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लैरी टेस्लर: ''कट-कॉपी-पेस्ट'' टूल के आविष्कारक कम्प्यूटर साइंटिस्ट जिनका इसी सप्ताह निधन हो गया

Updated at : 20 Feb 2020 1:54 PM (IST)
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लैरी टेस्लर: ''कट-कॉपी-पेस्ट'' टूल के आविष्कारक कम्प्यूटर साइंटिस्ट जिनका इसी सप्ताह निधन हो गया

कैलिफोर्निया: क्या आपने लैरी टेस्लर का नाम सुना है. शायद नहीं. लेकिन आपमें से हर किसी ने कम्प्यूटर में कट-कॉपी-पेस्ट टूल का इस्तेमाल जरूर किया होगा. किसी भी आर्टिकल को कीबोर्ड में टाइप करते समय इस टूल का इस्तेमाल जरूर किया जाता है. दरअसल, लैरी टेस्लर ही वो कम्प्यूटर साइंटिस्ट थे जिन्होंने कट-कॉपी-पेस्ट टूल का […]

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कैलिफोर्निया: क्या आपने लैरी टेस्लर का नाम सुना है. शायद नहीं. लेकिन आपमें से हर किसी ने कम्प्यूटर में कट-कॉपी-पेस्ट टूल का इस्तेमाल जरूर किया होगा. किसी भी आर्टिकल को कीबोर्ड में टाइप करते समय इस टूल का इस्तेमाल जरूर किया जाता है. दरअसल, लैरी टेस्लर ही वो कम्प्यूटर साइंटिस्ट थे जिन्होंने कट-कॉपी-पेस्ट टूल का आविष्कार किया था. स्टीव जॉब्स के साथ लंबे वक्त तक एप्पल कंपनी में काम करने वाले और अमेजन जैसी ई-कॉमर्स कंपनी में सेवाएं देने वाले इस महान कम्प्यूटर साइंटिस्ट का इस सप्ताह 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया.

उनकी वेबसाइट में इस आविष्कार की जानकारी

गौरतलब है कि लैरी टेस्लर साल 1973 में जेरॉक्स पालो ऑल्टो रिसर्च सेंटर (PARC) में शामिल हुए थे जहां उन्होंने टिम मॉट के साथ जिप्सी टेक्सट एडिटर बनाने के प्रोजेक्ट में काम किया था. इसी दौरान उन्होंने आर्टिकल के किसी हिस्से को दोबारा टाइप किए बिना उसकी कॉपी बनाने और किसी अन्य जगह पेस्ट करने का तरीका विकसित किया था. इसे ही आज सामान्य शब्दों में कट-कॉपी-पेस्ट कहा जाता है.

यदि आप टेक्नोलॉजी में रूचि रखते हैं तो लैरी टेस्लर की वेबसाइट में उनका वो सीवी देख सकते हैं जिसमें कट-कॉपी-पेस्ट के आविष्कार के बारे में जानकारी दी गयी है.

कम्प्यूटर वैज्ञानिक लैरी टेस्लर के बारे में जानकारी

कितना हैरान करने वाली बात है कि हम सभी लोग अपनी रोजाना की दिनचर्या में कभी ना कभी कम्प्यूटर का इस्तेमाल करते हैं. मेल लिखते समय, फेसबुक में कोई पोस्ट लिखते समय या आर्टिकल लिखते समय कई बार कट-कॉपी-पेस्ट का इस्तेमाल करते हैं लेकिन इसके आविष्कारक लैरी टेस्लर के बारे में नहीं जानते. एक बार किसी साक्षात्कार के दौरान टेस्लर ने अपनी वेबसाइट के बारे में बात करते हुए कहा था कि कई बार मुझे गलती से मैंकिटोश के लिए ग्राफिकल यूजर इंटरफेस का जनक मान लिया जाता है जबकि ऐसा नहीं है.

बता दें कि यद्यपि कम्प्यूटर साइंस के क्षेत्र में टेस्लर के योगदान की सीमा है लेकिन हमारे पास बहुत सारी ऐसी वजहें हैं जिसके लिए हमें उनका आभार व्यक्त करना चाहिए.

लैरी टेस्लर से प्रभावित थे एप्पल के सीईओ स्टीव

लैरी टेस्लर ही वो शख्स थे जिन्हें साल 1979 में स्टीव जॉब्स के सामने जेरॉक्स का ऑल्टो कम्प्यूटर और इंटरफेस का प्रजेंटेशन देने के लिए चुना गया था. स्टीव जॉब्स ने लैरी के काम को देखते हुए इस स्वर्णिम बताया था. उनकी योग्यता से प्रभावित होकर स्टीव जॉब्स ने लैरी टेस्लर को एप्पल कंपनी में काम करने के लिए राजी किया था. टेस्लर ने एप्पल कंपनी को 20 साल तक अपनी सेवा दी. 1993 में एप्पल कंपनी में उन्हें प्रमोशन मिला और मुख्य साइंटिस्ट का पद दिया गया.

उन्होंने लैरी, लिसा, न्यूटन और मैंकिटोश जैसी कई परियोजनाओं में शामिल रहे. टेस्लर ही वो शख्स थे जिन्होंने एप्पल को इस बात के लिए कन्विंस किया कि वो अत्याधुनिक आरआईएससी (एआरएम) मशीनों में निवेश करे. इस निवेश का एप्पल कंपनी को काफी फायदा मिला क्योंकि आईओएस डिवाइस एआरएम आधारित प्रोसेसर पर ही चलते हैं.

अमेजन और याहू जैसी कंपनियों का हिस्सा भी रहे

साल 1997 में लैरी टेस्लर एप्पल कंपनी से विदा हुए. इसके बाद उन्होंने अमेजन और याहू जैसी बड़ी कंपनियों के लिए काम किया. हालिया जानकारी के मुताबिक लैरी टेस्लर कैलिफोर्निया में प्रबंधन, अनुसंधान, डिजाइनिंग, डेस्कटॉप के लिए प्रोग्रामिंग, वेब, मोबाइल, टीवी और प्रिंटर में नयी तकनीकों को लेकर निजी परामर्शदाता के रूप में काम कर रहे थे.

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