देश में पहली AI टीचर की एंट्री! सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ा रही ‘ईको’

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AI Teacher Eco

AI Teacher Eco | Government School Uttarakhand: उत्तराखंड के सरकारी स्कूल में भारत की पहली AI टीचर ‘ECO’ ने पढ़ाना शुरू किया. सिर्फ ₹4 लाख में बना ये रोबोट बना रहा है इतिहास.

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AI Teacher Eco: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने देशभर के शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है. यहां एक सरकारी स्कूल में ‘AI रोबोट टीचर’ बच्चों को पढ़ा रही है, और खास बात यह है कि ये भा��त की पहली सरकारी स्कूल AI टीचर मानी जा रही है.

कौन है ये ‘AI टीचर’?

इस AI टीचर का नाम है ‘ईको’ (ECO). ये एक ह्यूमैनॉइड AI रोबोट है, जो विद्यार्थियों के साथ संवाद कर सकती है, पढ़ा सकती है और सवालों के जवाब भी देती है. ECO को खासतौर पर बच्चों को तकनीक की मदद से इंटरैक्टिव और दिलचस्प तरीके से पढ़ाने के लिए बनाया गया है.

सिर्फ ₹4 लाख में बना ये अनोखा शिक्षक

AI टीचर ECO को बनाने में मात्र ₹4 लाख का खर्च आया है. पिथौरागढ़ के सरकारी स्कूल में पोस्टेड शिक्षक चंद्रशेखर जोशी ने इसे बनवाने की पहल की. उन्होंने बताया कि चीन में रहने वाले उनके इंजीनियर दोस्त ने इसके कई कंपोनेंट्स भेजे थे, जिन्हें जोड़कर ECO को तैयार किया गया.

वायरल हुआ वीडियो, सोशल मीडिया पर मचा तहलका

AI टीचर का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर आया, यह वायरल हो गया. ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर इसे लाखों बार देखा गया. लोग हैरान हैं कि भारत में सरकारी स्कूलों में भी अब AI-Driven Education की शुरुआत हो चुकी है.

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क्या पढ़ाती है ECO?

AI टीचर ECO फिलहाल कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को सामान्य विज्ञान, गणित और पर्यावरण अध्ययन जैसे विषय पढ़ा रही है. बच्चों से यह रोबोट सवाल-जवाब भी करता है और उनके जवाबों पर फीडबैक भी देता है.

भविष्य की शिक्षा का झलक?

ECO की शुरुआत एक संकेत है कि अब भारत की शिक्षा प्रणाली भी तकनीक के नए युग की ओर बढ़ रही है. खास बात यह है कि ग्रामीण और सरकारी स्कूलों में भी तकनीकी इनोवेशन संभव हैं — बस एक शिक्षक की पहल और तकनीक की मदद चाहिए.

एक छोटी शुरुआत, बड़ा इम्पैक्ट

AI टीचर ECO फिलहाल एक प्रयोग है, लेकिन इसका असर बहुत गहरा है. यह देश के अन्य स्कूलों को भी प्रेरित कर सकता है कि कम संसाधनों में भी कैसे शिक्षा को तकनीक से जोड़ा जा सकता है.

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राजीव कुमार

लेखक के बारे में

By राजीव कुमार

राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.

राजीव की एक्सपर्टीज स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग के साथ-साथ डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, ऑफिशियल डेटा, कंपनी अपडेट्स और एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी यूजर्स तक पहुंचाते हैं.

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राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन, पॉजिटिव जर्नलिज्म और फीचर राइटिंग जैसे अलग-अलग बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई.

जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.

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