कुचलीबाड़ी के अस्तित्व पर उठा सवाल, तीनबीघा गलियारा बंद करने की मांग

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सिलीगुड़ी: भारत और बांग्लादेश के बीच छींटमहल विनिमय को लेकर ऐतिहासिक समझौते से पहले कूचबिहार जिले के मेखलीगंज थाना अंतर्गत कुचलीबाड़ी इलाके के अस्तित्व को लेकर सवाल उठने खड़े हो गये हैं. कुचलीबाड़ी की आबादी करीब डेढ़ लाख है और यदि तीनबीघा गलियारा न हो, तो यह भी मूल भारतीय जमीन से अलग-थलग दिखेगा. ऐसे […]

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सिलीगुड़ी: भारत और बांग्लादेश के बीच छींटमहल विनिमय को लेकर ऐतिहासिक समझौते से पहले कूचबिहार जिले के मेखलीगंज थाना अंतर्गत कुचलीबाड़ी इलाके के अस्तित्व को लेकर सवाल उठने खड़े हो गये हैं. कुचलीबाड़ी की आबादी करीब डेढ़ लाख है और यदि तीनबीघा गलियारा न हो, तो यह भी मूल भारतीय जमीन से अलग-थलग दिखेगा.

ऐसे में यहां के लोग बांग्लादेश के दाहाग्राम तथा अंगारपोता को जोड़ने के लिए भारतीय सीमा क्षेत्र में स्थित तीनबीघा व्यवस्था को बंद करने की मांग की है. यहां के लोगों का कहना है कि दोनों देश यदि छींटमहल विनिमय को लेकर समझौता कर रहे हैं, तो कुचलीबाड़ी के भविष्य को भी लेकर विचार-विमर्श होना चाहिए. तीनबीघा आंदोलन से जुड़े तथा स्थानीय मेखलीगंज प्रेस क्लब के सचिव संतोष शर्मा का कहना है कि कुचलीबाड़ी के लोगों को मेखलीगंज आने-जाने में तीनबीघा गलियारे का प्रयोग करना पड़ता है.

इसी गलियारे से बांग्लादेश के दाहाग्राम तथा अंगारपोता के लोग भी आवाजाही करते हैं. कुचलीबाड़ी के लोगों को लगता है कि वह अपने ही देश में विदेशी बनकर रह गये हैं. संतोष शर्मा का कहना है कि कुचलीबाड़ी के लोग शुरू से ही बांग्लादेश को तीनबीघा गलियारा दिये जाने के विरोधी रहे हैं. इसको लेकर आंदोलन में कुचलीबाड़ी के तीन लोगों की पुलिस की गोली से मौत भी हुई थी.

उसके बाद भी कुचलीबाड़ी के भविष्य को लेकर किसी ने कोई चिंता नहीं की. दूसरी तरफ भाजपा के राज्य अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने भी कुचलीबाड़ी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए बांग्लादेशी सीमा क्षेत्र दाहाग्राम तथा अंगारपोता के भी विनिमय की मांग की है. उन्होंने इस संबंध में एक प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी भेजा है. श्री सिन्हा हाल ही में तीनबीघा दौरे पर भी गये थे. कल उन्होंने सिलीगुड़ी में आयोजित एक संवाददता सम्मेलन के दौरान आशंका व्यक्त की थी कि एक ओर जहां दोनों देश की सरकारें छींटमहल विनिमय को लेकर ऐतिहासिक समझौता कर रही है, वहीं दूसरी ओर भारतीय क्षेत्र कुचलीबाड़ी कहीं नया छींटमहल न बन जाये.

क्या है स्थिति
कुचलीबाड़ी भारतीय सीमा क्षेत्र में स्थित है और यह कसबा चारों तरफ से बांग्लादेश से घिरा हुआ है. तीनबीघा गलियारा कुचलीबाड़ी को भारतीय सीमा क्षेत्र के मुख्य भाग बांग्लादेश से जोड़ता है. कुचलीबाड़ी के चारों ओर सीमा पर घेराबंदी नहीं की गई है. इसके अलावा तीस्ता नदी के इस इलाके से गुजरने की वजह से भी स्थिति काफी विकराल हो गई है. आधी तीस्ता नदी भारतीय सीमा क्षेत्र में है, तो आधी बांग्लादेशी सीमा क्षेत्र में. आरोप है कि घेराबंदी और तीस्ता नदी के किनारे पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण बांग्लादेशी घुसपैठिये और बदमाश कुचलीबाड़ी सीमा क्षेत्र में प्रवेश कर अपराध को अंजाम देते हैं.
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