पास आ गया था. ऐसे में इसको तोड़ने के हालात बन आये थे. लिफ्टिंग-शिफ्टिंग तकनीक से मकान को सड़क से पीछे की ओर शिफ्ट कर दिया गया. करीब डेढ़ दशक पहले विदेशों से आयी यह तकनीक अब भारत में अपना कमाल दिखा रही है. बिल्डिंग की लिफ्टिंग-शिफ्टिंग का काम दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में ज्यादा हो रहा है.

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कैसे काम करती है यह तकनीक?

सबसे पहले मकान के जरूरी जोड़ों, जैसे पिलर और टाई-बीम को जमीन से अलग किया जाता है. पिलर और टाई-बीम न हो, तो भी मकान के प्लिंथ लेवल को जमीन से अलग कर पहले जैक के माध्यम से मकान को उठा दिया जाता है. इसके बाद नीचे ट्रैक बनाकर रॉलर से उसे शिफ्ट किया जाता है. इस तकनीक से मकान को 30 फीट तक शिफ्ट किया जा सकता है. पूरा काम सावधानी से धीरे-धीरे किया जाता है, ताकि मकान में कहीं से कोई दरार न आ जाए. ऐसे में इस काम में लगभग 30 दिनों का समय लग जाता है. बिल्डिंग लिफ्टिंग शिफ्टिंग वर्क के ठेकेदार, हरियाणा स्थित यमुनानगर जिले के रहनेवाले सुखविंदर सिंह बताते हैं कि वह लगभग 15 वर्षों से घरों व धार्मिक स्थलों को सड़क से दूर शिफ्ट करने और लिफ्ट करने का काम कर रहे हैं. यह तकनीक चूंकि नयी है, ऐसे में शिफ्टिंग का कार्य देखने के लिए लोग उमड़ पड़ते हैं. समय – समय पर इस कारनामे के वीडियो भी वायरल होते हैं.

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लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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