मां और दो बच्चे दृष्टिहीन लगायी मदद की गुहार
Updated at : 18 Jun 2019 1:52 AM (IST)
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आर्थिक तंगी के कारण नहीं हो पा रहा है इलाज नागराकाटा के लुकसान चाय बागान के बीच लाइन में रहता है यह परिवार नागराकाटा : नागराकाटा ब्लॉक के लुकसान चाय बागान के बीच लाइन में एक ही परिवार के तीन सदस्य दृष्टिहीन है. आर्थिक तंगी के कारण इनका इलाज नहीं हो पा रहा है. मां […]
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आर्थिक तंगी के कारण नहीं हो पा रहा है इलाज
नागराकाटा के लुकसान चाय बागान के बीच लाइन में रहता है यह परिवार
नागराकाटा : नागराकाटा ब्लॉक के लुकसान चाय बागान के बीच लाइन में एक ही परिवार के तीन सदस्य दृष्टिहीन है. आर्थिक तंगी के कारण इनका इलाज नहीं हो पा रहा है. मां के साथ दो बच्चों की आखों की रोशनी नहीं है. पिता शारीरिक तौर पर कमजोर हैं और किसी तरह मजदूरी कर परिवार पालते हैं. परिवार ने सरकार व स्वयंसेवी संगठनों से मदद की गुहार लगायी है.
लुकसान चाय बागान बीच लाइन निवासी बिलासो उरांव (41) की आंखों में 14 साल पहले संक्रमण हुआ था. ठीक से इलाज नहीं करा पाने के कारण आंखों की रोशनी चली गयी. बिलासो का बेटा शिवराज उरांव (10) व छोटी बेटी परानी उरांव (7) जन्म से दृष्टिहीन हैं. शिवराज दृष्टिहीनों के एक विद्यालय में अध्ययन कर रहा है. जबकी परानी को स्कूल में दाखिला नहीं दिलाया जा सका है. परिवार में सिर्फ बिलासो उंराव के पति को दिखता है. उसकी मामूली कमाई पर पूरा परिवार निर्भर है. वह भी शारीरिक तौर पर काफी कमजोर है और पत्नी व बच्चों का इलाज कराने में असमर्थ है.
बिलासो उंराव ने बताया कि उसने शुरू-शुरू में सिलीगुड़ी आकर इलाज कराया था. वहां से चिकित्सकों ने उसे कोलकाता जाने की सलाह दी थी. लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह आगे इलाज नहीं करवा पायी. जन्म के बाद बच्चे भी दृष्टिहीन रह गये. उनके इलाज के लिए वह दर-दर भटकती रही. एक स्वयंसेवी सगठन के सहयोग से बेटे को दृष्टिहीन स्कूल में भर्ती करवाया गया है. लेकिन बेटी के लिए अबतक जन्म प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया है. बिलासो उरांव ने स्वयंसेवी संगठनों व सरकार से मदद की गुहार लगायी है, ताकि बच्चों का भविष्य सुधर सके व उनकी आंखों की रोशनी लौट सके.
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