Google Play Store से हटाये गए भारतीय ऐप्स को फिर मिली एंट्री, भारत सरकार की सख्ती बाद बदला फैसला

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 03 Mar 2024 2:58 PM

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Google Play Store ने बिलिंग विवाद को लेकर Naukri.com, Shaadi.com, Bharat Matrimony, Matrimony.com, 99acres, Kuku FM, QuackQuack सहित ऐप्स को 1 मार्च को हटाया था

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Google Play Store Latest News : गूगल प्ले स्टोर से जिन भारतीय ऐप्स को गूगल ने हटा दिया था, उन्हें एक बार फिर से प्ले स्टोर पर बहाल कर दिया गया है. भारत सरकार की ओर से सख्त प्रतिक्रिया आने के बाद गूगल की तरफ से यह कदम उठाया गया है. मालूम हो कि गूगल ने हाल ही में बिल पेमेंट पॉलिसी को लेकर कई ऐप्स को अपने प्ले स्टोर से हटा दिया था. अब भारत सरकार की सख्ती के बाद कंपनी को जल्द ही अपना फैसला बदलना पड़ गया.

Google ने बिलिंग विवाद को लेकर Naukri.com, Shaadi.com, Bharat Matrimony, Matrimony.com, 99acres, Kuku FM, QuackQuack सहित कई ऐप्स को 1 मार्च को गूगल प्ले स्टोर से हटा दिया था. गूगल के इस कदम पर शनिवार को भारत सरकार ने नाराजगी जतायी थी. गूगल के अपने प्ले स्टोर से कुछ ऐप हटाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार ने शनिवार को कहा कि भारतीय ऐप को हटाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. सरकार ने इस संबंध में गूगल और संबंधित स्टार्टअप को बैठक के लिए अगले सप्ताह बुलाया है. Google: गूगल प्ले स्टोर से कई ऐप्स गायब, सरकार ने अपनाया कड़ा रुख

आईटी और दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पीटीआई-भाषा को दिये एक साक्षात्कार में कहा कि स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की कुंजी है और उनके भाग्य का फैसला किसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनी पर नहीं छोड़ा जा सकता है.

मंत्री की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है, क्योंकि गूगल ने शुक्रवार को सेवा शुल्क भुगतान पर विवाद को लेकर भारत में अपने प्ले स्टोर से एक लोकप्रिय मैट्रिमोनी ऐप सहित कुछ ऐप को हटाना शुरू कर दिया था. इन ऐप और जानेमाने स्टार्टअप संस्थापकों ने इस पर आपत्ति जतायी थी.

वैष्णव ने इस मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाते हुए कहा, भारत सरकार की नीति बहुत स्पष्ट है… हमारे स्टार्टअप को वह सुरक्षा मिलेगी, जिसकी उन्हें जरूरत है. मंत्री ने कहा कि सरकार विवाद सुलझाने के लिए अगले सप्ताह गूगल और प्ले स्टोर से हटाये गए ऐप के डेवलपर से मुलाकात करेगी.

वैष्णव ने कहा, मैंने पहले ही गूगल से बात की है… मैंने उन ऐप डेवलपर से भी बात की है, जिन्हें हटाया गया है. हम उनसे अगले हफ्ते मिलेंगे… इस तरह (ऐप को) हटाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. उन्होंने कहा कि भारत ने 10 वर्षों में एक लाख से अधिक स्टार्टअप और 100 से अधिक यूनिकॉर्न का एक मजबूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बनाया है. मंत्री ने कहा, युवाओं और उद्यमियों की ऊर्जा को सही दिशा देनी चाहिए और इसे बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनी की नीतियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. Google Removes Apps: इन ऐप्स पर गूगल की बड़ी कार्रवाई, यहां देखें पूरी लिस्ट

इससे पहले गूगल ने शुक्रवार को कहा था कि कई जानी-मानी फर्मों सहित कई कंपनियां उसके बिलिंग मानदंडों का उल्लंघन कर रही हैं. ये कंपनियां बिक्री पर लागू प्ले स्टोर सेवा शुल्क का भुगतान नहीं कर रही हैं. गूगल ने चेतावनी दी थी कि वह गूगल प्ले पर ऐसे गैर-अनुपालन वाले ऐप को हटाने में संकोच नहीं करेगी. इसके बाद शुक्रवार को ही शादी डॉट कॉम, मैट्रिमोनी डॉट कॉम, भारत मैट्रिमोनी, बालाजी टेलीफिल्म्स का ऑल्ट (पूर्व में ऑल्ट बालाजी), ऑडियो मंच कुकू एफएम, डेटिंग सेवा क्वैक क्वैक और ट्रूली मैडली के ऐप प्ले स्टोर पर सर्च करने पर नहीं मिले.

इंफो एज (इंडिया) लिमिटेड ने शनिवार को कहा कि उसके ऐप को गूगल प्ले स्टोर से हटा दिया गया है, लेकिन कुछ घंटों के भीतर कहा गया कि उनमें से कुछ ऐप को बहाल कर दिया गया है. कंपनी के संस्थापक संजीव बिखचंदानी ने दावा किया कि इंफो एज ने गूगल के सभी बकाया को चुका दिया है और उसकी नीतियों का पालन किया जा रहा है. उन्होंने एक भारतीय ऐप स्टोर की जरूरत पर भी जोर दिया. क्वैक क्वैक के संस्थापक रवि मित्तल ने कहा कि कंपनी बाजार में वापस आने के लिए नियमों का पालन करेगी.

इस संबंध में आईटी राज्य मंत्री राजीव चन्द्रशेखर ने कहा कि वह प्रतिस्पर्धा और स्टार्टअप को दबाने वाले गूगल के प्रभुत्व के बारे में चिंताओं को जाहिर करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को यह पता लगाना होगा कि क्या मौजूदा मुद्दा प्रभुत्व की स्थिति के दुरुपयोग से जुड़ा है. उन्होंने कहा, मैंने अतीत में गूगल के प्रभुत्व पर चिंता जताई है. यह भारत में 90 प्रतिशत से अधिक ऐप पारिस्थितिकी तंत्र को नियंत्रित करता है. हमें चिंता है कि उनका प्रभुत्व प्रतिस्पर्धा और स्टार्टअप को रोकता है. स्टार्टअप के खिलाफ इसका दुरुपयोग किया जा सकता है और सरकार की कुछ वैध चिंताएं हैं.

पीटीआई – भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, गूगल ने कहा कि इन डेवलपर को तैयारी के लिए तीन साल से अधिक का समय दिया गया. इसमें उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद दिया गया तीन सप्ताह का समय भी शामिल है. गूगल ने कहा कि इसके बाद अब वह यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है, कि उसकी नीतियां सभी पर समान रूप से लागू हों.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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