बिजली दर में वृद्धि का विरोध, अबेका ने की देश में आंदोलन की घोषणा संसद अभियान का एलान

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सिलीगुड़ी: ऑल बंगाल इलेक्ट्रिसिटी कंज्यूमर एसोसिएशन (अबेका) ने बिजली बिल में बेतहाशा वृद्धि के खिलाफ संसद अभियान का एलान किया है. सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में अबेका के राज्य सचिव प्रद्युत चौधरी ने कहा है कि कुछ वर्षो के दौरान पश्चिम बंगाल के साथ-साथ पूरे देश में बिजली दर में […]

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सिलीगुड़ी: ऑल बंगाल इलेक्ट्रिसिटी कंज्यूमर एसोसिएशन (अबेका) ने बिजली बिल में बेतहाशा वृद्धि के खिलाफ संसद अभियान का एलान किया है. सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में अबेका के राज्य सचिव प्रद्युत चौधरी ने कहा है कि कुछ वर्षो के दौरान पश्चिम बंगाल के साथ-साथ पूरे देश में बिजली दर में बेतहाशा वृद्धि कर दी गयी है. पश्चिम बंगाल में भी बिजली दर में अत्यधिक वृद्धि के कारण आम उपभोक्ता परेशान हैं.

राज्य में बिजली बिल में कमी को लेकर कई बार आंदोलन के बाद भी कोई लाभ नहीं हुआ है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लेकर राज्यपाल तक से इस मामले में गुहार लगायी गयी, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में कोई पहल नहीं किये जाने के कारण बाध्य होकर केंद्र सरकार के सामने आंदोलन करने का निर्णय लिया गया है.

इस क्रम में सात अप्रैल को संसद अभियान चलाया जायेगा और केंद्र सरकार से बिजली अधिनियम 2003 रद्द करने की मांग की जायेगी. चौधरी ने बताया कि बिजली अधिनियम 2003 के कारण ही बिजली बिल में भारी वृद्धि हो रही है और आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. खासकर गरीब लोग बिजली की कीमत नहीं चुका पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार के लिए बिजली देना कोई व्यवसाय नहीं है. बिजली अत्यंत आवश्यक है और सभी लोगों तक कम कीमत में बिजली पहुंचे, इसकी जिम्मेदारी सरकार की है. उन्होंने कहा कि संसद अभियान का मुख्य मकसद केंद्र सरकार का इस ओर ध्यान आकृष्ट करना है और साथ ही इस आंदोलन को पूरे देश में चलाने का भी निर्णय लिया जायेगा. सात अप्रैल को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल को ज्ञापन देने के साथ-साथ उसके अगले दिन आठ अप्रैल को एक कन्वेंशन का भी आयोजन किया जायेगा. इसमें दिल्ली हाइकोर्ट पूर्व न्यायाधीश राजेंद्र सच्चर, दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्राध्यापक नंदिनी नारायण के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर भी उपस्थित रहेंगी. संवाददाता सम्मेलन में अबेका के जिला प्रमुख शंकर पाल, आशीष मल्लिक, चंदन बसाक एवं सुप्रीम पाल भी उपस्थित थे.

सब्सिडी देने की मांग

इसके साथ ही चौधरी ने बिजली उपभोक्ताओं को केंद्र और राज्य सरकार से सब्सिडी देने की मांग की. उन्होंने कहा कि कई राज्य सरकारें बिजली बिल कम करने के लिए बिजली कंपनियों को सब्सिडी दे देती हैं, जो सही नहीं है. उन्होंने सीधे उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने की मांग की. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को बिजली बिल के 30 प्रतिशत तथा राज्य सरकार को 20 प्रतिशत सब्सिडी देनी चाहिए. इससे स्वाभाविक तौर पर उपभोक्ताओं को लाभ होगा.

चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी

चौधरी ने कहा कि आने वाले दिनों में बिजली की बढ़ती दर एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनेगा. विधानसभा चुनाव में भी यह एक बड़ा मुद्दा बनेगा. उन्होंने दिल्ली में आम आदमी पार्टी का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में महंगी बिजली एक बड़ा चुनावी मुद्दा था और इसका लाभ आप पार्टी को मिला है. आप नेता अरविंद केजरीवाल ने बिजली बिल में 50 प्रतिशत की कटौती की घोषणा अपने चुनाव प्रचार के दौरान की थी. इसका उन्हें सीधा लाभ मिला. विधानसभा चुनाव में आप पार्टी की भारी जीत हुई और अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बन गये.

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