Telecom Bill 2023: फर्जी सिम पर सख्ती, यूजर्स की सुरक्षा का ख्याल; जानें टेलीकॉम बिल में क्या है खास

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 21 Dec 2023 11:28 AM

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Telecommunications Bill 2023 - लोकसभा में नया टेलीकॉम बिल 2023 पास हो गया है. इस बिल में फर्जी सिम लेने पर 3 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. नये बिल के मुताबिक टेलीकॉम कंपनियों को उपभोक्ताओं को सिम कार्ड जारी करने से पहले अनिवार्य रूप से बायोमेट्रिक पहचान करने को कहा गया है

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Telecommunications Bill 2023 : देश में 138 साल पुराने टेलीग्राफ अधिनियम को निरस्त कर नया कानून बनाने के लिए लाये गये दूरसंचार विधेयक, 2023 को लोकसभा ने बुधवार को मंजूरी प्रदान कर दी, जिसमें प्रशासनिक तरीके से उपग्रह संचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटन का प्रस्ताव है. दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस विधेयक से दूरसंचार उपभोक्ताओं का संरक्षण होगा और कोई भी धोखाधड़ी से सिम प्राप्त नहीं कर सकेगा. विधेयक के अनुसार, यदि कोई अवैध रूप से दूरसंचार उपकरणों का उपयोग करता है, तो उसे तीन साल तक की कैद की सजा सुनायी जा सकती है या दो करोड़ रुपये तक का जुर्माना लग सकता है या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं. दूरसंचार नेटवकर्क काो नुकसान पहुंचाने पर मुआवजे और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने के लिए उत्तरदायी होगा.

नये टेलीकॉम बिल में क्या हैं प्रावधान ?

लोकसभा में नया टेलीकम्युनिकेशन बिल 2023 पास हो गया है. अब इस बिल को चर्चा के लिए राज्यसभा में भेज दिया गया है. इस बिल में फर्जी सिम लेने पर 3 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. नये बिल के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियों को उपभोक्ताओं को सिम कार्ड जारी करने से पहले अनिवार्य रूप से बायोमेट्रिक पहचान करने को कहा गया है. यह बिल सरकार को इस बात की अनुमति देगा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से किसी भी टेलीकॉम सर्विस या नेटवर्क का टेक ओवर, मैनेजमेंट या उसे सस्पेंड कर सके. मतलब यह कि युद्ध जैसी स्थिति में जरूरत पड़ने पर सरकार टेलीकॉम नेटवर्क पर मैसेजेज को इंटरसेप्ट कर सकेगी.

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किन बिल्स की जगह लेगा नया दूरसंचार बिल ?

नया दूरसंचार बिल 138 साल पुराने भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम को बदलेगा, जो टेलीकॉम सेक्टर को नियंत्रित करता है. इसके साथ ही, यह बिल द इंडियन वायरलेस टेलीग्राफ एक्ट 1933 और टेलीग्राफ वायर्स एक्ट 1950 की भी जगह लेगा. यह ट्राई एक्ट 1997 को भी संशोधित करेगा. भारत सरकार का नया बिल लाइसेंसिंग सिस्टम में भी बदलाव लायेगा. वर्तमान में, सर्विस प्रोवाइडर्स को विभिन्न प्रकार की सर्विसेज के लिए अलग-अलग लाइसेंस, परमिशन, अप्रूवल और रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है. ऐसे 100 से अधिक लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन हैं जो टेलीकॉम डिपार्टमेंट जारी करता है. इन सबकी जगह अब एक आसान सा ऑथराइजेशन लेना होगा.

ग्राहक की सहमति लेकर ही भेज सकेंगे प्रमोशनल मैसेज

नये टेलीकॉम बिल के अनुसार, उपभोक्ता को गुड्स, सर्विसेज के लिए विज्ञापन और प्रमोशनल मैसेज भेजने से पहले उनकी सहमति लेना अनिवार्य किया गया है. नये बिल के अनुसार, टेलीकॉम सर्विसेज मुहैया करानेवाली कंपनी को एक ऑनलाइन मेकैनिज्म भी बनाना होगा, जिससे यूजर्स अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकें.

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By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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