देश में पहली AI टीचर की एंट्री! सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ा रही 'ईको'

Author :Rajeev Kumar
Published by :Rajeev Kumar
Updated at :19 Apr 2025 12:50 PM
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AI Teacher Eco

AI Teacher Eco

AI Teacher Eco | Government School Uttarakhand: उत्तराखंड के सरकारी स्कूल में भारत की पहली AI टीचर 'ECO' ने पढ़ाना शुरू किया. सिर्फ ₹4 लाख में बना ये रोबोट बना रहा है इतिहास.

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AI Teacher Eco: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने देशभर के शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है. यहां एक सरकारी स्कूल में ‘AI रोबोट टीचर’ बच्चों को पढ़ा रही है, और खास बात यह है कि ये भारत की पहली सरकारी स्कूल AI टीचर मानी जा रही है.

कौन है ये ‘AI टीचर’?

इस AI टीचर का नाम है ‘ईको’ (ECO). ये एक ह्यूमैनॉइड AI रोबोट है, जो विद्यार्थियों के साथ संवाद कर सकती है, पढ़ा सकती है और सवालों के जवाब भी देती है. ECO को खासतौर पर बच्चों को तकनीक की मदद से इंटरैक्टिव और दिलचस्प तरीके से पढ़ाने के लिए बनाया गया है.

सिर्फ ₹4 लाख में बना ये अनोखा शिक्षक

AI टीचर ECO को बनाने में मात्र ₹4 लाख का खर्च आया है. पिथौरागढ़ के सरकारी स्कूल में पोस्टेड शिक्षक चंद्रशेखर जोशी ने इसे बनवाने की पहल की. उन्होंने बताया कि चीन में रहने वाले उनके इंजीनियर दोस्त ने इसके कई कंपोनेंट्स भेजे थे, जिन्हें जोड़कर ECO को तैयार किया गया.

वायरल हुआ वीडियो, सोशल मीडिया पर मचा तहलका

AI टीचर का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर आया, यह वायरल हो गया. ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर इसे लाखों बार देखा गया. लोग हैरान हैं कि भारत में सरकारी स्कूलों में भी अब AI-Driven Education की शुरुआत हो चुकी है.

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क्या पढ़ाती है ECO?

AI टीचर ECO फिलहाल कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को सामान्य विज्ञान, गणित और पर्यावरण अध्ययन जैसे विषय पढ़ा रही है. बच्चों से यह रोबोट सवाल-जवाब भी करता है और उनके जवाबों पर फीडबैक भी देता है.

भविष्य की शिक्षा का झलक?

ECO की शुरुआत एक संकेत है कि अब भारत की शिक्षा प्रणाली भी तकनीक के नए युग की ओर बढ़ रही है. खास बात यह है कि ग्रामीण और सरकारी स्कूलों में भी तकनीकी इनोवेशन संभव हैं — बस एक शिक्षक की पहल और तकनीक की मदद चाहिए.

एक छोटी शुरुआत, बड़ा इम्पैक्ट

AI टीचर ECO फिलहाल एक प्रयोग है, लेकिन इसका असर बहुत गहरा है. यह देश के अन्य स्कूलों को भी प्रेरित कर सकता है कि कम संसाधनों में भी कैसे शिक्षा को तकनीक से जोड़ा जा सकता है.

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लेखक के बारे में

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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