क्या आपका पुराना नंबर किसी और को मिल गया? बैंक OTP, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट गलत हाथों में जाने से ऐसे बचाएं

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पुराने मोबाइल नंबर से हो सकती है बैंकिंग धोखाधड़ी // एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन

नंबर बदलने के बाद अगर आपने बैंक, यूपीआई, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट अपडेट नहीं किए हैं तो आपका पुराना नंबर किसी और के पास जाकर आपकी डिजिटल सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है.

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मोबाइल नंबर बदलना आजकल बेहद आम बात है कोई बेहतर प्लान के लिए नया सिम लेता है, कोई फोन खो जाने के बाद नया नंबर इस्तेमाल करने लगता है, तो कई लोग पुराने नंबर को बंद कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस नंबर का आप इस्तेमाल छोड़ चुके हैं, वह कुछ ही महीनों बाद किसी दूसरे व्यक्ति को मिल सकता है? अगर आपके बैंक खाते, ईमेल, यूपीआई या सोशल मीडिया अकाउंट अभी भी उसी पुराने नंबर से जुड़े हैं, तो यह आपकी डिजिटल सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.

पुराना नंबर किसी और को मिल जाए तो क्या हो सकता है?

टेलीकॉम कंपनियां बंद पड़े नंबरों को हमेशा के लिए निष्क्रिय नहीं रखतीं. निर्धारित समय पूरा होने के बाद वही नंबर किसी नए ग्राहक को जारी किया जा सकता है. समस्या तब शुरू होती है जब उपयोगकर्ता अपने महत्वपूर्ण ऑनलाइन खातों में नंबर अपडेट नहीं करते.

ऐसी स्थिति में नया नंबर धारक आपके लिए भेजे गए OTP, पासवर्ड रीसेट लिंक या अन्य महत्वपूर्ण संदेश प्राप्त कर सकता है. इसका मतलब है कि आपके कई ऑनलाइन खातों तक पहुंच बनाने की कोशिश आसान हो सकती है.

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन भी बन सकता है कमजोर कड़ी

आज ज्यादातर लोग अतिरिक्त सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन यानी 2FA का उपयोग करते हैं. इसमें लॉगिन के दौरान मोबाइल नंबर पर एक कोड भेजा जाता है. लेकिन अगर वह नंबर अब आपके पास नहीं है और किसी दूसरे व्यक्ति को आवंटित हो चुका है, तो वही कोड उसके फोन पर पहुंच सकता है.

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यही कारण है कि केवल SMS आधारित सुरक्षा पर निर्भर रहना अब पहले जितना सुरक्षित नहीं माना जाता.

बढ़ रहा है अकाउंट हैकिंग का खतरा

दुनियाभर में हर साल लाखों मोबाइल नंबर बंद होते हैं और फिर दोबारा जारी किए जाते हैं. इसी वजह से पुराने नंबरों से जुड़े अकाउंट साइबर अपराधियों के लिए आसान निशाना बन सकते हैं.

अगर किसी व्यक्ति के पास आपका पुराना नंबर पहुंच गया और वह आपके ईमेल, सोशल मीडिया या बैंकिंग सेवाओं में पासवर्ड रीसेट प्रक्रिया शुरू करता है, तो उसे जरूरी सुरक्षा संदेश मिल सकते हैं. यही वजह है कि विशेषज्ञ पुराने नंबरों को अकाउंट से हटाने की सलाह देते हैं.

नंबर बदलने के बाद तुरंत करें ये काम

यदि आपने हाल ही में नया मोबाइल नंबर लिया है, तो सबसे पहले अपने सभी महत्वपूर्ण प्लैटफॉर्म की जांच करें. बैंकिंग ऐप, यूपीआई सेवाएं, ईमेल, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य जरूरी अकाउंट्स में नया नंबर अपडेट करें.

सिर्फ नया नंबर जोड़ना पर्याप्त नहीं है. पुराने नंबर को पूरी तरह हटाना भी जरूरी है ताकि भविष्य में किसी अन्य व्यक्ति को उस नंबर के जरिए आपके खातों तक पहुंच न मिल सके.

SMS OTP की जगह अपनाएं यह सुरक्षित तरीका

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अब ऑथेंटिकेटर ऐप्स के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं. ऐसे ऐप्स फोन नंबर पर निर्भर नहीं होते और डिवाइस के भीतर ही सुरक्षा कोड तैयार करते हैं.

इसके अलावा अकाउंट रिकवरी सेटिंग्स की भी जांच करें. कई बार पुराना नंबर बैकअप संपर्क के रूप में सेव रह जाता है, जो भविष्य में सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है.

क्यों जरूरी है अभी जांच करना?

मोबाइल नंबर का दोबारा आवंटन टेलीकॉम उद्योग की सामान्य प्रक्रिया है और यह आगे भी जारी रहेगी. ऐसे में सुरक्षा की जिम्मेदारी उपयोगकर्ता के हाथ में है. यदि आपने कभी नंबर बदला है, तो आज ही यह सुनिश्चित कर लें कि आपका पुराना नंबर किसी भी महत्वपूर्ण ऑनलाइन सेवा से जुड़ा न हो. एक छोटी सी लापरवाही आपकी निजी जानकारी, बैंक खाते और सोशल मीडिया प्रोफाइल को खतरे में डाल सकती है.

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राजीव कुमार

लेखक के बारे में

By राजीव कुमार

राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.

राजीव की एक्सपर्टीज स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग के साथ-साथ डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, ऑफिशियल डेटा, कंपनी अपडेट्स और एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी यूजर्स तक पहुंचाते हैं.

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राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन, पॉजिटिव जर्नलिज्म और फीचर राइटिंग जैसे अलग-अलग बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई.

जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.

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