1 मई से FasTag की जगह GNSS से कटेगा टोल, जानिए कैसे काम करता है यह नया सिस्टम

Published by : Ankit Anand Updated At : 18 Apr 2025 4:11 PM

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GNSS Toll System

भारत सरकार 1 मई 2025 से FASTag प्रणाली को बंद कर GNSS आधारित टोल सिस्टम शुरू करने जा रही है. इस नई व्यवस्था में वाहनों से टोल वसूली सैटेलाइट के माध्यम से तय की जाएगी, और शुल्क यात्रा की गई दूरी के आधार पर लिया जाएगा.

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1 मई 2025 से सड़कों पर यात्रा और भी सहज हो जाएगी, क्योंकि केंद्र सरकार एक नया GPS-आधारित टोल कलेक्शन सिस्टम शुरू करने जा रही है. इस दिशा में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) FASTag प्रणाली को पूरी तरीके से समाप्त कर, सैटलाइट आधारित इस अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने की तैयारी में है. इस नई प्रणाली के तहत टोल की गणना वाहनों द्वारा तय की गई दूरी के आधार पर की जाएगी. आइये विस्तार से जानते हैं क्या है यह GPS-आधारित टोल कलेक्शन सिस्टम और यह काम कैसे करेगा.

देश में टोल वसूली के लिए इस्तेमाल हो रहे फास्टैग सिस्टम को जल्द ही ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) से बदला जाएगा. हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में घोषणा की कि GNSS आधारित नया टोल सिस्टम अप्रैल के अंत तक शुरू कर दिया जाएगा. पहले यह प्रणाली 1 अप्रैल से लागू होने की उम्मीद थी, लेकिन कुछ देरी के बाद अब इसे आगामी 15 दिनों के भीतर पूरी तरीके से देशभर में लागू किया जाएगा.

कैसे काम करेगा GNSS आधारित टोल सिस्टम

RFID तकनीक वाले FASTag की तरह ही GNSS (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) आधारित टोल सिस्टम भी शुरू किया जा रहा है, लेकिन इसमें गाड़ी की विंडशील्ड पर टैग लगाने की जरूरत नहीं होगी. इस नई व्यवस्था में वाहनों में एक ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) या ट्रैकर लगाया जाएगा, जिससे सैटेलाइट के जरिए उनकी मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी. वाहन ने कितनी दूरी हाईवे पर तय की है, उसी के आधार पर टोल की राशि तय होगी और लिंक किए गए डिजिटल वॉलेट से ऑटोमैटिक कट जाएगी. यह आधुनिक टोल सिस्टम प्रीपेड और पोस्टपेड, दोनों विकल्पों को सपोर्ट करेगा.

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FASTag यूजर्स को करने पड़ेंगे यह काम 

  • 30 अप्रैल 2025 तक वाहन मालिक अपने मौजूदा FASTag का उपयोग कर सकते हैं.
  • 1 मई से सभी वाहनों में सरकार द्वारा अनुमोदित GPS डिवाइस लगाना अनिवार्य होगा.
  • नई प्रणाली के तहत वाहन मालिकों को अपने बैंक खाते को GPS टोल सिस्टम से लिंक करना होगा. 
  • पूरी प्रक्रिया के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद, पुराना FASTag स्टिकर हटाया जा सकेगा.

GNSS आधारित टोल सिस्टम से यात्रियों को होगा बड़ा लाभ

नई GNSS (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) आधारित टोल प्रणाली से हाईवे पर सफर करने वाले यात्रियों को कई सुविधाएं मिलेंगी. इस तकनीक के जरिए अब टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी, जिससे इंतजार का समय बचेगा और सफर ज्यादा सुगम बनेगा. आप जितना सफर करेंगे उतना ही टोल का हिसाब देना होगा. इस प्रणाली के लागू होने से मैनुअल त्रुटियों की संभावना कम होगी और धोखाधड़ी की घटनाओं पर भी लगाम लगेगी.

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By Ankit Anand

अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

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