दमाइ विकास बोर्ड बनने के पहले ही गरमायी राजनीति

सिलीगुड़ी. दमाइ विकास बोर्ड बनने से पहले ही पहाड़ पर राजनीति गरमा उठी है. बोर्ड गठन को लेकर दमाई विकास व संस्कृति बोर्ड ने एक अन्य संगठन इंडिजेनस एससी एसोसिएशन पर सवाल उठाया है. यह सवाल बुधवार को सिलीगुड़ी में मीडिया के सामने दमाइ विकास व संस्कृति बोर्ड के महासचिव विनम राणा पहेली ने उठाया. […]
इन तीनों जातियों को लेकर अलग-अलग विकास बोर्ड बनाने का फैसला खुद मुख्यमंत्री (सीएम) ममता बनर्जी ने किया था. सीएम ने इन तीनों विकास बोर्ड को बनाने की घोषणा भानु जयंती के मौके पर दार्जिलिंग दौरे के दौरान की थी. श्री पहेली ने कहा कि सीएम के इस एलान के गवाह राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और हजारों लोग हुए. उन्होंने कहा कि जब सीएम ने खुद अलग-अलग और तीन विकास बोर्ड बनाने का फैसला लिया है तो विवेक सेवा कौन हैं जो तीनों जातियों को मिलाकर केवल एक विकास बोर्ड बनाने की बात कर रहे है और मीडिया के माध्यम से गोरखाओं को भ्रमित कर रहे हैं.
संगठन के कानूनी सलाहकार रीमेश मोथे ने भी मीडिया को संबोधित करते हुए पूरे भारत में दमाई जाति के लाखों और पहाड़-तराई-डुआर्स में 22 हजार से भी अधिक गोरखाओं के होने का दावा किया. श्री मोथे ने बताया कि अखिल भारतीय दमाई एसोसिएशन आजादी से पहले ही 1940 में संगठित हुआ था. जिसकी इकाई पूरे देश के प्रायः सभी प्रांतों में है.
पहाड़ दौरे के दौरान सीएम के इस एलान के बाद 17 जुलाई को कालिम्पोंग में अखिल भारतीय दमाई एसोसिएशन की केंद्रीय कमेटी की अगुवायी में दमाइ विकास व संस्कृति बोर्ड की नयी कमेटी का गठन हुआ और 25 जुलाई को कोलकाता में सीएम से मुलाकात कर कमेटी की नयी कार्यकारिणी का लिखित ब्यौरा सौंपा गया. इसकी एक प्रतिलिपि अति पिछड़ा कल्याण मंत्रालय के मुख्य सचिव को भी सौंपा गया. संगठन के अध्यक्ष गंगासागर पंचकोटी ने मीडिया के माध्यम से दमाइ, सार्की और कामी जाति के गोरखाओं से गुजारिश करते हुए कहा कि किसी के बहकावे में न आये. जो केवल चार-पांच सौ लोगों को लेकर संगठन चला रहा है वह पूरे समुदाय का कल्याण कभी नहीं कर सकता और नहीं चाहता है. इस मुद्दे को लेकर विवेक सेवा से उनके मोबाइल फोन पर कई बार संपर्क करने की कोशिश की गयी, लेकिन संपर्क नहीं हो सका.
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