राजनीतिक खलबली के बाद शुरू हुआ जोड़-घटाव

Published at :06 Aug 2016 2:28 AM (IST)
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राजनीतिक खलबली के बाद शुरू हुआ जोड़-घटाव

सिलीगुड़ी: एक महीने के अंदर सिलीगुड़ी नगर निगम पर कब्जा करने की तृणमूल की धमकी के बाद यहां राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज हो गई है. सिलीगुड़ी नगर निगम पर वर्तमान में वाम मोरचा का कब्जा है. लेकिन जिस तरह से तृणमूल कांग्रेस के जिला अध्यक्ष तथा राज्य के पर्यटन मंत्री गौतम देव ने नगर निगम […]

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सिलीगुड़ी: एक महीने के अंदर सिलीगुड़ी नगर निगम पर कब्जा करने की तृणमूल की धमकी के बाद यहां राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज हो गई है. सिलीगुड़ी नगर निगम पर वर्तमान में वाम मोरचा का कब्जा है. लेकिन जिस तरह से तृणमूल कांग्रेस के जिला अध्यक्ष तथा राज्य के पर्यटन मंत्री गौतम देव ने नगर निगम पर कब्जे की धमकी दी है, उससे मेयर अशोक भट्टाचार्य तथा वाम मोरचा के खेमे में खलबली है.

मंत्री गौतम देव ने बृहस्पतिवार को तृणमूल छात्र परिषद के सम्मेलन में साफ कहा था कि सिलीगुड़ी नगर निगम पर वाम मोरचा बोर्ड के दिन अब गिने-चुने बचे हैं. इस बीच, गौतम देव के इस प्रकार के संकेत देने तथा तृणमूल नेताओं की सक्रियता अचानक बढ़ जाने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता जहां एक ओर अपने पार्षदों को टिकाये रखने की जुगत लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सीटों का जोड़-भाग भी कर रहे हैं. सिर्फ राजनीतिक दलों के नेताओं की ही नहीं, बल्कि आम लोगों की उत्सुकता भी काफी बढ़ गई है. किस खेमे से कौन टूटेगा, इसको लेकर चरचा का बाजार काफी गरम है.

सिलीगुड़ी नगर निगम में कुल 47 सीटें हैं और बोर्ड गठन के लिए 24 सीटों की आवश्यकता है. करीब एक साल पहले संपन्न सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव में 47 सीटों में से वाम मोरचा ने 23 सीटें जीती थी. इनमें से माकपा के 21, आरएसपी तथा फारवार्ड ब्लॉक के एक-एक पार्षद हैं. 23 सीटें जीतने के बाद वाम मोरचा भले ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन बोर्ड गठन के लिए एक और पार्षद के समर्थन की आवश्यकता थी. तब वार्ड नंबर 15 के निर्दलीय पार्षद अरविंद घोष उर्फ अमू दा ने वाम मोरचा का समर्थन किया. सिलीगुड़ी नगर निगम पर वाम मोरचा का कब्जा हुआ और वाम मोरचा शासनकाल में करीब 20 वर्षों तक मंत्री रहे अशोक भट्टाचार्य नगर निगम के मेयर बन गये. तब से लेकर अब तक सबकुछ ठीक चल रहा था. कुछ महीने पहले राज्य विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से तृणमूल कांग्रेस की भारी जीत के बाद सभी समीकरण बदलने लगे हैं. विरोधी दलों के एक पर एक जिला परिषदों तथा ग्राम पंचायतों पर तृणमूल का कब्जा हो रहा है. विधानसभा चुनाव में भले ही पूरे राज्य में तृणमूल की जय-जयकार हुई हो, लेकिन सिलीगुड़ी महकमा इलाके में पार्टी की करारी हार हुई. महकमा की तीनों सीटों पर विरोधियों का कब्जा हो गया. अब एक बार फिर से सिलीगुड़ी नगर निगम के साथ ही सिलीगुड़ी महकमा परिषद भी तृणमूल के निशाने पर है.

वाम मोरचा के घटक दल भी राडार पर

भाजपा के घटक दल के दो पार्षद भी तृणमूल कांग्रेस के राडार पर हैं. तृणमूल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरएसपी नेता तथा नगर निगम में डिप्टी मेयर रामभजन महतो तथा फारवर्ड ब्लॉक की एमएमआइसी पार्षद दुर्गा सिंह के साथ तृणमूल नेता संपर्क में हैं. माना जा रहा है कि इन दोनों से तोल-मोल की जा रही है. ऐसे राजनीतिक हलकों में माकपा में भी टूट की चरचा चल रही है. माना जा रहा है कि 42 नंबर के वार्ड पार्षद तथा गौतम देव के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ने वाले माकपा नेता दिलीप सिंह कुछ पार्षदों को लेकर तृणमूल में जा सकते हैं.

क्या कहते हैं अशोक भट्टाचार्य

इन तमाम राजनीतिक कयासों के बीच मेयर अशोक भट्टाचार्य ने तृणमूल नेता तथा मंत्री गौतम देव पर असंवैधानिक कार्य-कलाप करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि एक मंत्री विरोधियों के कब्जे वाले नगर निगम पर इस तरह से अपने कब्जे का दावा नहीं कर सकते. इसके साथ ही श्री भट्टाचार्य ने कहा है कि वाम बोर्ड को कोई खतरा नहीं है. माकपा नेता जीवेश सरकार ने भी कहा है कि अशोक भट्टाचार्य पांच साल तक मेयर बने रहेंगे. इन दोनों नेताओं ने वाम मोरचा में टूट की संभावना से भी इंकार किया. उल्टे इन लोगों ने तृणमूल को चुनौती देते हुए कहा है कि पहले वह अपने पार्षदों को टूटने से बचा लें.

क्या बन सकता है समीकरण

तृणमूल के पास अभी 17 पार्षद हैं. बोर्ड पर कब्जा करने के लिए तृणमूल को अभी और 7 पार्षदों की आवश्यकता है. जहां तक वार्ड नंबर 15 के निर्दलीय पार्षद अरविंद घोष का सवाल है, तो वह पिछले कई महीनों से गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं. इसके अलावा कांग्रेस के चार तथा भाजपा के दो पार्षद हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शक्ति परीक्षण की स्थिति में बीमार होने की वजह से निर्दलीय पार्षद बैठक में शामिल नहीं भी हो सकते हैं. ऐसी परिस्थिति में भी बोर्ड गठन के लिए 24 पार्षदों की आवश्यकता पड़ेगी. कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के चारों पार्षद तृणमूल में जा सकते हैं. हाल ही में कांग्रेस पार्षद सुजय घटक ने वाम बोर्ड की कड़ी आलोचना की थी. अगर ऐसा होता है तो तृणमूल पार्षदों के सदस्यों की संख्या बढ़कर 21 हो जायेगी. कांग्रेस के पार्षदों के तृणमूल में जाने के कयास इसलिए लगाये जा रहे हैं कि हाल ही में कालियागंज नगरपालिका के अधिकांश कांग्रेसी पार्षद तृणमूल में शामिल हो गये हैं. यहां 25 साल के कांग्रेसी शासन का अंत हो गया है. नगरपालिका अध्यक्ष अरुण दे सरकार ने इस्तीफा दे दिया है और कांग्रेस से तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने वाले कार्तिक पाल बोर्ड बनाने की तैयारी में जुट गये हैं.

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