बंदे ने जॉब के पहले हफ्ते में कंपनी को लगाया ₹2 लाख का चूना, वायरल हुआ दिल्ली स्टार्टअप स्कैम

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 22 Feb 2026 3:17 PM

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स्टार्टअप के नये स्टाफ ने बनाये 100% डिस्काउंट कूपन, ₹2 लाख के स्नीकर्स ऑर्डर कर कंपनी छोड़ी / सिंबॉलिक पिक

दिल्ली की स्नीकर्स कंपनी गली लैब्स के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया. नये कर्मचारी ने पहले ही सप्ताह में 100% डिस्काउंट कूपन बनाकर ₹2 लाख के स्नीकर्स ऑर्डर किए और नौकरी छोड़ दी. कंपनी ने अब सेफ्टी मेजर्स कड़े किए.

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दिल्ली बेस्ड स्नीकर्स डिजाइन हाउस गली लैब्स के साथ हाल ही में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. कंपनी के को-फाउंडर अर्जुन सिंह ने बताया कि उनकी टीम में शामिल हुए एक नये स्टाफ ने पहले ही सप्ताह में कई 100% डिस्काउंट कूपन बनाये और करीब ₹2 लाख के स्नीकर्स अपने दोस्तों और परिवार को ऑर्डर कर दिए. इसके बाद वह जॉब छोड़कर चला गया.

कैसे हुई घटना?

अर्जुन सिंह ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर लिखा कि उन्होंने कुछ महीने पहले एक कस्टमर सर्विस कर्मचारी को नियुक्त किया था. जॉइनिंग के पहले ही सप्ताह में उसने कंपनी के सिस्टम का गलत इस्तेमाल करते हुए मुफ्त ऑर्डर बनाये और स्नीकर्स अपने जान-पहचान वालों को भेज दिए.

पकड़े जाने के बाद क्या हुआ?

जब कंपनी ने इस धोखाधड़ी का पता लगाया तो कर्मचारी ने शुरुआत में सहयोग दिखाया और आधे स्नीकर्स वापस कर दिए. लेकिन बाकी जूतों का इस्तेमाल हो चुका था. इसके बाद उसने कंपनी पर ही हैरासमेंट के आरोप लगाते हुए कानूनी नोटिस भेजना शुरू कर दिया.

जरूरत सुरक्षा उपायों की

इस घटना के बाद गली लैब्स ने अपने सिस्टम में नये सुरक्षा उपाय लागू किये. अर्जुन सिंह ने कहा कि अब उन्हें अपने स्टाफ मेंबर्स से भी कस्टमर डेटा और ऑर्डर डिटेल्स को सुरक्षित रखना पड़ रहा है.

लो ट्रस्ट सोसाइटी की प्रॉब्लम

सोशल मीडिया में जब यह पोस्ट आया, तो इसपर कई अन्य एंटरप्रेन्योर्स ने भी अपनी राय दी. एक फाउंडर ने लिखा कि जैसे-जैसे ब्रांड बढ़ते हैं, वैसे-वैसे सिक्योरिटी चैलेंज भी बढ़ते हैं. वहीं कुछ यूजर्स ने इसे “लो ट्रस्ट सोसाइटी” की समस्या बताया.

याद आये पुराने मामले

कई लोगों ने इस मामले को ई-कॉमर्स कंपनी जाबॉन्ग के बंद होने से जोड़ा. उन्होंने कहा कि जाबॉन्ग में कर्मचारियों को असीमित 30% डिस्काउंट कोड दिये जाते थे, जिन्हें वे अपने जान-पहचान वालों को बेच देते थे. इससे कंपनी को भारी नुकसान हुआ और अंततः उसके ऑपरेशंस बंद हो गए.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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