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सुपौल: इमरजेंसी वार्ड में झाड़-फूंक करने लगी महिला, डॉक्टर बने दर्शक, जानें सांप काटने के बाद किसने बचाई जान

Updated at : 18 Jun 2023 2:17 AM (IST)
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सुपौल: इमरजेंसी वार्ड में झाड़-फूंक करने लगी महिला, डॉक्टर बने दर्शक, जानें सांप काटने के बाद किसने बचाई जान

परिजनों द्वारा बच्चे को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरायगढ़ लाया गया. जहां से उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया, लेकिन सदर अस्पताल में इलाज होने से पहले एक महिला तांत्रिक ने बच्चे को झाड़-फूंक से ठीक कर देने का दावा करते इमरजेंसी वार्ड में ही झाड़-फूंक करने लगी.

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सुपौल: सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड स्थित बनैनियां वार्ड नंबर 01 ओराही गांव निवासी फुलेश्वर सिंह के 12 वर्षीय पुत्र सुमन कुमार को शुक्रवार की देर शाम कोसी नदी के किनारे घूमने के दौरान जहरीले सांप ने डस लिया. परिजनों द्वारा बच्चे को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरायगढ़ लाया गया. जहां से उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया, लेकिन सदर अस्पताल में इलाज होने से पहले एक महिला तांत्रिक ने बच्चे को झाड़-फूंक से ठीक कर देने का दावा करते इमरजेंसी वार्ड में ही झाड़-फूंक करने लगी. आश्चर्य की बात तो यह लगा की तांत्रिक महिला को अस्पताल प्रशासन भगाने के बजाय और बच्चे का इलाज करने के बजाय खड़ा होकर तमाशा देखने लगा. देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा हो गयी. काफी देर तक तांत्रिक महिला बच्चे का झाड़ फूंक करती रही. बाद में तांत्रिक महिला ने परिजनों से कहा अब बच्चे को ले जाओ बच्चा पूरी तरह ठीक हो गया है.

सदर प्रखंड के करिहो की रहने वाली थी तांत्रिक महिला

तांत्रिक महिला सदर प्रखंड के करिहो गांव की बतायी गयी. उस महिला ने सदर अस्पताल में सांप काटे जख़्मी किशोर को बैठा कर झाड़-फूंक शुरू कर दी. महिला जमीन पर लेट घंटों झाड़-फूंक करती रही. वहीं स्थानीय लोग सहित अस्पताल प्रशासन मुख दर्शक बना रहा. झाड़-फूंक करने के बाद महिला ने मीडिया के कैमरे पर दावा किया कि अब किशोर ठीक हो जाएगा. उसने बताया कि वो बच्चे के साथ ही अस्पताल आयी थी.

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अस्पताल में नहीं होना चाहिए ऐसा : सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ मिहिर कुमार वर्मा ने कहा कि अस्पताल परिसर में कहीं भी इस तरह का कार्य नहीं होना चाहिए. जहां तक उक्त बच्चे का सवाल है तो उसका इलाज किया जा रहा था. वैसे अगर परिजन को झाड़-फूंक पर ही भरोसा है तो वे अपने घर पर कराये. अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा इलाज किया जाता है. यहां झाड़-फूंक से इलाज नहीं होता है.

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