सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव: Netflix-YouTube जैसे OTT पर अश्लील कंटेंट रोकने के लिए अब Aadhaar वेरिफिकेशन जरूरी

Published by : Ankit Anand Updated At : 28 Nov 2025 2:46 PM

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Aadhaar Verification To Watch OTT Content

Aadhaar Verification To Watch OTT Content: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि Netflix और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म पर एडल्ट कंटेंट देखने से पहले आधार कार्ड से उम्र की जांच होनी चाहिए. कोर्ट ने दिव्यांगों का मजाक उड़ाने वाली सामग्री पर भी कड़ी नाराजगी जताई और समय रैना जैसे कॉमेडियंस को फटकार लगाई.

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Aadhaar Verification To Watch OTT Content: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को संकेत दिया कि जल्द ही यूजर्स को कुछ तरह के ऑनलाइन कंटेंट देखने से पहले अपनी उम्र Aadhaar या PAN के जरिए वेरिफाई करनी पड़ सकती है. इसमें ऐसा कंटेंट शामिल होगा जो ‘अश्लील’, दिव्यांग व्यक्तियों के लिए ‘आपत्तिजनक’ या फिर ‘राष्ट्र-विरोधी’ माना जाता है. ये टिप्पणियां जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने डिजिटल कंटेंट रेगुलेशन पर चल रही सुनवाई के दौरान की है.

यह अपडेट सुप्रीम कोर्ट के एक सुझाव से जुड़ा है, इसे अभी तक किसी सरकारी नियम या पॉलिसी में शामिल नहीं किया गया है. यह सुझाव 27 नवंबर 2025 को हुई एक सुनवाई के दौरान सामने आया था. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

क्या है पूरा मामला?

पॉपुलर यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया, सायम रैना और कुछ अन्य कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ शो के एक एपिसोड में कथित रूप से आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणियों के आरोप में FIR दर्ज की गई थी. शो में कुछ जोक्स और बातचीत ऐसे थे, जिन्हें विकलांगों और संवेदनशील मुद्दों पर मजाक उड़ाने जैसा माना गया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया. 

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमल्या बागची की बेंच कर रही थी. सुनवाई के दौरान बेंच ने चिंता जताई कि यूट्यूब, नेटफ्लिक्स और दूसरी OTT प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद यूजर-जनरेटेड कंटेंट के लिए जो मौजूदा खुद अपने नियम तय करने वाला सिस्टम है, वह काफी नहीं है. कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर अश्लील या हानिकारक कंटेंट आसानी से मिल जाता है, खासकर नाबालिगों के लिए, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य और समाज के मूल्यों पर बुरा असर पड़ सकता है.

एडल्ट कंटेंट रोकने के लिए आधार वेरिफिकेशन का सुझाव

ऑनलाइन अश्लील कंटेंट को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि किताबों या पेंटिंग में दिखने वाली अश्लीलता अलग तरह की होती है. वहां नीलामी हो सकती है और जरूरत पड़ने पर रोक भी लगाई जा सकती है. लेकिन मोबाइल फोन पर मामला अलग है. जैसे ही कोई फोन ऑन करता है, कंटेंट सीधे सामने आ जाता है, और कई बार बिना चाहे भी गलत चीजें दिख जाती हैं. ऐसे में समाधान क्या हो?

इस पर CJI सूर्यकांत ने भी अपनी राय दी. उन्होंने कहा कि प्लेटफॉर्म चेतावनी तो दिखाते हैं, लेकिन वह कुछ सेकंड के लिए होती है और उसके बाद शो तुरंत शुरू हो जाता है. इसलिए आधार वेरिफिकेशन का ऑप्शन सही हो सकता है, क्योंकि इससे दर्शकों की उम्र पता चल जाएगी. इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा सकता है. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने साफ किया कि यह सिर्फ एक सुझाव है, कोई आदेश नहीं.

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

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