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रवींद्रनगर अग्निकांड : हाइड्रेन पर दुकान बनाकर वसूलते थे किराया

Updated at : 07 Feb 2020 3:20 AM (IST)
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रवींद्रनगर अग्निकांड : हाइड्रेन पर दुकान बनाकर वसूलते थे किराया

तृणमूल नेता ने नगर निगम के माकपा बोर्ड पर लगाये गंभीर आरोप सिलीगुड़ी : पिछले दिनों शहर के रवींद्र नगर में हुए भयानक अग्निकांड को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है. अग्निकांड में प्रभावित दुकानों को नगर निगम के हाईड्रेन पर बनाया गया था. हाईड्रेन पर दुकान बनाकर वहां पीछे निवास कर रहे […]

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तृणमूल नेता ने नगर निगम के माकपा बोर्ड पर लगाये गंभीर आरोप

सिलीगुड़ी : पिछले दिनों शहर के रवींद्र नगर में हुए भयानक अग्निकांड को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है. अग्निकांड में प्रभावित दुकानों को नगर निगम के हाईड्रेन पर बनाया गया था. हाईड्रेन पर दुकान बनाकर वहां पीछे निवास कर रहे मकान मालिक किराया भी वसूल रहे थे.
इसको लेकर सिलीगुड़ी नगर निगम में विरोधी दल के नेता रंजन सरकार ने आरोप लगाया है कि माकपा ने पूरे शहर को अंदर ही अंदर खोखला कर दिया है. शहर के बड़े-बड़े हाईड्रेनों पर कुछ लोग कब्जा कर वहां अपना व्यापार जमा रहे है.
इतना ही नहीं ऐसे लोगों को नगर निगम ट्रेड लाइसेंस भी मुहैया करा रही है. लेकिन लाइसेंस मुहैया कराने से पहले इन सभी पर ध्यान नहीं रखा जाता है. जिस वजह से आये दिन एक के बाद एक अप्रिय घटना हो रही है. बाद में इन घटनाओं का भुगतान व्यापारियों को करना पड़ रहा है.
गौरतलब हो कि बुधवार तड़के अग्निकांड की घटना में सिलीगुड़ी नगर निगम के 21 नंबर वार्ड रवीद्र नगर इलाके में 9 दुकाने क्षतिग्रस्त हुई थी. हैरत की बाद यह है कि दो-तीन दुकानों को छोड़कर किसी भी दुकान का इंश्योरेंस नहीं था. उसमें से कई दुकाने ऐसे भी हैं जो नगर निगम के हाईड्रेन पर बनाये गये थे. केवल इतना ही नहीं, उन दुकानदारों को दुकान का किराया भी देते थे.
यहां सवाल ये भी खड़ा हो रहा है कि हाईड्रेन के ऊपर दुकान लगाने के लिए किराया किसके पॉकेट में जाता होगा? इतने वर्षों में क्या इस ओर नगर निगम का ध्यान नहीं गया? अगर गया भी तो इतने दिनों तक इसे लेकर कार्यवाही क्यों नहीं हुई? इस घटना के बाद गुरुवार को मेयर अशोक भट्टाचार्य ने स्थानीय प्रभावित दुकानदारों को लेकर एक बैठक किया.
स्थानीय एक दुकानदार ने बताया कि वहां उनका 40 साल पुराना स्टूडियो था. इस घटना में उनका सबकुछ राख हो गया. उन्होंने बताया कि वहां केवल दो दुकानों का इंश्योरेंस था. उन्होंने बताया कि यह दुकान उनका अपना नहीं था. स्थानीय शंखु विश्वास नामक किसी व्यक्ति के नाम पर सभी दुकानों का किराया जाता था. इस घटना के बाद वे दिशाहीन हो गये.
इस विषय पर सिलीगुड़ी नगर निगम के विरोधी दल के नेता रंजन सरकार ने भी स्थानीय माकपा बोर्ड पर कई सवाल उठाये हैं. रंजन सरकार ने व्यंग करते हुए कहा कि ये दुकानदार वहां लंबे समय से रह रहे हैं. उनके पास नगर निगम के ड्रेड लाइसेंस तथा अन्य कई सुविधा है तो नगर निगम उन्हें जमीन का मालिकाना हक क्यों नहीं दे देती है? केवल रवीद्र नगर ही नहीं बल्कि पूरे शहर में ऐसी समस्या है. उन्होंने बताया कि ऐसे अहम विषयों को लेकर एसएमसी के पास पॉलिसी होना चाहिए.
उन्होंने माकपा पर 50 वर्षों में सिलीगुड़ी नगर निगम को बेचने का आरोप लगाया है. रंजन सरकार ने बताया कि ट्रेड लाइसेंस को लेकर भी सिलीगुड़ी नगर निगम में घोटाले होते है. लेकिन तृणमूल का बोर्ड आने के बाद ट्रेड लाइसेंस ऑनलाइन किया जायेगा. उन्होंने आने वाले दिनों में म्यूटेशन फिस को समाप्त करने का आश्वनासन दिया है. रंजन सरकार ने ये भी आरोप लगाया है कि मेयर के दिमाग में कुछ नहीं है. सत्ता का मोह उनका पिछा नहीं छोड़ रहा है.
वहीं सिलीगुड़ी नगर निगम के डिप्टी मेयर रामभजन महतो ने बताया कि बोर्ड में आने के बाद उन लोगों ने फुटपाथ पर दुकान लगाने वालों को ट्रेड लाइसेंस देना बंद कर दिया है. रही बात सिलीगुड़ी नगर निगम के हाईड्रेनों पर कब्जा की, तो उन्होंने बताया कि अग्निकांड में क्षतिग्रस्त दुकाने तीन से 40 वर्षों से वहां है. लेकिन वे 5 वर्ष पहले ही एसएमसी की सत्ता में आये है. उन्होंने बताया कि पहले के स्थानीय निकायों को इस ओर नजर रखनी चाहिए था.
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