केएलओ कमांडर के घर के सामने मना स्वतंत्रता दिवस

Published at :17 Aug 2016 2:12 AM (IST)
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केएलओ कमांडर के घर के सामने मना स्वतंत्रता दिवस

जलपाईगुड़ी. कामतापुर लिबरेशन आर्गनाइजेशन (केएलओ) के भूमिगत चेयरमैन जीवन सिंह के साथ सरकार की ओर से बातचीत शुरू की जानी चाहिए. ऐसा नहीं होने पर जीवन सिंह नयी पीढ़ी को लेकर दोबारा उत्तर बंगाल में केएलओ को खड़ा कर सकता है. जिस तरह से उल्फा की अगली पंक्ति के नेताओं के आत्मसमर्पण में मध्यस्थों की […]

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जलपाईगुड़ी. कामतापुर लिबरेशन आर्गनाइजेशन (केएलओ) के भूमिगत चेयरमैन जीवन सिंह के साथ सरकार की ओर से बातचीत शुरू की जानी चाहिए. ऐसा नहीं होने पर जीवन सिंह नयी पीढ़ी को लेकर दोबारा उत्तर बंगाल में केएलओ को खड़ा कर सकता है. जिस तरह से उल्फा की अगली पंक्ति के नेताओं के आत्मसमर्पण में मध्यस्थों की मदद ली गयी, उसी तरह केंद्र और राज्य सरकारें इस मामले में भी करें.

सोमवार को अलीपुरद्वार जिले के असम और भूटान सीमा से लगे कुमारग्राम ब्लॉक के मध्य हलदीबाड़ी में खुद जीवन सिंह के घर के सामने केएलओ के पूर्व सदस्यों ने पहला स्वाधीनता दिवस मनाया. इस अवसर पर केएलओ के पूर्व डिप्टी कमांडर मिल्टन वर्मा ने उक्त अनुरोध केंद्र और राज्य सरकारों से किया.


एक समय जीवन सिंह का दाहिना हाथ रहे मिल्टन वर्मा, केएलओ के पूर्व सह-अध्यक्ष हर्षवर्धन दास जैसे केएलओ की पूर्व अग्रिम पंक्ति के सदस्यों ने स्वाधीनता दिवस समारोह का आयोजन किया था. मुख्यधारा में शामिल हो चुके 25 केएलओ सदस्यों ने इसमें हिस्सा लिया. 1993 में मध्य हलदीबाड़ी के पुकुड़ीग्राम में जीवन सिंह, मिल्टन वर्मा, हर्षवर्धन आदि ने केएलओ नामक उग्रवादी संगठन का गठन किया था. 1999 में एक बार जीवन सिंह को असम में गिरफ्तार किया गया था. लेकिन जमानत मिलने के बाद से वह फरार है. बताया जाता है कि जीवन सिंह बोडो, नगा और उल्फा जैसे उग्रवादी संगठनों के साथ मिलकर अभी म्यांमार से केएलओ की गतिविधियां चला रहा है.

2003-04 में भूटान सेना के अभियान के दौरान मिल्टन और हर्षवर्धन वगैरह पकड़े गये. बाद में ये लोग 2011 में जेल से बाहर आ गये. लेकिन जीवन सिंह आज भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. मिल्टन ने कहा कि आज से करीब 23 साल पहले जीवन सिंह ने केएलओ का गठन कर बंगाल में आतंक फैला दिया था. जीवन को अगर आत्मसमर्पण नहीं कराया जाता है, तो उत्तर बंगाल में आतंक के दिन लौटने का खतरा बना रहेगा. इसलिए जीवन को बातचीत की मेज पर लाने के लिए दोनों सरकारों को प्रयास करना होगा.

बरसों तक स्वाधीनता दिवस का बहिष्कार करने वालों ने इस 15 अगस्त को तिरंगा फहराकर उसे सलाम किया. टूटे-फूटे स्वर में जन गण मन अधिनायक… गाया. और बच्चों के बीच चॉकलेट का वितरण किया.
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