मोर पंखों की धड़ल्ले से हो रही तस्करी
सिलीगुड़ी. भारत की राष्ट्रीय पक्षी मोर के पंखों की धड़ल्ले से तस्करी व खुलेआम बिक्री किये जाने का खुलासा वन विभाग ने किया है. सिलीगुड़ी के निकट सुकना वन्य प्राणी विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर रंगटंग बिट इलाके में मुहिम चलाकर तीन तस्करों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. […]
सिलीगुड़ी. भारत की राष्ट्रीय पक्षी मोर के पंखों की धड़ल्ले से तस्करी व खुलेआम बिक्री किये जाने का खुलासा वन विभाग ने किया है. सिलीगुड़ी के निकट सुकना वन्य प्राणी विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर रंगटंग बिट इलाके में मुहिम चलाकर तीन तस्करों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. तस्करों की शिनाख्त अली हुसैन शेख, नजमूल इस्लाम व सुजाव अली के रूप में हुई है. तीनों ही बिहार के वाशिंदे बताये जा रहे हैं.
सुकना वन्य प्राणी विभाग के अधिकारी निताई राय ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि मोर के पंखों की बिक्री व तस्करी दोनों ही गैर-कानूनी है. मोरों को मार कर इनके पंख निकाल कर विदेशों में तस्करी की जाती है. इतना ही नहीं, मोरों के मांस भी खाने के लिए अवैध रूप से बिक्री की जाती है. श्री राय ने बताया कि उत्तर बंगाल में मोरों की संख्या काफी अधिक है. सुकना व आसपास के जंगलों में भी मोरों की संख्या अच्छी खासी है.
श्री राय का कहना है कि बीते कई दिनों से ही उत्तर बंगाल में एक गिरोह के सक्रिय होने की खुफिया खबर थी. गिरफ्तार तीनों तस्कर सुकना के नजदीक रंगटंग जंगल में एक मोर को पकड़ कर उसके सभी पंख अलग कर रहे थे, तभी तीनों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया. तीनों को सिलीगुड़ी अदालत में पेश किया गया, जहां न्यायाधीश ने सभी की जमानत याचिका खारिज कर दी और न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. सरकारी अधिवक्ता सुदीप राय बासुनिया ने बताया कि अदालत में तीनों तस्करों के साथ घायल मोर को भी पेश किया गया. न्यायाधीश ने मोर की उचित चिकित्सा व्यवस्था कर पूरी तरह स्वस्थ होने पर वापस जंगल में छोड़ने का वन विभाग को निर्देश दिया. इस तस्कर गिरोह के तार कहां तक फैला है और कौन-कौन शामिल है, वन विभाग इसकी गहन तहकीकात में जुट गई है. साथ ही गिरफ्तार तीनों तस्करों से गहन पूछताछ की जा रही है.
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