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“शहीदों के परिजनों को मिलेगी नौकरी”

शहीद दिवस : गोरखा रंगमंच भवन के सामने आयोजित समारोह में जीटीए चेयरमैन ने की घोषणा कहा: गोरखालैंड का विरोध हमने कभी नहीं किया लोक संगीत को संरक्षित करने के लिए बनेगा अलग विभाग दार्जिलिंग : शहीद दिवस के मौके पर गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) की ओर से शहीदों के परिजनों को नौकरी देने की […]

शहीद दिवस : गोरखा रंगमंच भवन के सामने आयोजित समारोह में जीटीए चेयरमैन ने की घोषणा

कहा: गोरखालैंड का विरोध हमने कभी नहीं किया

लोक संगीत को संरक्षित करने के लिए बनेगा अलग विभाग

दार्जिलिंग : शहीद दिवस के मौके पर गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) की ओर से शहीदों के परिजनों को नौकरी देने की घोषणा की गयी है. गोजमुमो (विनय गुट) के दार्जिलिंग महकमा समिति ने स्थानीय गोरखा रंग मंच भवन के सामने शहीद दिवस समारोह का आयोजन किया. आयोजित शहीद दिवस समारोह में गोजमुमो (विनय गुट) के केंद्रीय महासचिव अनित थापा विशेष रूप से उपस्थित रहे.

वहीं अन्य केंद्रीय नेताओं में उपाध्यक्ष सतीश पोखरैल, सांगठनिक सचिव एलएम लामा, तरंगा पंडित, डीके प्रधान भी मौजूद रहे. समारोह की अध्यक्षता गोजमुमो दार्जिलिंग महकमा समिति के अध्यक्ष आलोक कांत मणि थुलुंग ने की. कार्यक्रम के शुभारंभ में गोरखा रंग मंच भवन के सामने स्थित शहीद बेदी पर शहीदों का स्मरण करते हुए मुख्य अतिथि अनित थापा ने दीप जलाकर खादा अर्पित किया. इसके बाद शहीदों की आत्मा की शांति के लिए पूजा पाठ किया गया.

शहीद दिवस समारोह को संबोधित करते हुए मोर्चा महासचिव एवं जीटीए चैयरमैन अनित थापा ने शहीदों के परिवारों को जीटीए की ओर से नौकरी देने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष विनय तमांग के जीटीए चेयरमैन पद पर रहने के दौरान ही शहीदों के परिवारों को नौकरी दिलाने को लेकर पहल शुरू की थी. जिसके तहत शनिवार को यह संभव हुआ है.

श्री थापा ने कहा कि शहीद पर राजनीति करना उचित नहीं है. इसलिये हमलोगों ने जाति, धर्म और पार्टी देखकर नहीं बल्कि शहीद के त्याग और बलिदान का सम्मान करते हुए परिवारवालों को नौकरी देने का निर्णय लिया है. भाषा, सांस्कृति और संगीत जिंदा रहा तो जाति भी रहेगी. जब जाति ही नहीं रहेगी तो राज्य गठन होने से भी कोई फायदा नहीं होगा. इसलिये गोर्खा समाज का लोक संगीत दिन-प्रतिदिन विलुप्त होता जा रहा है. इसलिये जीटीए ने गोर्खाओं के लोक संगीत को संरक्षित करने के लिए एक अलग विभाग का गठन करेगा.

उन्होंने कहा कि हमलोगों को गोर्खालैंड विरोधी कहा जाता है. लेकिन हमलोग गोर्खालैंड विरोधी नहीं हैं. 1986 के गोर्खालैंड आंदोलन के बारे में मुझे पता नहीं है. लेकिन 2007 से हुए गोर्खालैंड आंदोलन में संघर्षरत रहा हूं. दो बार जेल भी जा चुका हूं. पिछले 2017 में गोर्खालैंड आंदोलन जिस तरह से चल रहा था, उसका हमलोगों ने विरोध किया था. लेकिन गोर्खालैंड का विरोध कभी नहीं किया था. हमलोगों पर गोर्खालैंड आंदोलन के बिक्री करने, जाति विरोधी आदि जैसे अनेक आरोप लगाकर कटाक्ष किया है.

लेकिन गोर्खालैंड हरेक गोर्खाओं के मन में बैठने वाला विषय है. इस विषय का भला हमलोग कैसे विरोध कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि अलग राज्यच गोर्खालैंड राज्य सरकार से मिलने वाला विषय नहीं है. यह केंद्र का विषय है. इसके लिए क्या संघर्ष करना पड़ता है, जिसके लिए बुद्धिजीवियों की जरूरत है. गोर्खालैंड के लिए सही नेतृत्व का होना जरूरी है. आयोजित शहीद दिवस समारोह में शहीदों का स्मरण करते हुये स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया.

Prabhat Khabar Digital Desk
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