सैनिक अस्पताल को बरकरार रखने के लिए शांता ने उठायी आवाज
Updated at : 26 Jul 2019 1:10 AM (IST)
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मामले को लेकर राज्यसभा में सांसद ने उठाया सवाल कहा- अस्पताल हटाने से पूर्व सैनिकों को होगी काफी परेशानी कर्सियांग : राज्यसभा के शून्यकाल में चेयरमैन के माध्यम से राज्यसभा सांसद शांता छेत्री ने दार्जिलिंग से कुछ दूरी पर स्थित लेबोंग सैनिक अस्पताल को दूसरे राज्य असम अथवा अरूणाचल प्रदेश में सिफ्ट नहीं करने की […]
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मामले को लेकर राज्यसभा में सांसद ने उठाया सवाल
कहा- अस्पताल हटाने से पूर्व सैनिकों को होगी काफी परेशानी
कर्सियांग : राज्यसभा के शून्यकाल में चेयरमैन के माध्यम से राज्यसभा सांसद शांता छेत्री ने दार्जिलिंग से कुछ दूरी पर स्थित लेबोंग सैनिक अस्पताल को दूसरे राज्य असम अथवा अरूणाचल प्रदेश में सिफ्ट नहीं करने की मांग की. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर रक्षा मंत्रालय (डिफेंस मिनिस्ट्री) ने लेबोंग स्थित सैनिक अस्पताल को यहां से सिफ्ट करने के लिए परियोजना तैयार किया है. यहां से अस्पताल सिफ्ट करने से अवकाशप्राप्त गोरखा रेजिमेंट को काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा.
इसीएचएसविहीन यह अस्पताल अवकाशप्राप्त गोरखा सैनिकों को लाइफलाईन के रूप में सेवा पहुंचाने का कार्य करता है. यदि इस अस्पताल को यहां से सिफ्ट कर दिया गया तो अवकाशप्राप्त गोरखा सैनिकों को इससे संबंधित विशेष कार्यों को लेकर काफी दूरी तय करने को मजबूर होना पड़ेगा. जिन्होंने वर्षों तक राष्ट्र की सेवा में अहम भूमिका अदा करने का कार्य किया, उनके लिए यह पहल अनुचित है.
उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय की ओर से लेबोंग सैनिक अस्पताल में विस्तरों की संख्या कम होने का कारण दिखाकर यहां से अस्पताल सिफ्ट करने को कहा गया है, जो एक अत्यंत सोंचनीय विषय है. परंतु यह सच नहीं है. सच तो यह है कि काफी दिनों से इस अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है. उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय को यह भी अध्ययन करना चाहिए कि 158 विस्तरवाली यह अस्पताल अतिरिक्त भार को वहन नहीं कर सकता. ऐसे भी इस अस्पताल में बाहरी मरीजों के अलावा इस अस्पताल में चिकित्सा कराने के लिए आनेवाले मरीजों की भार अधिक होती है.
उन्होंने संबंधित विभागीय मंत्री से इसपर पुनः विचार करने तथा इस अस्पताल को लेबोंग में ही बरकरार रखने सहित अस्पताल को सुचारु रूप से सटीक तरीके से संचालन करने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की बहाली करने की मांग भी की. उन्होंने दार्जिलिंग पहाड़वासी से लेबोंग सैनिक अस्पताल को यहां से सिफ्ट करने के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किये गये निर्देश को विरोध करने का आह्वान भी किया है.
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