KK Google Doodle: आज न जन्मदिन और न पुण्यतिथि, फिर क्यों गूगल ने सिंगर KK पर बनाया आज का डूडल? वजह खास है

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 25 Oct 2024 11:11 AM

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Krishnakumar Kunnath KK Google Doodle

KK Google Doodle: अपनी मधुर आवाज से लाखों लोगों को दीवाना बनाने वाले कृष्णकुमार कुन्नथ (केके) ने साल 1996 में आज ही के दिन, यानी 25 अक्टूबर को फिल्म 'माचिस' के गाने 'छोड़ आये हम' के साथ प्लेबैक सिंगर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी.

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Krishnakumar Kunnath KK Google Doodle: गूगल (Google) आज अपने खास डूडल (Doodle) के माध्यम से दिवंगत गायक कृष्णकुमार कुन्नथ (Krishnakumar Kunnath) यानी केके (KK) को श्रद्धांजलि दे रहा है. 23 अगस्त 1968 को दिल्ली में जन्मे केके ने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से पढ़ाई की. केके 31 मई 2022 को कोलकता के नजरुल मंच पर लाइव परफॉर्म कर रहे थे. शो के दौरान उनकी तबियत बिगड़ी जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. उन्होंने अंतिम बार अपना मशहूर गाना ‘हम रहे या ना रहें कल, कल याद आएंगे ये पल’ गाया था.

KK Google Doodle: केके के लिए आज क्याें खास है आज का दिन?

11 भाषाओं में 700 से ज्यादा गानेवाले केके का आज न जन्मदिन है और न ही पुण्यतिथि, लेकिन आज क्या खास है जो गूगल अपने डूडल के जरिये उन्हें याद कर रहा है? अगर आपके भी मन में यह सवाल आया है तो बता दें कि अपनी मधुर आवाज से लाखों लोगों को दीवाना बनाने वाले कृष्णकुमार कुन्नथ (केके) ने साल 1996 में आज ही के दिन, यानी 25 अक्टूबर को फिल्म ‘माचिस’ के गाने ‘छोड़ आये हम’ के साथ प्लेबैक सिंगर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी.

KK Google Doodle: 26 साल लंबा सिंगिंग करियर

केके ने 11 भाषाओं में 3,500 जिंगल्स गाये. केके ने अपने 26 साल लंबे सिंगिंग करियर के दौरान हिंदी में 500 से अधिक और बांग्ला, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम में 200 से ज्यादा गाने गाये. केके को 6 फिल्मफेयर पुरस्कार नॉमिनेशंस और दो स्टार स्क्रीन अवॉर्ड्स भी मिले. इसके साथ, उन्होंने कई अवॉर्ड्स अपने नाम किये. उन्हें भारतीय सिने इतिहास में सबसे प्रतिभाशाली बैकग्राउंड सिंगर्स में जाना जाता है.

KK Google Doodle: गुलजार की फिल्म से किया डेब्यू

केके ने साल 1996 में आयी गुलजार की फिल्म ‘माचिस’ के गाने ‘छोड़ आये हम वो गलियां’ के जरिये से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. केके ने इस गाने को हरिहरन, सुरेश वाडकर और विनोद सहगल के साथ मिलकर गाया था और केके के हिस्से इस गाने के कुछ ही बोल आये थे. आज इस फिल्म के 28 साल पूरे हो गए. गुलजार के निर्देशन में बनी ‘माचिस’ में तब्बू और चंद्रचूड़ सिंह लीड रोल में नजर आये थे. यह फिल्म हिट हुई थी और इसका गाना ‘छोड़ आये हम…’ आज भी एक सुपरहिट गाना है. केके को इस गाने के लिए खूब सराहना मिली और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

KK Google Doodle: पहले थे सेल्समैन, शौक से बने सिंगर

कम ही लोग यह जानते होंगे कि बचपन से म्यूजिक के दीवाने, सिंगर केके ने म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले एक सेल्समैन के रूप में भी काम किया. केके ने अपने बचपन के प्यार ज्योति कृष्णा से शादी की, जिन्होंने केके को सेल्समैन की जॉब छोड़कर सिंगिंग में हाथ आजमाने की प्रेरणा दी. केके ने अपनी टीम बनायी और कीबोर्ड पर जिंगल्स बनाने लगे और इससे उन्हें पैसे मिलने लगे. रिपोर्ट्स की मानें, तो केके को 1990 के दशक में एक बार नयी दिल्ली के एक रूफटॉप कैफे में परफॉर्म करते हुए गायक हरिहरन ने देखा था. वहां केके के गाने से प्रभावित होकर हरिहरन ने उन्हें फिल्मों में गाना गाने का सुझाव दिया था.

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लेखक के बारे में

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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