मालदा : अभाव को पूरा करने में सीमा बन गयीं मूर्तिकार
Updated at : 28 Jan 2020 2:14 AM (IST)
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मालदा : आज से 30 साल पहले सीमा दास ने परिवार को आर्थिक संकट से उबारने के लिये मूर्ति निर्माण की कला को अपनाया था. पिछले 30 साल में गंगा में पानी बहुत कुछ बह चुका है. आज ओल्ड मालदा नगरपालिका क्षेत्र के छह नंबर वार्ड अंतर्गत कंचनजंघा इलाके की निवासी सीमा दास की उम्र […]
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मालदा : आज से 30 साल पहले सीमा दास ने परिवार को आर्थिक संकट से उबारने के लिये मूर्ति निर्माण की कला को अपनाया था. पिछले 30 साल में गंगा में पानी बहुत कुछ बह चुका है. आज ओल्ड मालदा नगरपालिका क्षेत्र के छह नंबर वार्ड अंतर्गत कंचनजंघा इलाके की निवासी सीमा दास की उम्र 50 है. इस दौरान उन्होंने बहुत कुछ पाया और इसके लिये इनकी मूर्तिकला की बड़ी देन है.
इन दिनों सरस्वती पूजा के लिये मूर्ति निर्माण का काम चल रहा है. इस बार इन्होंने देवी सरस्वती की 25 मूर्तियों के निर्माण का जिम्मा लिया है. इस काम में इनके पति प्रकाश कुमार दास और दोनों बेटे सोनाई और सोमनाथ दास भी हाथ बंटा रहे हैं. कॉलेज की पढ़ाई के साथ ही ये मूर्ति निर्माण में हाथ बंटा रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि यह परिवार खानदारी रुप से मूर्तिकार है. लेकिन जिस तरह से परिवार को आर्थिक संकट से उबारने में सीमा दास ने दृढ़ता का परिचय दिया है उससे ओल्ड मालदा नगरपालिका प्रशासन प्रेरित है.
यही वजह है कि नगरपालिका प्रशासन सीमा दास को सम्मानित करने पर विचार कर रहा है. एक बेहतर मूर्तिकार होने के चलते सीमा दास को मूर्तियों के ऑर्डर पर्याप्त रुप से मिल रहे हैं जिससे इनका उत्साह बना हुआ है. सरस्वती पूजा को अब मात्र 48 घंटे बाकी हैं. इसलिये वे मूर्तियों को अंतिम रुप देने में जी जान से जुटी हुई हैं.
फिलहाल मूर्तियों को रंगने और उनकी सजावट पर ध्यान दे रही हैं.
सीमा दास ने बताया कि उनकी मूर्तियां 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की कीमत वाली हैं. वे देवी सरस्वती के अलावा दुर्गा, काली, गणेश, कार्तिक और मनसा सहित विभिन्न देव देवियों की मूर्तियां बनाती हैं. हालांकि इनका कहना है कि जिस तरह से बांस, रंग, मिट्टी और मूर्तियों के दाम बढ़े हैं उस हिसाब से इन सुंदर और आकर्षक मूर्तियों के दाम नहीं बढ़े हैं.
इनका कहना है कि ससुराल में आने पर उन्होंने पति से मूर्ति निर्माण की कला सीखी थी. वहीं से उन्हें इस कला के प्रति रुझान पैदा हुआ. वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रशंसक हैं. कहती हैं कि उन्हें उम्मीद है कि सीएम उनके जैसे मूर्तिकारों के लिये कुछ ठोस कदम उठायेंगी. लेकिन मूर्ति निर्माण के प्रति उनकी जो ललक है उसे वे जारी रखेंगी.
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